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वेतन से फर्जी निकासी: वित्त विभाग के कर्मचारी ने ही सबसे पहले किया था फर्जीवाड़ा

Ranchi: राज्य में वेतन मद से फर्जी निकासी का सबसे पहला मामला वित्त विभाग में ही पकड़ा गया था. वित्त विभाग के कर्मचारी त्रिभुवन चक्रवर्ती ने अपने वेतन मद से आठ लाख रुपये अधिक की निकासी कर ली थी. मामले के पकड़ में आने के बाद सरकार ने उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया था. फिलहाल वह अभियोजन निदेशालय में पदस्थापित है.
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Ranchi: राज्य में वेतन मद से फर्जी निकासी का सबसे पहला मामला वित्त विभाग में ही पकड़ा गया था. वित्त विभाग के कर्मचारी त्रिभुवन चक्रवर्ती ने अपने वेतन मद से आठ लाख रुपये अधिक की निकासी कर ली थी. मामले के पकड़ में आने के बाद सरकार ने उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया था. फिलहाल वह अभियोजन निदेशालय में पदस्थापित है.

 

राज्य में वेतन मद से फर्जी निकासी का यह मामला सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा लागू करने के दौरान हुई था. राज्य में सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा 1-1-2016 से प्रभावी है. हालांकि आयोग की अनुशंसा को कैबिनेट से जनवरी 2017 में मंजूरी मिली थी. सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा के आलोक में राज्य सरकार के कर्मचारियों के मूल वेतन, आवास भत्ता सहित अन्य मदों में वृद्धि हुई थी.


इसी दौरान वित्त विभाग के क्लर्क त्रिभुवन चक्रवर्ती ने अपना वेतन बढ़ा लिया था. उसने बढ़े हुए वेतनमान से अपने वेतन की निकासी की. उसने अपने मूल वेतन में हेराफेरी कर आठ लाख रुपये अधिक की निकासी की थी. तत्कालीन वित्त सचिव सुखदेव सिंह के कार्यकाल में यह मामला पकड़ में आया. इसके बाद उसने सरकार को आठ लाख रुपये वापस कर दिया था.


वेतन मद से फर्जी निकासी के इस मामले में उसे निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही चलाने का आदेश दिया गया. विभागीय कार्यवाही में वेतन मद से फर्जी निकासी का आरोप प्रमाणित होने पर उसे बर्खास्त करने की सजा दी गयी. बर्खास्तगी के खिलाफ अपील की. इसे स्वीकार कर लिया गया. इसके बाद वह नौकरी में आया. फिलहाल वह अभियोजन निदेशालय में पदस्थापित है.

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