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फर्जी FIR केस : अवर सचिव,दो इंस्पेक्टर व सेवानिवृत DSP ने किया सरेंडर,मिली जमानत

  • मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात थो स्पेशल ब्रांच के इंस्पेक्टर रामदयाल मुंडा 
  • बड़कागांव थाना प्रभारी रहते कराया था फर्जी एफआईआर

Hazaribagh: पेयजल एवं जल स्वच्छता विभाग के अवर सचिव कुमुद झा,स्पेशल ब्रांच में तैनात मुख्यमंत्री सुरक्षा में तैनात इंस्पेक्टर रामदयाल मुंडा,इंस्पेक्टर अकील अहमद और सेवानिवृत डीएसपी अखिलेश सिंह के खिलाफ जमानतीय वारंट जारी होने के बाद सभी ने कोर्ट में सरेंडर किया और कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दिया है. 


हजारीबाग ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट विवेक कुमार की अदालत ने मंटू सोनी उर्फ शनि कांत के कोर्ट परिवादवाद पर झारखंड हाईकोर्ट से स्टे को हटाने के बाद वारंट जारी किया गया था. इससे पूर्व हजारीबाग के बड़कागांव में फर्जी एफआईआर कांड संख्या 135/2016 मामले पर हजारीबाग कोर्ट के कार्रवाई पर रोक के अंतरिम आदेश को हाईकोर्ट के जस्टिस अनिल चौधरी की अदालत ने हटा दिया था.  हाईकोर्ट ने एनटीपीसी के पूर्व जीएम टी गोपाल कृष्ण पर दो हजार और अवर सचिव कुमुद झा पर एक हजार का जुर्माना भी लगाया था. 

 

हजारीबाग न्यायालय के शिवानी शर्मा की अदालत द्वारा तत्कालीन गढ़वा बीडीओ कुमुद झा, मधुपुर इंस्पेक्टर रामदयाल मुंडा (अब मुख्यमंत्री सुरक्षा) स्पेशल ब्रांच इंस्पेक्टर अकील अहमद, सेवानिवृत्त डीएसपी अखिलेश सिंह और एनटीपीसी के सेवानिवृत्त जीएम टी गोपाल कृष्ण के खिलाफ समन जारी किया था. चिरुडीह में 17 मई 2016 को हुई घटना में बड़कागांव पुलिस ने तत्कालीन मजिस्ट्रेट वर्तमान गढ़वा बीडीओ का आवेदन बदलकर अन्य लोगों का नाम जोड़ दिया था. यह मामला बड़कागांव थाना की कांड संख्या 135/16 से संबंधित है.


कोर्ट ने संज्ञान लेकर जारी किया था समन 

हजारीबाग न्यायालय की न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी शिवानी शर्मा की कोर्ट ने तत्कालीन गढ़वा बीडीओ कुमुद झा, मधुपुर इंस्पेक्टर रामदयाल मुंडा, स्पेशल ब्रांच इंस्पेक्टर अकील अहमद, सेवानिवृत्त डीएसपी अखिलेश सिंह, एनटीपीसी के सेवानिवृत्त जीएम टी गोपाल कृष्ण को प्रथम दृष्टया आरोपी मानते हुए समन जारी किया था. सभी आरोपियों को 20 नवंबर को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश जारी किया गया था. 


सभी आरोपियों को मंटू सोनी द्वारा दायर परिवाद वाद संख्या 1644/22 में सुनवाई में अधिवक्ता पवन यादव, रंजन कुमार अनिरुद्ध कुमार की दलील और गवाहों को सुनने के बाद कोर्ट ने धारा 166, 166ए,167, 218 और 220 में प्रथम दृष्टया दोषी माना और संज्ञान लेते हुए समन जारी करने का आदेश जारी किया था. प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए सभी आरोपी उस समय बड़कागांव, हजारीबाग में पदस्थापित थे.

 

थानेदार ने सूचक के आवेदन को बदलकर जोड़ दिए थे 29 नाम 

 

तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी कुमुद झा के आवेदन को बदलकर तत्कालीन थानेदार रामदयाल मुंडा (वर्तमान में स्पेशल ब्रांच मुख्यमंत्री सुरक्षा में तैनात) ने बड़कागांव थाना कांड संख्या 135/16 की केस डायरी के पैरा एक में कुमुद झा के हस्तलिखित आवेदन प्राप्त होने की बात लिखी है. जबकि मूल एफआईआर कॉपी टाइप किया हुआ है. थानेदार की कारगुजारी की पुष्टि करते हुए कुमुद झा ने कोर्ट में बयान दर्ज कराते हुए कहा था कि उनके आवेदन को बदलकर थानेदार ने अपने मुंशी से टाइप करवाकर एफआईआर दर्ज की है.


कुमुद झा के आवेदन में दो लोगों के नाम थे. थानेदार ने 29 अन्य लोगों का नाम जोड़ दिया था. एफआईआर कॉपी और कोर्ट में कुमुद झा का सिग्नेचर अलग-अलग है. एफआईआर कॉपी व डेट लिखावट कोर्ट में किए सिग्नेचर और डेट लिखावट में फर्क है. इस प्रकरण में मंटू सोनी ने हजारीबाग सदर सीजीएम ऋचा श्रीवास्तव की अदालत में परिवादवाद दायर किया था, जिसे ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट शिवानी शर्मा की कोर्ट में ट्रांसफर किया गया था. वर्तमान में विवेक कुमार की अदालत में मामले सुनवाई चल रही है.

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