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रांची में आतिशबाजी के बीच धू-धू कर जले रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद, सीएम बोले- यह अधर्म पर जीत का प्रतीक

Ranchi : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विजयदशमी के अवसर पर पंजाबी- हिंदू बिरादरी दशहरा कमेटी की ओर से रांची के मोरहाबादी मैदान और श्री दुर्गापूजा एवं रावण दहन समिति, अरगोड़ा द्वारा अरगोड़ा मंडा मैदान में आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में शामिल हुए. इस मौके पर उन्होंने रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले को जलाकर असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय के विजय का संदेश दिया.  कहा कि यह अधर्म पर जीत का प्रतीक है. रांची में इस बार पांच जगह मोरहाबादी, अरगोड़ा, एचईसी शालीमार बाजार, हुंडरू और तुपुदाना में रावण दहन हुआ.

दो साल के बाद सार्वजनिक रूप से भव्य आयोजन

मुख्यमंत्री ने लोगों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दो वर्षों के बाद इस बार सार्वजनिक रूप से दशहरा का भव्य आयोजन हुआ है. पिछले दो साल कोविड-19 महामारी की वजह से दशहरा समेत तमाम पर्व त्योहार का आयोजन प्रभावित हुआ था. लेकिन, जिस तरह सभी के सहयोग से कोरोना पर विजय प्राप्त किए, उसी के फलस्वरूप आज हम सभी बुराई पर अच्छाई के विजय का पर्व पूरे उमंग और उल्लास के साथ दशहरा मना रहे हैं और मिल-जुलकर इस त्योहार की खुशियां बांट रहे हैं.

कबूतर उड़ाकर शांति का दिया संदेश

अरगोड़ा मंडा मैदान में आयोजित रावण और लंका दहन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कबूतर उड़ाकर शांति का संदेश दिया. वहीं, रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में कलाकारों द्वारा जहां सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई है, वहीं शानदार आतिशबाजी का नजारा सभी ने देखा. इस अवसर पर सांसद संजय सेठ, राज्यसभा सांसद महुआ माजी, विधायक सीपी सिंह, महापौर आशा लाकड़ा, उप महापौर संजीव विजयवर्गीय और पंजाबी- हिंदू बिरादरी दशहरा कमेटी के अध्यक्ष राजेश खन्ना, उपाध्यक्ष कुणाल अजमानी, सचिव सुधीर उग्गल, आयोजन समिति के सदस्य आर आनंद, राजेश मेहरा और मुकुल तनेजा समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद थे.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उतारी श्री राम की आरती

कार्यक्रम में हजारों लोग शामिल हुए. राजधानी रांची के विभिन्न इलाकों से भ्रमण करने के बाद श्रीराम एवं लक्ष्मण की झांकी मोरहाबादी मैदान में प्रवेश कर गया. झांकी के आगमन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भगवान श्रीराम एवं भ्राता लक्ष्मण की आरती उतारी. इसके बाद रावण वध किया गया. रावण वध से पहले कई तरह के सांस्कृति कार्यक्रम आयोजित किये गये. सिल्ली का पाइका, जमशेदपुर का छऊ नृत्य और कोलकाता की आतिशबाजी मुख्य आकर्षण का केंद्र रही. कार्यक्रम में कलाकारों ने छऊ नृत्य की भी शानदार प्रस्तुति दी साथ ही भांगड़ा सहित कई आयोजन हुए. बारिश के मौसम में रावण को वाटर प्रूफ बनाया गया था. रावण दहन से पहले शानदार आतिशबाजी की गयी. आतिशबाजी के बाद लंका दहन किया गया.

वाटरप्रूफ बने थे तीनों पुतले

पंजाबी हिंदू बिरादरी के मुताबिक, बारिश को देखते हुए रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले को वाटरप्रूफ बनाया गया था. रावण के पुतले की ऊंचाई 70 फीट थी, जबकि कुंभकर्ण के पुतले की ऊंचाई 65 फीट और मेघनाद के पुतले की ऊंचाई 60 फीट की थी. वहीं, मोरहाबादी मैदान में सोने के लंका का प्रारूप बनाया गया था.

शालीमार बाजार

विजयादशमी रावण दहन समारोह समिति द्वारा रांची के शालीमार बाजार सेक्टर-तीन में रावण दहन कार्यक्रम आयोजित हुआ. अध्यक्ष संजीत यादव ने बताया कि रावण के पुतले की ऊंचाई 61 फीट और कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले की ऊंचाई 55-55 फीट थी..  

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