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रूस से तेल आयात बढ़ने पर ट्रंप ने भारत को फिर दी टैरिफ बढ़ाने की धमकी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर टैरिफ को लेकर सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने रूसी तेल खरीदने की वजह से भारत को टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी है. ट्रंप ने कहा है कि यदि व्यापार संतुलन उनकी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा, तो भारत पर टैरिफ बढ़ाने में अमेरिका देर नहीं लगाएगा.
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Lagatar Desk :    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर टैरिफ को लेकर सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने रूसी तेल खरीदने की वजह से भारत को टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी है. ट्रंप ने कहा है कि यदि व्यापार संतुलन उनकी उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा, तो भारत पर टैरिफ बढ़ाने में अमेरिका देर नहीं लगाएगा. 

 

ट्रंप ने एक पब्लिक संबोधन के दौरान कहा कि असल में वे मुझे खुश करना चाहते थे. पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वे अच्छे आदमी होने के साथ-साथ एक अच्छे इंसान भी हैं. उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था. मुझे खुश करना जरूरी था. कहा कि वे ट्रेड करते हैं और हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं.

#WATCH | On India’s Russian oil imports, US President Donald J Trump says, "... They wanted to make me happy, basically... PM Modi's a very good man. He's a good guy. He knew I was not happy. It was important to make me happy. They do trade, and we can raise tariffs on them very… pic.twitter.com/OxOoj69sx3

— ANI (@ANI) January 5, 2026

 

नवंबर 2025 में रूसी तेल की हिस्सेदारी बढ़कर 35% हुई

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2025 में भारत ने रूस से करीब 7.7 मिलियन टन कच्चा तेल आयात किया. यह देश के कुल तेल आयात का 35.1 प्रतिशत था. यह मात्रा नवंबर 2024 की तुलना में लगभग 7 प्रतिशत अधिक रही और मई 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था.

 

मूल्य के लिहाज से भारत ने रूस से करीब 3.7 बिलियन डॉलर का तेल खरीदा, जो उस महीने के कुल तेल आयात बिल का लगभग 34 प्रतिशत था.  इस तरह मात्रा और मूल्य दोनों ही मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 

 

अमेरिका की भी हिस्सेदारी बढ़कर 12.6% हुई

गौरतलब है कि भारत ने सालाना आधार पर रूस से तेल आयात में कटौती की थी. इसके बावजूद अगस्त 2025 में अमेरिका ने रूसी तेल आयात को लेकर भारत पर टैरिफ को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया था. 

 

अमेरिका के इस फैसले से भारत में इस बात को लेकर असंतोष बढ़ा कि रूस से तेल आयात घटाने के प्रयासों के बावजूद टैरिफ विवाद नहीं सुलझ रहा है. अमेरिका से मिली निराशा के बावजूद भारत ने संतुलित रणनीति अपनाई.

 

नवंबर 2025 में भारत का अमेरिकी तेल आयात करीब 2.8 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो सात महीने का उच्चतम स्तर था.  इसकी कुल कीमत लगभग 1.4 बिलियन डॉलर रही.

 

नतीजतन, भारतीय तेल आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई, जो एक महीने पहले 4.2 प्रतिशत और एक साल पहले 5.1 प्रतिशत थी. 

 

 

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