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तुलसीदास के रामचरित मानस के ज्ञाता थे फादर बुल्के

  • फादर कामेल बुल्के पुस्तकालय में 14000 है किताबें
  • 1974 में राष्ट्रपति द्वारा पदम भूषण से सम्मानित हुए
  • रामायण की अनेक किताबों का संग्रह बनाया

Ranchi : हिंदी और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में योगदान देने वाले फादर कामिल बुल्के का जन्म 1 सितंबर 1909 को बेल्जियम के रम्सकपैले में हुआ. 1930 में लूबेन विश्वविद्यालय से बीएससी (इंजीनियरिंग) की पढ़ाई पूरी करने के बाद, उसी वर्ष 23 सितंबर को उन्होंने यीशु संघ में प्रवेश किया. अक्टूबर 1935 में वे भारत आए और 21 सितंबर 1941 को कर्सियांग में उनका पुरोहिताभिषेक हुआ. 

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय से उन्होंने 1947 में हिंदी में एमए और 1949 में डी. फिल की उपाधि प्राप्त की. 1950 से 1977 तक वे रांची के संत जेवियर कॉलेज में हिंदी-संस्कृत विभागाध्यक्ष रहे. उनकी सेवाओं के सम्मान में 1974 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया.17 अगस्त 1982 को नई दिल्ली में उनका निधन हो गया. लेकिन हिंदी साहित्य में उनका योगदान हमेशा के लिए अमर हो गया.

 

फादर बुल्के का रांची में दो पुस्तकालय

 

पुरूलिया रोड स्थित मनरेसा हाउस और संत जेवियर कॉलेज में पुस्तकालय बनाया गया है. कामेल बुल्के पुस्तकालय के इंचार्ज एमानुएल बाखला ने बताया कि फादर कामेल बुल्के भारत रत्न से सम्मानित है. रांची में कामेल बुल्के रिसर्च सेंटर, पुस्तकालय और वाचनायल बनाया गया है. इसमें विभिन्न प्रतियोगिता की परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थी पढते है. इसके लिए 60 सीट रखा गया है. 

 

रामकथा उत्पत्ति और विकास पर रिसर्च किया फादर कामेल बुल्के

 

डॉ कामेल बुल्के पुस्तकालय की स्थापना 1926 में मनरेसा में हुई थी. उन्होंने रामकथा उत्पत्ति और विकास पर रिसर्च किया. वे तुलसीदास के भक्त थे. तुलसी रचित रामचरिचमानस पर रिसर्च किया है. रामायण की अनेक किताबो का संग्रह भी बनाया है. जुलाई 2017 में संत जेवियर कॉलेज में कॉलेज प्रशासन ने भव्य पुस्तकालय का निर्माण कराया है. आज इस पुस्तकालय में 45 विद्यार्थी पढ़ते है. 2018 में रामकथा का अंग्रेजी भाषा में विमोचन किया गया. 

 

फिलिस्तीन जीजस क्राईस्ट की भाषा को हिंदी बाईबल में किया ट्रांसलेशन 

 

डॉ फादर कामेल ने बुल्के अंग्रेजी और हिंदी में डिक्सनरी भी तैयार किया है. फिलिस्तीन जीजस क्राईस्ट की भाषा को हिंदी बाईबल का हिंदी में ट्रासलेशन भी किया. आज देश भर में हिदी भाषा में बाईबल पढ़ रहे है. फादर बुल्के विभिन्न भाषाओं के ज्ञाता थे. वे अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, संस्कृत और हिदी भाषा बोलते थे.

 

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