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परिवार नियोजन वार्षिक समीक्षाः बंध्याकरण का लक्ष्य पूरा नहीं करने वाले अधिकारी व कर्मचारी होंगे दंडित

Ranchi : राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अन्तर्गत परिवार नियोजन की समीक्षात्मक बैठक हुई. इसकी अध्यक्षता अपर अभियान निदेशक विद्या नन्द शर्मा पंकज ने किया. बैठक में प्रतिभागी के रूप में रांची प्रमंडल के रांची, खूंटी, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा और रामगढ़ जिले के एसीएमओ, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, जिला कार्यक्रम समन्वयक, जिला लेखा प्रबंधक ने भाग लिया. निदेशक पंकज ने कहा कि परिवार नियोजन के कार्य की योजना बनाकर उसे समय पर पूरा करें. नहीं तो कार्रवाई के लिए तैयार रहें. उन्होंने परिवार नियोजन के वार्षिक उपलब्धि की विस्तृत समीक्षा की. उन्होंने महिला बंध्याकरण और पुरूष नसबंदी की संख्या में आयी गिरावट पर तत्काल अपेक्षित उपलब्धि हासिल नहीं करने वाले अधिकारी व कर्मचारियों पर कार्रवाई का आदेश दिया है. इसे भी पढ़ें - देवघर">https://lagatar.in/deoghar-in-the-grip-of-cold-wave-people-are-forced-to-hide-in-the-house/">देवघर

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सहियाओं को दिया गया लक्ष्य

बैठक में प्रत्येक सहिया द्वारा पूरे वर्ष में कम से कम 02 पुरूष नसबंदी, 06 महिला बंध्याकरण, 15 पीपीआईयूसीडी, 08 इंटरभल आईयूसीडी, 12 इन्जेक्टेबल, 06 ओरलपिल्स, 06 कंडोम के उपयोगकर्ता तैयार किया जाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. स्वास्थ्य उपकेन्द्र स्तर तक कंडोम बॉक्स 10 दिनों के अंदर लगाकर कंडोम का वितरण करने का निर्देश दिया है. साह-बहू-पति सम्मेलन का आयोजन और नयी पहल किट के वितरण की उपलब्धि 100 प्रतिशत करने का निर्देश दिया है.

पुरूष नसबंदी में गति लाने का निर्देश

इसके अलावा में किसी भी स्थिति में लाभुक, उत्प्रेरक/सहिया को प्रोत्साहन राशि ससमय देने और परिवार नियोजन संबंधी वस्तुओं का समय पर क्रय करने का निर्देश दिया गया. उन्होंने हाइड्रोसिल व पुरूष नसबंदी कराने वाले व्यक्तियों को चिन्हित करने के अलावा योग्य दम्पति को चिन्हित कर पुरूष नसबंदी अभियान के कार्यों को गति लाने का निर्देश दिया.

परिवार में हो एक-दो बच्चे

परिवार नियोजन के नोडल पदाधिकारी डॉ अनिल कुमार ने कहा कि परिवार नियोजन से तात्पर्य एक ऐसी योजना से है. जिसमें परिवार की आय, माता के स्वास्थ, बच्चों के समुचित पालन पोषण और शिक्षा को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त समय पर आदर्श संख्या में बच्चों को जन्म दिया जाए. कहा कि परिवार नियोजन वह है, जिसमें एक परिवार में एक या दो बच्चे होने चाहिए. इन बच्चों के जन्म में तीन साल का अंतर होना चाहिए. इससे स्वास्थ अच्छा रहता है. माताओं और शिशुओं के स्वास्थ्य संबंधी खतरे बहुत कम हो जाते हैं.

ये रहे मौजूद

इस अवसर पर गुंजन खलखो, राज्य परिवार नियोजन समन्वयक, नवल किशोर यादव, अभिजीत मिश्रा तथा अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे. इसे भी पढ़ें - भारत">https://lagatar.in/working-president-jharkhand-congress-bandhu-tirkey-participated-in-bharat-jodo-yatra/">भारत

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