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मशहूर शायर डॉ बशीर बद्र नहीं रहे, भोपाल में अंतिम सांस ली, सीएम मोहन यादव, जावेद अख्तर ने शोक जताया

Bhopal :  मशहूर शायर बशीर बद्र का आज 91 बरस की उम्र में भोपाल में निधन हो गया. वे पिछले कुछ समय से डिमेंशिया से जूझ रहे थे. उनके निधन से साहित्य जगत शोक की लहर है. बशीर बद्र अपनी अलग तरह की शायरी और लफ्जों की वजह से लोकप्रिय रहे थे.  
 

 

 

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने डॉ बशीर बद्र के निधन पर शोक जताया है, उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, पद्म श्री से सम्मानित, प्रसिद्ध शायर डॉ बशीर बद्र जी के निधन पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि! मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं.

 

सीएम ने लिखा कि उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन को संवेदनशीलता,अपनत्व और मानवता के साथ जीने का संदेश दिया. ईश्वर दिवंगत को शांति और परिजनों व प्रशंसकों को यह दु:ख सहने की शक्ति दें.

 

बशीर बद्र के निधन पर जाने-माने गीतकार और शायर जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया पर लिखा, उर्दू आज और गरीब हो गयी. नायाब शायर बशीर बद्र ने हमेशा के लिए रुखसत ले ली. उनकी शायरी हमारी यादों में हमेशा ताजा रहेगी. 

 
 
बशीर बद्र (सैयद मोहम्मद बशीर) उर्दू साहित्य के बेहद लोकप्रिय शायर थे.उनका जन्म 15 फरवरी 1935 को यूपी के अयोध्या में हुआ था. उन्होंने् अलीगढ़  मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU)से उच्च शिक्षा प्राप्त की थी.

 

बाद में वे इसी विवि में उर्दू के प्रोफेसर रहे थे. उर्दू साहित्य और गजल लेखन में बेहतरीन योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1999 में पद्मश्री से सम्मानित किया था. 


  
बशीर बद्र की गजलों में मोहब्बत, तन्हाई और रोजमर्रा के एहसासों की गहरी छाप नजर आती है.  उनके द्वारा लिखे कई शेर आज भी लोगों की जुबान पर है.

 

उनका एक मशहूर शेर है, अगर तलाश करूं कोई मिल ही जायेगा, मगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा? एक अन्य लोकप्रिय शेर है, आदमी की उम्र गुजर जाती है एक मकान बनाने में, तुम देर नहीं करते बस्तियां जलाने में. 

 


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