Ranchi : ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम, झारखंड की ओर से बुधवार को मनरेसा हाउस रांची में बढ़ते सांप्रदायिक-कॉरपोरेट, फासीवाद और लोकतांत्रिक प्रतिरोध विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया. मुख्य वक्ता भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव कॉमरेड दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि देश में मजबूत लोकतंत्र के लिए आजादी से भी बड़ी लड़ाई लड़नी होनी. भारत में साझी संस्कृति एवं सभ्यता की लंबी ऐतिहासिक विरासत है. देश में बढ़ते सांप्रदायिक कॉरपोरेट फासीवाद हमले के बावजूद अभी भी बहुत कुछ है.
हिंसक माहौल बनाया जा रहा है
उन्होंने कहा कि तीखे उन्मादी, नफरत की भाषा का इस्तेमाल कर देश में तनावपूर्ण एवं हिंसक माहौल बनाया जा रहा है, जिसमें तमाम धार्मिक आयोजनों का इस्तेमाल राजनैतिक धुर्वीकरण के मकसद से किया जा रहा है. सांप्रदायिक और कॉरपोरेट ताकतें एक दूसरे के लिए हैं. इसे ब्रिटिश हुकूमत ने सिखाया था. देश के तमाम विपक्षी एकता एवं सामाजिक एकता का मोर्चा बनाकर 2024 में बीजेपी की वापसी न हो, इसका प्रयास हो रहा है.
अंधकार के दौर से गुजर रहे- डॉ रवि भूषण
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रवि भूषण (राष्ट्रीय अध्यक्ष, जसम) ने कहा कि कॉरपोरेट और सांप्रदायिक फासीवाद ताकतों का आलिंगन और गहरा हो गया है. हम सभी एक भयावह और अंधकार के दौर से गुजर रहे हैं. लेकिन जहां भी चिराग़ जल रहे है, वहां जलते हुए मशाल का रूप देना होगा. देश में आगामी लोकसभा चुनाव में मौजूदा सत्ता के ख़िलाफ तमाम विपक्षी ताकतों को एकजुट होकर वन-टू-वन फाइट करना जरूरी है. तभी मौजूदा सांप्रदायिक-कॉरपोरेट फासीवाद सत्ता को हटाया जा सकता है.
देश में अभी कॉरपोरेट लूट का मॉडल चल रहा- विनोद सिंह
विधायक कॉमरेड विनोद सिंह (राष्ट्रीय अभियान समिति, एआईपीएफ झारखंड) ने कहा कि देश में अभी कॉरपोरेट लूट का मॉडल चल रहा है. जिन राज्यों में ग़ैर बीजेपी दलों की सरकार है, वहां भी वही मॉडल चलाने की कोशिश है. जल-जंगल जमीन की लूट के लिए सांप्रदायिक विभाजन का माहौल बनाया जाता है. रोजी- रोजगार एवं खनिज या अन्य संसाधन की लूट के लिए दमन और मानवाधिकार का हनन किया जाता है. फिल्ममेकर मेघनाथ ने कहा कि फिल्म के आधार पर सांप्रदायिक- कॉरपोरेट फासीवाद निजाम के खिलाफ जनजागरूकता के लिए डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का उपयोग करना चाहिए. वरिष्ट पत्रकार विनोद कुमार ने कहा कि अघोषित फासीवाद चल रहा है, जो कुछ अर्थों में ज्यादा खतरनाक है. प्रगतिशील और लोकतांत्रिक ताकतों को एकजुट होकर ऐसी सत्ता को हटाना जरूरी है. एस. अली, दामोदर तुरी, सयैद गुलफाम अशरफी, वाल्टर कंलडुलना ने भी विचार रखे.
वाल्टर कंडुलना ने अध्यक्षता की
परिचर्चा की अध्यक्षता वरिष्ठ आदिवासी चिंतक वाल्टर कंडुलना एवं साहित्यिक सयैद गुलफाम अशरफी ने की. मंच संचालन एआईपीएफ के नदीम खान ने काया. विषय प्रवेश एआईपीएफ के जेवियर कुजूर ने किया. कार्यक्रम में आंदोलनकारी, बुध्दिजीवी, लेखक, पत्रकार, सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता सहित सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए. कार्यक्रम में मुख्य रूप से जसम अध्यक्ष झारखंड शभू सिंह बादल, नंदिता भट्टाचार्य, मो अकरम, इम्तियाज सोनू, अब्दुल जब्बार, गुलजार अंसारी, मो बब्बर, अभिजीत मल्लिक, अंशुमान कुमार, अनंत कुमार, अधिवक्ता राजदीप चंद्रवंशी, अधिवक्ता जयंत पांडेय, सिद्धेश्वर पासवान, बब्लू, शाहनवाज खातून, रोबर्ट मिंज, मीनू सिंह, शकील अहमद, नसीम खान, नौशाद आलम, मनोज भक्त, जनार्दन प्रसाद, मोहन दत्ता, शुवेन्दु सेन, भुनेश्वर केवट समेत अन्य शामिल थे.
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