Gumla News: जिले के घाघरा और बसिया प्रखंड के टमाटर किसानों को विल्ट रोग से राहत दिलाने के लिए जिला उद्यान विभाग, गुमला और प्रदान (PRADAN) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ है. जिला उद्यान विभाग की ओर से डॉ. तमन्ना प्रवीण और प्रदान, गुमला की ओर से मो. मेराज उद्दीन ने समझौते पर हस्ताक्षर किए. इसके तहत “GROW – ग्राफ्टेड, रेजिलिएंट एवं ऑप्टिमाइज़्ड वाटर-एफिशिएंट टमाटर खेती” परियोजना चलाई जाएगी.
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घाघरा और बसिया क्षेत्र पारंपरिक रूप से टमाटर उत्पादन का प्रमुख इलाका रहा है और छोटे-सीमांत किसानों की आय का बड़ा जरिया है. लेकिन बार-बार लगने वाले विल्ट रोग और मिट्टी की बदलती स्थिति से फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे किसानों का टमाटर की खेती पर भरोसा भी कमजोर पड़ा है.
इस समस्या के समाधान के लिए परियोजना में ग्राफ्टेड टमाटर की खेती कराई जाएगी. इसमें रोग-सहनशील बैंगन के मूलवृंत (रूटस्टॉक) पर अच्छी उपज देने वाले टमाटर की कलम लगाई जाती है. परियोजना घाघरा और बसिया प्रखंड के दो गांवों में चलेगी, जिनसे कुल 100 किसान परिवार जुड़ेंगे. प्रत्येक परिवार को 30 डिसमिल के मॉडल के लिए लगभग 550 ग्राफ्टेड पौधे दिए जाने का प्रस्ताव है.
समझौते के तहत उद्यान विभाग क्रियान्वयन साझेदार के रूप में प्रशासनिक सहयोग देगा. वह एमआईडीएच (MIDH), आरकेवीवाई और एनएचएम की चालू योजनाओं से तालमेल कराएगा और पात्र किसानों को ग्राफ्टेड पौधे, जैविक खाद, मल्चिंग व अन्य सामग्री दिलाने में मदद करेगा. ड्रिप सिंचाई के लिए भी संबंधित विभाग से समन्वय की संभावना तलाशी जाएगी. विभाग के क्षेत्रीय कर्मी निगरानी भ्रमण, किसान दिवस और समीक्षा बैठकों में भाग लेंगे.
प्रदान तकनीकी एजेंसी के रूप में किसानों को प्रशिक्षण और खेत पर तकनीकी मार्गदर्शन देगा. यह सहयोग गैर-वित्तीय होगा. इसमें पौधों की देखभाल, रोपाई, पोषण, रोग-कीट प्रबंधन, सिंचाई, मल्चिंग, कटाई-छंटाई और कटाई के बाद का प्रबंधन शामिल है. संस्था बाजार से जुड़ाव और एफपीओ से तालमेल में भी मदद करेगी तथा परियोजना के अनुभवों का दस्तावेज तैयार करेगी.
यह एमओयू दो वर्ष के लिए मान्य होगा. इसमें टमाटर की पूरी फसल अवधि शामिल है और किसानों को दोबारा फसल लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा. उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में फसल के महत्वपूर्ण चरणों पर समीक्षा बैठक होगी. यह समझौता गैर-वित्तीय और सहयोगात्मक है, यानी किसी पक्ष पर आर्थिक दायित्व नहीं बनता.
परियोजना का उद्देश्य विल्ट रोग का समाधान दिखाना, उत्पादन जोखिम घटाना, किसानों की उपज और आय बढ़ाना और उनकी क्षमता बढ़ाना है. साथ ही जिले के अन्य टमाटर उत्पादक क्षेत्रों के लिए एक परखा हुआ क्लस्टर-आधारित मॉडल तैयार करना भी इसका लक्ष्य है.इस मौके पर उद्यान विभाग से तकनीकी विशेषज्ञ दीपक कुमार तथा प्रदान से जितेंद्र कुमार एवं रौशन उपस्थित थे.
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