Niraj Kumar Dhanbad : धनबाद (Dhanbad) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी अभियान फिट इंडिया मूवमेंट और खेलो इंडिया धनबाद में दम तोड़ रहा है. कारण शहर-गांव से खेल मैदान धीरे-धीरे गायब होते जा रहे हैं. इधर जिला प्रशासन की उदासीनता इन मैदानों की रक्षा में बाधक बनी हुई है. फलस्वरूप कोई अभियान धरातल पर पहुंच नहीं पा रहा है. विगत दो दशक में एक-एक कर धनबाद जिले के शहरी क्षेत्र से मैदानों का अस्तित्व समाप्त होता चला गया. हालत यह है कि शहर में कोई ऐसा मैदान नहीं बचा, जहां बड़े-छोटे खेल का आयोजन हो सके या बच्चे दौड़ भाग करते खेल सकें.
खत्म हो गया ऐतिहासिक कोहिनूर मैदान
कोर्ट परिसर से सटे ऐतिहासिक कोहिनूर मैदान में कभी क्रिकेट और फुटबॉल खिलाड़ियों का जमघट लगता था. जिला स्तरीय समारोह सहित खेल-कूद के आयोजन होते थे. परंतु अब उसका भी अस्तित्व समाप्त हो चुका है. यह मैदान अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, लालू प्रसाद यादव जैसे दिग्गजों के सभास्थल का गौरव हासिल कर चुका है. परंतु अब यह गौरव मिटने के कगार पर है. क्योंकि अब यहां खिलाड़ियों की दौड़-भाग या बच्चों की किलकारी नहीं गूंजती. इस मैदान में पार्किंग वेंडिंग जोन, मतदान पेटी रखने के लिए स्ट्रांग रूम, पार्किंग आदि का निर्माण हो चुका है. शहर का कोहिनूर मैदान अब इतिहास के पन्नों में समाता जा रहा है. मेला स्थल बन कर रह गया जिला परिषद मैदान
हीरापुर क्षेत्र का जिला परिषद मैदान भी पहले क्रिकेट व फुटबॉल के खेल के लिए मशहूर था. खिलाड़ियों की चहलकदमी और बच्चों की किलकारी यहां सालों भर गूंजती रहती थी. बच्चों को खेलते हुए देख अभिभावक रोमांचित होते रहते. लेकिन अब यह मैदान स्वदेशी मेला, पुस्तक मेला, हस्तशिल्प मेला आदि के लिए ख्याति अर्जित कर चुका है. मैदान में कांटी व बांस के टुकड़े बिखरे पड़े हैं. मैदान खाली भी हो तो बच्चे खेल नहीं सकते. हर समय उनके सामने खतरा मंडराता रहता है. गोल्फ ग्राउंड में 30 प्रतिशत निर्माण, बाकी पर भी कब्जा
शहर के बीचो-बीच एकमात्र खेल मैदान गोल्फ ग्राउंड है. परंतु अब इस मैदान के लगभग 30 प्रतिशत हिस्से पर नगर निगम ने सौंदर्यीकरण के नाम पर पार्क विकसित कर दिया है. लगभग 10 प्रतिशत हिस्से पर पहले ही होमगार्ड ऑफिस बना दिया गया था. इस वजह से आज आधा से अधिक गोल्फ मैदान समाप्त हो चुका है. यहां मेला का भी आयोजन होता रहता है. मैदान के अधिकतर हिस्सों पर निजी क्रिकेट कोचिंग संचालकों ने भी कब्जा जमा रखा है. निगम ने पार्किंग के लिए दे दिया मैदान
हीरापुर पार्क मार्केट के बीचो-बीच स्थित पार्क का अस्तित्व दो दशक पहले ही समाप्त हो चुका था. बाद में स्थानीय बच्चे इसका उपयोग मैदान की तरह कर रहे थे. निगम ने इसे भी पार्किंग स्टैंड बना कर नीलाम कर दिया. इस मैदान के लगभग 40 प्रतिशत हिस्से पर निगम के कॉम्पेक्टर स्टेशन और निजी वॉलीबॉल क्लब का कब्जा है. साउथ साइड स्टेशन की भेंट चढ़ गया डीएवी ग्राउंड
पुराना बाज़ार डीएवी स्कूल के पास के ग्राउंड में बैंक मोड़, पुराना बाजार, गांधीनगर, हावड़ा मोटर के बच्चे खेलते कूदते नजर आते थे. दुर्गा पूजा के अवसर पर यहां भव्य मेला लगता था. लेकिन यह मैदान रेलवे के दक्षिण साइड के स्टेशन को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए बनी सड़क की भेंट चढ़ गया. अब बैंक मोड़ क्षेत्र में एक भी मैदान नहीं बचा है. रेलवे मैदान में बाहरी बच्चे नहीं जा सकते
रेलवे स्टेडियम में बाहरी बच्चों का प्रवेश वर्जित है. वहीं नावाडीह में बना मेगा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स शहर से दूर है, जिससे यह शहरी बच्चों के लिए अनुपयोगी है. यदि यही हालत रही तो अगली पीढ़ी के बच्चे आउटडोर खेल से दूर होते चले जाएंगे. [wpse_comments_template]
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