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वन विभागः 394 रेंज, 52 रेंजर, एक को कई प्रभार, मुआवजा में दिक्कत और विकास ठप, सेवा विस्तार लंबित

Ranchi : झारखंड में हाथियों पर हमले जारी हैं. चाईबासा, जमशेदपुर, गुमला, सिमडेगा, रांची, हजारीबाग समेत कई जिले हैं, जहां हाथियों के हमले हो रहे हैं. फसल का नुकसान हो रहा है, लोगों की जान भी जा रही है. लेकिन समय पर मुआवजा नहीं मिल रहा. राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इसे लेकर चिंतित हैं. उन्होंने पीड़ितों के परिवारों को तुरंत मुआवजा देने का आदेश दिया है. पर, असल दिक्कत दूर हुए बिना मुआवजा मिलने में देरी होती रहेगी.

 

हजारीबाग में हाथी के हमले में लोगों की मौत की घटना के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शनिवार को बैठक की. उन्होंने समय पर मुआवजा नहीं मिलने पर चिंता जतायी, तब बैठक में यह बात खुलकर सामने आया कि रेंजर की भारी कमी है. इस कारण समय पर मुआवजा नहीं मिल पाता. विभाग ने करीब एक दर्जन रेंजर को तीसरी बार सेवा विस्तार देने की अनुशंसा सरकार से की है. इस पर फैसला नहीं हो पाया है. संचिका चार माह से घूम रहा है. करीब इतने ही रेंजर और हैं, जिन्हें सेवा विस्तार देकर समस्या का हल निकाला जा सकता है. पर यह हो नहीं पा रहा है. अगर सरकार रेंजरों को सेवा विस्तार देती है, तो झारखंड में रेंजरों की संख्या बढ़ कर 70-75 हो जाएंगे.

 

सूत्रों के मुताबिक बैठक में यह बात भी सामने आयी कि अनुबंध पर रेंजर की नियुक्ति की जाये, लेकिन यह इसलिए संभव नहीं है, क्योंकि अनुबंध पर नियुक्त अधिकारी को वित्तीय अधिकार देना संभव नहीं है. उन्हें ट्रेजरी से निकासी का अधिकार नहीं दिया जा सकता. 

 

दरअसल, झारखंड वन विभाग में रेंजर का पद सबसे महत्वपूर्ण है. वित्तीय कार्य रेंजर ही करते हैं. ट्रेजरी से निकासी का अधिकार रेंजर के पास है और विभाग में रेंजर की भारी कमी है. झारखंड में वन विभाग के 394 रेंज हैं और सिर्फ 52 रेंजर उपलब्ध हैं. यानी करीब 74 प्रतिशत कम रेंजर हैं. एक-एक रेंजर के जिम्मे छह से लेकर दस रेंज का प्रभार है. नये रेंजर की नियुक्ति प्रक्रिया जारी है, लेकिन नियुक्ति होने में अभी पांच-छह माह लगेंगे. 

 

नियुक्ति के बाद उनसे काम लेने से पहले उन्हें दो साल की ट्रेनिंग देना अनिवार्य है. यानी नए रेंजर की पोस्टिंग में कम से कम ढ़ाई साल लगेगा. रेंजर की कमी के कारण पौधा रोपण से लेकर विभाग के अन्य दूसरे काम प्रभावित हो रहे हैं. वन विभाग का विकास कार्यों पर तो असर पड़ ही रहा है, विभाग के कर्मियों का वेतन निकासी में भी दिक्कतें आ रही हैं. जो काम हुए हैं, उसके बिल का भुगतान नहीं हो पा रहा है और चालू वित्तीय वर्ष खत्म होने वाला है.

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