अब तो चेते राज्य सरकार और कानून को निरस्त करे : मनोज नरेडी
झारखंड राज्य कृषि उपज और पशुधन विपणन (संवर्धन और सुविधा) विधेयक, 2022 के विरोध में राजधानी रांची के चैंबर भवन में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया. इसमें बताया गया कि 15 फरवरी बुधवार से सूबे में खाद्य वस्तुओं की आवक-जावक व कृषि संबंधी थोक व्यवसाय अनिश्चितकालीन के लिए बंद रहेगा. झारखंड चैंबर ऑफ काॅमर्स के आह्वान पर राइस मिल्स, फ्लाॅवर मिल्स सहित अन्य खाद्य संबंधी उत्पादन भी अपने प्लांट से सेल बंद रखेंगे. जनविरोधी कानून के विरोध में जारी इस आंदोलन में फल व सब्जी के थोक विक्रेता भी शामिल हैं. मौके पर पूर्व अध्यक्ष मनोज नरेडी ने कहा कि झारखंड कृषि प्रधान राज्य नहीं है. यह शुल्क झारखंड के उपभोक्ताओं को महंगाई से जूझने के लिए विवश करेगा. अभी भी समय है, सरकार चेते और इस कानून को निरस्त करने की घोषणा करे.विधेयक को वापस लेने के लिए हर रास्ते को अपनाया-चैंबर महासचिव
चैंबर महासचिव डाॅ अभिषेक रामाधीन ने कहा कि विधेयक को वापस लेने के लिए हमने शांति तरीके से हर रास्ते को अपनाया किंतु हमें सफलता नहीं मिली. इस शुल्क के प्रभावी होने से खाने-पीने की चीजें तुरंत महंगी हो जायेंगी और इससे किसी को भी फायदा नहीं होनेवाला है. कृषि प्रधान राज्य होते हुए भी इस शुल्क को बिहार और उत्तर प्रदेश में हटा दिया गया है.सह सचिव रोहित पोद्दार ने कहा कि यह सुविधा शुल्क है, जिसपर बाजार समिति द्वारा कोई सुविधा दी ही नहीं जाती है. इससे सिर्फ उपभोक्ता प्रभावित होंगे क्योंकि व्यापारी इस टैक्स का भुगतान उपभोक्ता से वसूलकर ही करेंगे. सह सचिव शैलेश अग्रवाल ने कहा कि हम व्यापारी हैं, हमें व्यापार करने दिया जाय. रांची चैंबर पंडरा के अध्यक्ष संजय माहुरी ने कहा कि पंडरा बाजार और अपर बाजार में बुधवार से सभी खाद्यान्न दुकानें, वन उपज, आलू प्याज मंडी बंद रहेंगी. मंडी में गाडियों की अनलोडिंग भी बंद रहेगी. बंद के कारण निकट भविष्य में उपभोक्ताओं को होनेवाली परेशानी के लिए पूरी जिम्मेवारी सरकार की होगी. डेली मार्केट दुकानदार संघ के पदाधिकारी हाजी जावेद ने कहा कि एक अनावश्यक कानून थोपकर व्यापारी और किसानों को परेशान किया जा रहा है जिसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा और इसका भार आम जनता पर पड़ेगा.व्यापारियों के बेमियादी होलसेल मंडी बंद को भाजपा ने दिया समर्थन
झारखंड के व्यापारियों ने कृषि उत्पादन और पशुधन विपणन विधेयक 2022 के खिलाफ बुधवार से अनिश्चिकालीन होलसेल मंडी बंद करने की घोषणा की है. भाजपा ने व्यापारियों के बंद का समर्थन किया है. सांसद संजय सेठ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सरकार व्यापारियों के हित में इस काले कानून को वापस ले. कहा कि पूर्व की भाजपा सरकार ने व्यापारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कृषि शुल्क हटा दिया था. इससे व्यापार में बढ़ोतरी हुई और कारोबार भी बढ़ा. लेकिन हेमंत सरकार ने फिर से 2% बाजार शुल्क लगाने का फैसला लिया है. इससे किसानों और खाद्यान्न कारोबारियों के साथ-साथ ट्रेडर्स और आम जनों को महंगाई की मार झेलनी होगी.सरकार जल्द से जल्द विधेयक वापस ले : संजय सेठ
alt="" width="1200" height="1600" /> सांसद ने कहा कि झारखंड में अधिकांश खाद्यान्न वस्तुएं बाहर से आती हैं. पहले ही उस पर टैक्स लगा होता है, फिर यहां आने पर 2% बाजार शुल्क देना होगा. आसपास के राज्यों में बाजार शुल्क नहीं लगता है. झारखंड में टैक्स लगने से खाद्यान महंगी होगी और हर वर्ग के लोग प्रभावित होंगे, साथ ही व्यापार पर बुरा प्रभाव पड़ेगा. सांसद ने कहा, वह व्यापारियों की लड़ाई में उनके साथ खड़े हैं. सरकार जल्द से जल्द कृषि उत्पादन और पशुधन विपणन विधेयक वापस ले.
अव्यावहारिक है बाजार शुल्क, वापस ले राज्य सरकार : योगेंद्र पोद्दार
झारखंड राज्य खुदरा व्यवसायी संघ के महामंत्री योगेंद्र प्रसाद पोद्दार ने कृषि उत्पादन और पशुधन विपणन विधेयक 2022 के तहत राज्य सरकार द्वारा दो फीसदी शुल्क लगाने के निर्णय का विरोध करते हुए व्यापारियों के हित में इस काले कानून को वापस लेने की मांग की है. संघ के प्रवक्ता संजय पोद्दार ने कहा कि पूर्व की सरकार ने व्यापारियों के सुविधा को ध्यान में रखते हुए कृषि शुल्क हटा दिया था. इससे व्यापार में बढ़ोतरी हुई और कारोबार भी बढ़ा, परंतु वर्तमान सरकार फिर से 2% बाजार शुल्क लगाने का निर्णय किया है. इससे खाद्यान्न कारोबारी के साथ साथ छोटे दुकानदार और आम जनों को महंगाई की मार झेलनी होगी. झारखंड में अधिकांश खाद्यान्न वस्तुएं बाहर से आती हैं. पहले ही उस पर टैक्स लगा होता है, फिर यहां आने पर 2% बाजार शुल्क देना होगा. इससे खाद्यान्न महंगी होगी और हर वर्ग के लोग प्रभावित होंगे. साथ ही व्यापार पर बुरा प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि आसपास के राज्यों में बाजार शुल्क नहीं लगता है. साथ ही अफसरशाही हावी होंगे. झारखंड राज्य खुदरा व्यवसायी संघ कल चैंबर द्वारा आयोजित बंद के समर्थन में सभी खुदरा व्यापारियों से अपनी-अपनी दुकानें बंद रखने की अपील की है.सरकार इस बिल के माध्यम से व्यापारियों का शोषण कर रही है : प्रीतम गडरिया
प्रीतम गडरिया ने कहा कि झारखंड सरकार व्यापारियों के साथ अन्याय कर रही है. सरकार को विधेयक लाने से पहले बातचीत करनी चाहिए थी. लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया. सरकार इस विधेयक के माध्यम से जितना टैक्स चाहती है, वह सरकार के खजाने में जाने वाला नहीं है. सारे बिचौलिए को फायदा होगा. सरकार इस बिल के माध्यम से व्यापारियों का शोषण कर रही है. इस विधेयक के कारण भ्रष्टाचार बढ़ेगा अफसरशाही बढ़ेगी. इसलिए हमारा झारखंड की हेमंत सरकार से विनम्र अनुरोध है कि परिस्थिति को गंभीरता से लें और इस विधेयक को वापस ले लें.झारखंड में पहले ही कृषि उत्पादों का इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है : विवेक अग्रवाल
विवेक अग्रवाल ने कहा कि यह कानून काला कानून है इससे व्यापारियों को बहुत नुकसान होने वाला है कृषि उत्पादों पर अगर किसी तरह का टैक्स लगाएगा तो उसे सारे जिलों के उत्पादन पर असर पडेगा. उत्पाद के दाम बढ़ने से जनता पर महंगाई की मार पड़ेगी. झारखंड में पहले ही कृषि उत्पादों से जुड़े इतना बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है, अब सरकार इस तरह के टैक्स लगाइए तो यहां पर जो बचा हुआ व्यापार बगल के राज्यों में चला जाएगा. सरकार को इस विधेयक से कोई फायदा नहीं होने वाला है,आज से पूरे झारखंड में पुरजोर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा : अमित साहू
उत्तरी छोटानागपुर डिवीजन के रीजनल वाइस प्रेसिडेंट अमित साहू ने कहा कि सरकार अगर सकारात्मक पहल नहीं लेती है तो हम आगामी 15 तारीख से पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे. इस विरोध की वजह से आम जनता को जो भी दिक्कतें होंगी, चीजों के दाम बढ़ेंगे. इसका सीधा-सीधा जिम्मेदार सरकार होगी. सरकार व्यापारियों से बात करने को तैयार नहीं है. कृषि विधेयक के कारण सूबे में भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा. सरकार अगर यह सोच रहे हैं कि टैक्स लेकर वह अपना खजाना भरेगी तो यह सरकार की सबसे बड़ी गलतफहमी. इसे सिर्फ बिचौलियों को फायदा होने वाला है.मंडी टैक्स से छोटे व्यापारी भी होंगे प्रभावित, ध्यान दे सरकार : नितेश धूत
जमशेदपुर के सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष नितेश धूत का कहना है कि विधेयक को लेकर खाद्यान्न व्यापारियों के बीच काफी रोष व्याप्त है. इस विधेयक के लागू होने के साथ ही छोटे व बड़े व्यापारी सभी इसकी जद में आएंगे. फुटपाथ पर सब्जी बेचने वाले छोटे व्यापारी से भी बाजार शुल्क के नाम पर टैक्स वसूला जाएगा. मंडी टैक्स से केवल थोक व्यापारी ही प्रभावित होंगे, यह अधूरा सच है. सच्चाई यह है कि फुटपाथ पर सब्जी बेचकर भरण पोषण करने वाले सीमांत व्यापारी भी इसकी जद में आएंगे.विधेयक को जितना जल्दी हो सके वापस ले राज्य सरकार : ज्योति कुमारी
ज्योति कुमारी ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से 2% टैक्स तो सरकार बढ़ा रही हैं उससे चीजों के दाम पर बहुत असर पड़ेगा. चीजों के दाम बढ़ जाएंगे. फल, सब्जी कृषि से जुड़े सारे उत्पादों के दाम बढ़ जाएंगे. 2% टैक्स किसी भी उत्पाद की मूल राशि में जोड़ दिया जाए तो उसकी लागत बढ़ जाएगी. सरकार सब जानबूझकर जनता को परेशान करना चाह रही है. इस विधेयक से मिडिल क्लास फैमिली को बहुत ज्यादा नुकसान होने वाला है. इसलिए अखबार के माध्यम से सरकार से अनुरोध है कि इस विधेयक को जितना जल्दी हो सके वापस ले और जा राज्य की जनता को महंगाई से बचाएं.इस विधेयक से राज्य के छोटे किसानों को होगा बहुत नुकसान : प्रदीप अग्रवाल
प्रदीप कुमार अग्रवाल ने कहा कि यह विधेयक व्यापारी विरोधी कृषि विरोधी और उपभोक्ता विरोधी है. सरकार कानून लेकर आए लेकिन सरकार ने व्यापारियों के साथ बात करने की जरूरत नहीं समझी. इस विधेयक से छोटे किसानों को बहुत नुकसान होने वाला है. पहले ही उनकी आमदनी इतनी कम है. सरकार उनकी आमदनी बढ़ाने की जगह आमदनी कम करने के सारे उपाय करने पर लगी हुई है. सरकार को भी इस विधेयक से कोई फायदा नहीं होने वाला उल्टा सरकार की छवि खराब हो रही है. इस कानून से सिर्फ भ्रष्टाचार बढ़ेगा, लालफीताशाही बढ़ेगी. अनुरोध है कि जल्द विधेयक को वापस लें. [caption id="attachment_555299" align="aligncenter" width="150"]alt="" width="150" height="150" /> दिलीप अग्रवाल[/caption]
आम आदमी से लेकर व्यापारी तक की बढ़ेगी परेशानी
जमशेदपुर के खाद्यान्न व्यापारी दिलीप अग्रवाल पप्पू का कहना है कि इस विधेयक से व्यापारी ही नहीं, आम जनता पर भी इसका सीधा असर होगा. मतलब आम आदमी से व्यापारी तक की परेशानी बढ़ेगी. मंडी टैक्स के लागू होने से जहां खाद्यान्न की कीमतों में बढ़ोतरी होगी. मंडी टैक्स के लागू होने पर सीमावर्ती राज्य के थोक विक्रेता झारखंड राज्य में प्रचुर मात्रा में माल बेचेंगे. इससे जहां झारखंड का खाद्यान्न व्यापार प्रभावित होगा, वहीं झारखंड सरकार को जीएसटी से प्राप्त हो रहे राजस्व की भारी क्षति होगी. [caption id="attachment_555292" align="aligncenter" width="150"]alt="" width="150" height="150" /> अनिल साव[/caption]
मंडी टैक्स से राज्य में बढ़ेगी अराजकता, लूट की छूट मिलेगी
जमशेदपुर के सब्जी के थोक व्यापारी अनिल साव का कहना है कि सरकार द्वारा मंडी टैक्स लगाए जाने से अराजकता बढ़ेगी. जिस प्रकार बाजार समिति का अध्यक्ष किसी अधिकारी के बदले राजनीतिक दल के कार्यकर्ता को बनाए जाने का प्रावधान विधेयक में है. ऐसे में कितने नियम संगत कार्य होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. मंडी टैक्स आने वाले समय में व्यापारियों के लिए एक बड़ी परेशानी का कारण बनेगा. इसे लागू करने के पीछे सरकार की मंशा अपने कार्यकर्ताओं को लूट की छूट देने की है.इस कानून से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा : सुशांत भारद्वाज
सुशांत भारद्वाज ने कहा कि सरकार को इस विधेयक के बारे में फिर से सोचना चाहिए. इस कानून से आम जनमानस को बहुत दिक्कत होगी. यह कानून गरीब जनता के विरोधी कानून है. इस कानून को सरकार को जितना जल्द हो सके, उतना जल्द वापस लेना चाहिए. इससे किसी का भला नहीं होने वाला है बल्कि इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा. इससे सरकार की भद्द ही पिटेगी. साथ ही व्यवसायी दूसरे राज्य में व्यवसाय करने का मन बनाने लगेंगे. इससे सरकार को और भी नुकसान होगा. इसलिए सरकार से मेरा अनुरोध है कि इस विधेयक को सरकार जल्द से जल्द वापस ले ले. [caption id="attachment_555314" align="aligncenter" width="150"]alt="" width="150" height="150" /> पप्पू शर्मा[/caption]
झारखंड कृषि उत्पादन वाला राज्य नहीं, यहां मंडी टैक्स बेमानी है
जमशेदपुर के व्यापारी पप्पू शर्मा का कहना है कि कृषि उत्पादन वाले राज्य पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार में मंडी टैक्स लागू नहीं है. झारखंड तो कृषि उत्पादन वाला राज्य भी नहीं है. ऐसे में सरकार द्वारा बाजार अथवा मंडी टैक्स लगाना बेमानी है. मंडी टैक्स लागू होने से सीधा असर खाद्यान्न व्यापार पर पड़ेगा. खाद्यान्न महंगा होगा. इससे इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलेगा. भ्रष्टाचार बढ़ेगा. मंडी टैक्स लागू करके सरकार ने यह बता दिया है कि उसे ना तो व्यापारियों की और ना ही आम जनता की चिंता है.किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा ही, महंगाई भी बढ़ जाएगी : खुशबू मोदी
खुशबू मोदी ने कहा कि किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा इस काम विधायक के माध्यम से पहले ही छोटे किसानों को बहुत कम मार्जिन पर काम कर रहे थे ऊपर से अब यह टेक्स इससे तो उनकी इनकम ना के बराबर आ जाएगी। दो परसेंट टैक्स लगने से व्यापारियों को कुछ नहीं बचने वाला है झारखंड हरियाणा या पंजाब नहीं है यहां पर कृषि से जुड़े हुए व्यवसाय इतनी समृद्धि नहीं है सरकार को इसे बढ़ाने के उपाय करने चाहिए तो सरकार किसी विधेयक बिल के माध्यम से राज्य की छोटी किसान और कृषि के व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है इससे किसी का भला नहीं होगा. [caption id="attachment_555312" align="aligncenter" width="150"]alt="" width="150" height="150" /> निर्मल जैन[/caption]
सरकार को कम फायदे होंगे और अफसरों की मनमानी चलेगी
पाकुड़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष निर्मल जैन ने कहा कि सरकार द्वारा रोजमर्रा की आम उपभोग की वस्तुओं पर 2 प्रतिशत कृषि टैक्स लगाए जाने से महंगाई बढ़ेगी. सरकार को कम फायदे होंगे और पदाधिकारियों की मनमानी चलेगी. इस बिल में यह भी प्रावधान होगा कि जिस पार्टी की सरकार रहेगी उसी पार्टी के चेयरमैन चुने जाएंगे और गांव हो या शहर उन्हीं के कार्यकर्ताओं को काम भी मिलेंगे. वहीं दूसरी ओर दूसरे राज्य से जीएसटी प्रदान कर सामानों को कच्चे व पक्के लाए जाने पर महंगाई बढ़ जाएगी. [caption id="attachment_555316" align="aligncenter" width="150"]alt="" width="150" height="150" /> पार्थ बनर्जी[/caption]
सामान के दामों में बढ़ोतरी का खामियाजा भुगतना पड़ेगा
पाकुड़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के कोषाध्यक्ष पार्थो बनर्जी ने कहा कि कृषि टैक्स लगाने पर राज्य में कृषि उत्पाद का उत्पादन, विपणन व संबंधित प्रसंस्करण उद्योग और व्यापार में भारी कमी आएगी. एक तरफ कानून बनने से जहां व्यवसायियों को दिक्कतें होगी, वहीं आम लोगों को भी सामान के दामों में बढ़ोतरी होने पर खामियाजा भुगतना पड़ेगा. कानून में ऐसा प्रावधान किया जा रहा है कि किसी भी पदाधिकारी के ऊपर किसी प्रकार के लोअर कोर्ट में केस भी नहीं होगा. [caption id="attachment_555295" align="aligncenter" width="150"]alt="" width="150" height="150" /> बृजमोहन साह[/caption]
कृषि कार्य काफी कम होंगे और सरकार को भी घाटा होगा
पाकुड़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के सह सचिव बृजमोहन साह ने कहा कि कृषि टैक्स में बढ़ोतरी करने से कृषकों को उनके उत्पाद का मूल्य कम मिलेगा. लिहाजा किसानों की आय घटेगी. उनके अंदर असंतोष पैदा होगा. कृषि कार्य कम होंगे और सरकार को भी घाटा होगा, क्योंकि दूसरे राज्यों से सामान लाने पर जीएसटी की वसूली दूसरे राज्य में हो जाएगी. झारखंड में लाने के बाद उस सामान की कीमतों में इजाफा हो जाएगा, जिससे आम लोग प्रभावित होंगे.बिल से सिर्फ बिचौलियों को फायदा, सरकार कानून को वापस ले : तुलसी पटेल
कृषि कानून पर तुलसी पटेल ने कहा कि यह काला कानून है और इसे जल्द से जल्द राज्य सरकार को वापस लेना चाहिए. इस कानून के आने से कृषि से जुड़े व्यापारी और किसान सबको परेशानी होगी. ग्रामीण क्षेत्र में गुंडागर्दी बढ़ेगी. जो व्यवस्थाएं इतने सालों से शांति से चली आ रही थी वह व्यवस्था में अशांति आ जाएगी. भ्रष्टाचार बढ़ेगा अफसरशाही बढ़ेगी. सरकार को इस बिल से कोई फायदा पहुंचने वाला नहीं है. इस बिल से सिर्फ बिचौलियों को फायदा होने वाला है. इसलिए हमारा विनम्र अनुरोध सरकार से है कि सरकार इस विधेयक को जल्द से जल्द वापस ले लें.कानून से सिर्फ भ्रष्टाचार को मिलेगा बढ़ावा, भला कुछ नहीं होगा : अंचल किंगर
अंचल किंगर ने कहा कि सरकार जो यह कृषि विधेयक लाई है, यह गलत है. इसके साथ यह बिल किसान और व्यापार विरोधी भी हैं. इस कानून से सिर्फ भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा. किसी भी टैक्स का मकसद होता है सरकार को फायदा पहुंचाना लेकिन सरकार जो यह टेक्स लेकर आई है इसे सिर्फ अफसरशाही को फायदा होगा. हम बिहार से अलग हुए थे इस सोच के साथ कि झारखंड अलग होकर तरक्की करेगा. लेकिन झारखंड को अलग हुए इतने साल हो गए झारखंड आज तक तरक्की नहीं कर पाया.सरकार को कोई भी बिल लाने से पहले उनसे जुड़े लोगों से बात करना चाहिए.वाजिब वजह से व्यापारी इस कानून का विरोध कर रहे हैं : अभिराज अग्रवाल
अभिराज अग्रवाल ने कहा कि यह काला कानून है. हम सब व्यापारी इस कानून का विरोध कर रहे हैं. इस कानून के वजह से यहां पर परेशानी बढ़ेगी. इस बिल के कारण जनता को बहुत परेशानी होने वाली है. चीजों के दाम बढ़ जाएंगे. सरकार इन सब चीजों को दरकिनार कर रही है इसका कोई तुक नहीं बनता. इससे अफसरशाही बढ़ेगी ग्रामीण क्षेत्र में गुंडागर्दी बढ़ेगी, भ्रष्टाचार बढ़ेगा. सरकार को राजस्व का कोई फायदा नहीं होगा फिर भी सरकार इस बिल को लेकर आई है. मेरा आपके माध्यम से यही अनुरोध है कि सरकार इस बिल को जल्द से जल्द वापस लें और राज की जनता को राहत पहुंचाए.झारखंड के व्यवसायी दूसरे राज्यों में पलायन करने लगेंगे : जयकिशन भगत
पाकुड़ चैंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष जयकिशन भगत ने कहा कि कृषि टैक्स के राज्य में प्रभावी होने पर कृषि उपज का व्यवसाय एवं उद्योग का विचलन निकटवर्ती राज्य में हो जाएगा, जहां पर कृषि शुल्क लागू नहीं है, जिसका सीधा सीधा असर आम लोगों पड़ेगा. महंगाई चरम सीमा पर हो जाएगी. व्यवसाय भी झारखंड को छोड़कर दूसरे राज्य में अपना व्यवसाय करना होगा. क्योंकि व्यवसायी को जिस राज्य में मुनाफा अधिक मिलेगा, वे वैसे राज्य में व्यवसाय करना पसंद करेंगे.राज्य सरकार को इस बिल के दूरदर्शी परिणाम को समझना चाहिए : राम बनगर
राम बनगर ने कहा कि ये विधेयक जनहित विरोधी है. सरकार इस विधेयक के माध्यम से चीजों के दाम क्यों बढ़ाना चाहती है यह समझ से बाहर है. सरकार को इसके दूरदर्शी परिणाम को समझना चाहिए. सरकार को इस विधेयक के माध्यम से नुकसान होने वाला है. इस विधेयक से सिर्फ अफसरशाही बढ़ेगी. ग्रामीण क्षेत्रों में गुंडागर्दी भी बढ़ने की उम्मीद है. सरकार जीएसटी लेकर आई अब नए माध्यम से अलग टैक्स से देना पड़ेगा. राज्य के व्यापार और कृषि से जुड़े लोगों को नुकासन होना तय है. जिससे चीजों के दाम बढ़ जाएंगे और आम जनता को महंगाई का सामना करना पड़ेगा.कृषि बिल से राज्य में इंस्पेक्टर राज और भयादोहन बढ़ेगा : विनोद टेकरीवाल
पाकुड़ के व्यवसायी विनोद टेकरीवाल ने कहा कि यह विधेयक कृषक, आम उपभोक्ता, कृषि उपज आधारित उद्योग व व्यवसाय के हित में नहीं है. राज्य में इंस्पेक्टर राज और भयादोहन बढ़ेगा. इसके साथ-साथ रोज हाथापाई होगी. राज्य में अफसरों की चांदी रहेगी वे जमकर भ्रष्टाचार कर सकेंगे. पदाधिकारियों का राज हो जाएगा और जिस पार्टी की सत्ता रहेगी, उसकी चांदी हो जाएगी. सरकार को टैक्स के नाम पर झुनझुना मिलेगा. सरकार को इस विधेयक को वापस लेना चाहिए.सरकार की बेरुखी पर धनबाद के व्यवसायियों ने कहा- अब आंदोलन ही एकमात्र उपाय
कृषि शुल्क विधेयक के खिलाफ व्यवसायियों का गम और गुस्सा अब सातवें आसमान पर पहुंच गया है. 14 फरवरी मंगलवार को शुभम संदेश के धनबाद कार्यालय में व्यवसायियों ने हेमंत सरकार को जमकर कोसा. व्यवसायी संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्हें राज्य सरकार की समझदारी पर तरस आता है. व्यवसायी किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं. मगर इस बिल के जरिये राजनीतिक चाल चली जा रही है. सरकार को कोई खास फायदा नहीं होगा, मगर आम जनता और व्यवसायी भारी मुसीबत में पड़ जाएंगे. उपभोक्ताओं पर महंगाई की मार पड़ेगी, जो पहले भी कम नहीं है. व्यवसायी वैसे भी कई तरह के टैक्स के बोझ से लदे हुए हैं. व्यवसायी संगठनों के नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने जीएसटी लागू करते समय ‘वन नेशन वन टैक्स का हवाला दिया था. आज उस वादे को तोड़ा जा रहा है. उन्होंने क्षेत्र के सांसदों, विधायकों व जनप्रतिनिधियों के रवैये पर भी नाराजगी जताई. दो प्रतिशत कृषि शुल्क के खिलाफ व्यवसायियों का गम व गुस्सा साफ झलक रहा था. उन्होंने कहा कि उन्हें राजनीति नहीं आती. वे शांति से व्यवसाय करना चाहते हैं. मगर अब हम निरुपाय हो चुके हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री या कोई भी जनप्रतिनिधि उनका दर्द समझने को तैयार नहीं है, कोई उनकी बात नहीं सुन रहा. इसीलिए आंदोलन ही एकमात्र उपाय बचा है. 15 फरवरी से आवक बंद हो जाएगी. इसी के साथ पूरे राज्य में खाद्यान्न, फल, सब्जी का व्यवसाय भी ठप पड़ जाएगा. व्यवसायियों ने अपनी पीड़ा के साथ इस बिल से आम जनता को होने वाले नुकसान के बारे में भी विस्तृत चर्चा की. परिचर्चा में व्यवसायी जितेंद्र अग्रवाल ने कहा कि बिल के निरस्तीकरण को लेकर संगठन ने पहले ही हेमंत सरकार को 14 फरवरी तक का अल्टीमेटम दिया था. परंतु सरकार की ओर से कोई पहल नही की गई. उन्होंने कहा कि इस बिल पर धनबाद के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी अखरनेवाली है. उन्होंने कहा कि राज्यपाल को भी बिल पास करने से पहले एक बार व्यवसायी संगठनों को विश्वास में लेना चाहिए था. सरकार कृषि बिल के नाम पर व्यवसायियों व आम जनता को कंगाल बनाने पर तुली हुई है. [caption id="attachment_555302" align="aligncenter" width="150"]alt="" width="150" height="150" /> गौरव गर्ग[/caption]
आम जनता की समस्या से भी जुड़ी है हमारी लड़ाई
परिचर्चा में कृषि बाजार समिति चैंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्य गौरव गर्ग ने कहा कि सरकार से हमारी यह लड़ाई आम जनता की समस्या से भी जुड़ी हुई हैं. इस बिल का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर ही पड़ने वाला है. पूरे राज्य में झारखंड में खाद्यान्न वस्तुएं दो प्रतिशत और महंगी हो जाएंगी. सरकार को शीघ्र ही इस नाजुक मसले पर फैसला लेना चाहिए. [caption id="attachment_555307" align="aligncenter" width="150"]alt="" width="150" height="150" /> जितेंद्र[/caption]
केंद्र नही देता है हिस्सा तो उसकी सजा व्यवसायियों को क्यों
बाजार समिति चैंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्य जितेंद्र अग्रवाल ने कहा कि 4 फरवरी को बिल के निरस्तीकरण को लेकर बरवाअड्डा हवाई अड्डे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से व्यवसायी संगठनों ने मुलाकात की. उन्हें जीएस टी का हवाला देकर कृषि टैक्स वापस लेने का अनुरोध किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार 5 प्रतिशत जीएसटी का आधा हिस्सा राज्य सरकार को देती कहां है. [caption id="attachment_555304" align="aligncenter" width="150"]alt="" width="150" height="150" /> अनिल[/caption]
टैक्स के विरोध में सांसद, विधायक की चुप्पी भी आश्चर्यजनक
कृषि बाजार चैंबर ऑफ कॉमर्स के सदस्य अनिल कुमार गोयल सांसद, विधायक व जनप्रतिनिधियों की चुप्पी से भी आहत नजर आए. कहा धनबाद के जनप्रतिनिधियों का रवैया निराशाजनक है. सभी इस मामले पर मौन हैं. इस बिल को निरस्त करने के लिए उनकी तरफ से न तो कोई मांग की गई है और न ही कोई प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है. व्यवसायी शांत नहीं बैठेंगे. [caption id="attachment_555291" align="aligncenter" width="150"]alt="" width="150" height="150" /> अजय[/caption]
जनादेश के साथ खिलवाड़ कर रही सरकार, बर्दाश्त के बाहर
जिला चैंबर के महासचिव अजय नारायण लाल सरकार के रवैये से काफी नाराज दिखे. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जनादेश के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से अपनी लड़ाई न लड़कर राज्य की जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है. इस बोझ का सबसे ज्यादा असर मध्यवर्गीय और निम्न वर्गीय परिवारों पर पड़ेगा. [caption id="attachment_555305" align="aligncenter" width="150"]alt="" width="150" height="150" /> प्रमोद[/caption]

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