Search

Advertisement
Advertisement
Advertisement

फैटी लीवरः डरें नहीं परहेज करें, ठीक हो जायेगा

Ranchi : हम जिनसे भी बात करें, एक-दो परिचित ऐसे जरुर मिल जाएंगे, जिन्हें फैटी लीवर की शिकायत है. यू कहें आज के दौर में इस बीमारी के नाम से लोगों को सबसे अधिक डराया जा रहा है. क्या लीवर का फैटी होना सच में बड़ी बीमारी है. क्या एक बार लीवर फैटी हो गया तो वह ठीक नहीं होगा. इस तरह के कई सवाल हैं, जिनके जवाब लोग जानना चाहते हैं. लेकिन आसान भाषा में कोई बताने को तैयार नहीं. इस बीमारी के बारे में जानने के लिए हमने डॉ अनुज कुमार से बात की. उन्होंने विस्तार से इस बीमारी के बारे में जानकारी दी. डॉ अनुज बताते हैं, बाजार में आप जितने भी प्रोडक्ट देखते हैं, जो लीवर को डीटॉक्स करने का दावा करती है वो सारी फर्जी है. क्योंकि लीवर को डीटॉक्स सिर्फ़ लीवर ही कर सकता है और वो भी आपके स्वस्थ खानपान और शारीरिक व्यायाम की मदद से. इसलिए बाजार में बिक रहे ऐसे फर्जी प्रोडक्ट से कोई फायदा नहीं होने वाला. इसे भी पढ़ें -LAGATAR">https://lagatar.in/lagatar-breaking-hemant-soren-will-remain-in-jail-ed-court-did-not-grant-interim-bail/">LAGATAR

BREAKING: जेल में ही रहेंगे हेमंत सोरेन, ED कोर्ट ने नहीं दी अंतरिम बेल

लीवर क्या है

लीवर आपके शरीर के दायें भाग में रहता है और इसका मुख्य काम पाचन कार्य में मदद करना और शरीर से टॉक्सिन्स को हटाना है. लीवर ही आपके शरीर को डीटॉक्स करता है. जब किसी व्यक्ति के शरीर में फैट की मात्रा बढ़ जाता है तो वो उस व्यक्ति के लीवर में जमा होने लगता है. एक सीमा से अधिक जमा होने पर लीवर फैटी हो जाता है. तब पाचन क्रिया ठीक से काम नहीं करता. अगर समय पर इसका इलाज व परहेज नहीं किया जाता है, तो फैट की वजह से लीवर के सेल्स खराब होने लगते हैं. इस स्थिति में उस व्यक्ति को एक बड़ी बीमारी हो जाती है. जिसे लीवर सिरोसिस कहा जाता है.

लीवर फैटी होने के दो कारण

फैटी लीवर दो तरह के होते हैं. पहली, अल्कोहलिक. यह ज्यादा शराब पीने की वजह से होता है. दूसरी, नन अल्कोहलिक. यह मोटापा, शुगर या बीपी की बीमारी, तेलीय चीजों का सेवन, अनिंद्रा, शरीर में अत्यधिक कोलेस्ट्रॉल की मात्रा और कुछ दवाइयों की वजह से होता है. दवाइयों में एलोपैथी की स्ट्रॉयज, एस्प्रिन और कुछ पेन कीलर शामिल है. कुछ आयुर्वेदिक व होमियोपैथी की दवाईयों की वजह से भी फैटी लीवर की बीमारी होती है.

तीन शुरुआती लक्षण

- ग्रेड-एक, में सामान्यतः कोई लक्षण नहीं होते, रुटीन चेकअप में यह पकड़ में आ जाता है. - ग्रेड-दो, अपच, गैस की समस्या, भूख कम लगना, कमज़ोरी इत्यादि होती है. - ग्रेड-तीन, पेट दर्द, वजन का कम हो जाना, जॉन्डिस जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं.

क्या है इलाज

https://lagatar.in/wp-content/uploads/2024/04/dr-anuj.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> डॉ अनुज कुमार बताते हैंः इलाज से पहले लीवर के बारे में यह जान लें कि यह शरीर का ऐसा अंग है जो खुद को 90 फीसदी तक ख़ुद से ठीक कर लेता. और अभी तक ऐसी कोई दवाई उपलब्ध नहीं है, जो फैटी लीवर को ठीक कर सके. कुछ दवाइयां हैं जो अभी परीक्षण के दौर में हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि फिर यह ठीक कैसे होता है. इसका जवाब यह है कि यह खुद से ठीक होता है. बीमार व्यक्ति को बस यह करना होता है कि वह लीवर को ऐसा माहौल दे कि वो खुद को ठीक कर सके. और अगर बीमार व्यक्ति एक ईमानदार कोशिश करें, तो ग्रेड-तीन तक के फैटी लीवर पूरी तरह ठीक हो सकता है.

फैटी लीवर हो, तो क्या करें

- शराब या नशे का सेवन ना करें. - स्वस्थ्य आहार लें. - नियमित शारीरिक व्यायाम करें. - अपने वजन को नियंत्रण में रखें. - अगर डायबिटिज या बीपी है, तो उसे नियंत्रण में रखें. - बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी दवाई (एलोपैथिक/ आयुर्वेदिक/ होमियोपैथिक) का सेवन ना करें. इसे भी पढ़ें -Weather">https://lagatar.in/weather-update-yellow-alert-in-21-districts-of-bihar-temperature-crosses-44/">Weather

Update: बिहार के 21 जिलों में येलो अलर्ट, पारा 44 के पार 
[wpse_comments_template]

Comments

Leave a Comment

Follow us on WhatsApp

Lagatar Media

Lagatar Media App
बेहतर न्यूज़ अनुभव
Lagatar Media App
ब्राउज़र में ही