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देश के जाने माने वकीलों में शुमार फली एस नरीमन का निधन, पीएम मोदी ने शोक जताया

 New Delhi : भारत के दिग्गज वकील माने जाने वाले फली एस नरीमन का बुधवार को निधन हो गया. वे 95 वर्ष के थे. फली एस नरीमन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शोक जताया है. मोदी ने `एक्स` पर लिखा कि फली नरीमन उत्कृष्ट विधि विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों में से थे. उन्होंने अपना जीवन आम नागरिकों तक न्याय सुनिश्चित करने के लिए समर्पित कर दिया. मैं उनके निधन से दुखी हूं. मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं. उनकी आत्मा को शांति मिले.">https://lagatar.in/category/desh-videsh/">

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झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने संवेदना प्रकट की

जाने माने प्रख्यात विधि विशेषज्ञ एवं पूर्व राज्यसभा सांसद फली एस नरीमन के निधन पर झारखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता धीरज कुमार ने संवेदना प्रकट की है. धीरज कुमार ने कहा कि नरीमन को विधि के क्षेत्र के साथ-साथ समाज में उनके द्वारा किये गये उत्कृष्ट कार्यों के लिए सदैव याद किया जाता रहेगा. कहा कि उनके निधन से समाज में खासकर कानून जगत में अपूरणीय क्षति हुई है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है. ईश्वर उनके आत्मा को शांति प्रदान करें.

इंदिरा गांधी सरकार द्वारा घोषित आपातकाल के फैसले से  नाराज हो गये थे

उनके पुत्र रोहिंटन नरीमन भी सीनियर एडवोकेट रह चुके हैं. वर्तमान में वे सुप्रीम कोर्ट में जज हैं. जानकारी के अनुसार फली एस नरीमन ने वकील के रूप में अपना करियर नवंबर 1950 में शुरू किया था. बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सरकार के फैसले के खिलाफ ASG पद से इस्तीफा दे दिया था. खबरों के अनुसार नरीमन 1975 में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा घोषित आपातकाल के फैसले से  नाराज हो गये थे.  लाइव लॉ की एक रिपोर्ट की मानें तो  उन्होंने इमरजेंसी के फैसले के विरोध में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया के पद से इस्तीफा दे दिया था. 1950 में बॉम्बे हाईकोर्ट से वकालत की शुरुआत करने वाले नरीमन 1961 में सीनियर एडवोकेट नामित हुए. दो दशकों के बाद उन्होंने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट में दस्तक दी.  मई 1972 में वे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल बने थे.

उन्होंने कई किताबें भी लिखीं, जो चर्चित रही हैं

पद्म विभूषण पुरस्कार विजेता नरीमन भारतीय न्यायपालिका के भीष्म पितामह माने जाते हैं.नरीमन राज्यसभा सदस्य भी रहे हैं. उन्होंने कई किताबें भी लिखीं, जो चर्चित रही हैं. उन्होंवे India’s Legal System: Can it be Saved?,  Before the Memory Fades, The State of the Nation, God Save the Hon’ble Supreme Court आदि किताबें लिखीं. [wpse_comments_template]      

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