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हजारीबाग झील में मर रही मछलियां, कैंपस में दुर्गंध से लोगों के ठिठके कदम

Gaurav Prakash Hazaribagh : हजारीबाग को प्रकृति ने अपने ढंग से सजाया है. यहां पांच झीलों की ऐतिहासिक शृंखला पूरे झारखंड वासियों के लिए आकर्षण का केंद्र है. लेकिन इन दिनों हजारीबाग झील का पानी सड़ गया है. पानी सड़ने के कारण वहां दुर्गंध फैलता जा रहा है. झील पर जहां हर दिन सैकड़ों लोग मॉर्निंग व इवनिंग वॉक के लिए पहुंचते थे, अचानक उनका ग्राफ गिर गया है. झील कैंपस स्थित कैफेटेरिया और पार्क में भी सैलानियों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है. पूरे झील परिसर में ही बदबू उठ रही है. लोगों का कहना कि यहां से गुजरना भी अब दूभर हो गया है. मछलियां मर जाने के कारण सड़ रही हैं.

मरी मछलियां निकाल रहे मत्स्यजीवी सहयोग समिति के लोग

[caption id="attachment_611002" align="alignnone" width="1074"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/04/jheel-17_142.jpg"

alt="मरी मछलियां निकाल रहे मत्स्यजीवी सहयोग समिति के लोग" width="1074" height="512" /> मरी मछलियां निकाल रहे मत्स्यजीवी सहयोग समिति के लोग[/caption] ऐसे में कई लोग आकर मछली अपने घर खाने के लिए ले जा रहे हैं. इससे उनकी तबीयत पर भी बुरा असर पड़ सकता है. झील में मछली पालन करने वाले मत्स्य जीवी सहयोग समिति के लोग मरी हुई मछलियां बाहर निकाल रहे थे. अफवाह फैलती जा रही है कि झील का पानी जहरीला हो चुका है. इस कारण जलीय जीव की मौत हो रही है. मछलियां मर कर पानी की ऊपरी सतह तक पहुंच रही है. वहीं झील जाने वाले रास्ते को प्रशासन की ओर से ब्लॉक भी कर दिया गया है.

झील पर जिला प्रशासन उदासीन : भैया अभिमन्यु

प्रत्येक दिन झील का सैर-सपाटा करने वाले भाजपा नेता भैया अभिमन्यु प्रसाद बताते हैं कि झील हजारीबाग की हृदय स्थली है. वे लोग इसे बचाने के लिए लगातार आवाज उठाते रहे हैं. जन सहयोग से भी झील की सफाई होती रही है. लेकिन यह दुर्भाग्य है कि जिला प्रशासन झील पर उदासीन है. कई घरों का गंदा पानी झील में बहा दिया जा रहा है. नुरा की तरफ से, झील नगर के घरों के बाथरूम और नालियों का सारा पानी झील में आता है. इससे धीरे-धीरे पानी दूषित हो गया है और अब वह पानी जहरीला हो गया है. इसे लेकर उन लोगों ने कई बार शिकायत की, लेकिन किसी ने भी सुध नहीं ली.

व्यवसाय पर बुरा असर : राजीव

झील परिसर में ही अपनी दुकान लगाने वाले राजीव बताते हैं कि सुबह तो सैकड़ों लोग पहुंचते हैं. दिनभर झील परिसर में लोगों का आना-जाना लगा रहता है. कभी भी झील परिसर सुनसान नहीं रहा. पेड़ के नीचे बैठना और पानी की ओर देखना लोगों का शौक बन गया है. कोई व्यक्ति थका हुआ भी है, तो वह एक बार झील जरूर आता है. ऐसे में उन लोगों का व्यापार भी काफी अच्छा चलता है. लेकिन पिछले एक सप्ताह से झील के पानी से दुर्गंध आ रहा है. इस कारण कोई भी व्यक्ति झील की ओर नहीं पहुंच रहा है. इससे उन लोगों का कारोबार भी प्रभावित हो रहा है. इसे भी पढ़ें : सीएम">https://lagatar.in/lathicharge-on-students-going-to-lay-siege-to-cms-residence/">सीएम

आवास घेराव करने जा रहे छात्रों पर लाठीचार्ज

डायरिया और डिहाइड्रेशन के शिकार हो सकते हैं लोग

हजारीबाग के जाने-माने चिकित्सक डॉ. बीएन प्रसाद कहते हैं कि हजारीबाग के झील से जिस तरह से दुर्गंध आ रही है, इससे स्पष्ट हो रहा है कि पानी सड़ चुका है और यह कई बीमारियों का कारण बन सकता है. रोड किनारे स्ट्रीट फूड भी बिकते हैं. वह भी अब इनफेक्टेड हो रहे हैं. डायरिया और डिहाइड्रेशन की भी शिकायत इस एरिया में बढ़ सकती है. ऐसे में जल्द से जल्द झील के पानी को साफ करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है.

पानी में टॉक्सिन की मात्रा बढ़ने से मर जाते हैं जलीय जीव : डॉ वंदना

छोटानागपुर की नदियों में पायी जाने वाली मछलियों पर शोध करने वाली डॉक्टर वंदना श्रीवास्तव ने कहा कि पानी में टॉक्सिन की मात्रा बढ़ जाती है, तो जलीय जीव मरकर पानी के ऊपर आ जाते हैं. इससे मछलियां मरी दिखाई पड़ रही हैं. पानी की जांच स्टेट जियोलॉजिकल लेबोरेटरी में करायी जा सकती है, तभी यह स्पष्ट होगा कि पानी में टॉक्सिन की मात्रा बढ़ी है या कोई अन्य कारण से जलीय जीव की मौत हो रही है.

जिला जज से लेकर अधिकांश प्रशासनिक पदाधिकारियों के हैं आवास

महत्वपूर्ण बात यह है कि जिला प्रशासन के कई वरीय पदाधिकारी झील और उसके आसपास के क्षेत्र में रहते हैं. कमिश्नर, डीआईजी, उपायुक्त, एसडीओ, वन विभाग के पदाधिकारी सभी का सरकारी आवास इसी इलाके में है. प्रधान जिला जज भी इसी परिसर में रहते हैं. उसके बाद भी किसी तरह की पहल नहीं होने पर शहरवासी चर्चा कर रहे हैं. [wpse_comments_template]

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