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ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने के लिए जंगल का होना जरुरीः सीटू

Hazaribagh: विश्व आदिवासी दिवस पर शुक्रवार को मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने अपने कार्यालय में गोष्ठी की. इसकी अध्यक्षता इश्वर महतो और संचालन तपेस्वर राम ने किया. इस अवसर पर सीपीएम नेता गणेश कुमार सीटू ने कहा कि जहां-जहां आदिवासी हैं, वहां-वहां जंगल आज भी सुरक्षित है और ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने के लिए जंगल का होना अति आवश्यक है. विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समुदायों में जागरूकता फैलाने और उनके अधिकारों के संरक्षण को प्रेरित करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को मनाया जाता है.

विश्व आदिवासी दिवस लगभग 90 देशों में मनाया जाता है

संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा दिसंबर 1994 में इसकी घोषणा की गई थी, जो कि वैश्विक स्तर पर आदिवासी जनसंख्या, उनके मानवाधिकारों, भाषा, संस्कृति की रक्षा करना और इनके चौमुखी विकास के कार्यक्रम को सख्ती से लागू करने के लिए मनाया जाता है. यह दिवस विश्व के लगभग 90 देशों में मनाया जाता है. वर्ष 2021 में मनाए गए विश्व आदिवासी दिवस के समय संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2022 से वर्ष 2032 तक के दशक को ‘आदिवासी दशक’ के तौर पर मनाए जाने की घोषणा की है. इसके पीछे यूएन का उद्देश्य है कि आदिवासी भाषाओं के संरक्षण के लिए क्या-क्या प्रयास किए जा सकते हैं.

40 फीसदी आदिवासी भाषा विलुप्ति के कगार पर है

संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरे विश्व में कुल मिलाकर करीब 7 हजार आदिवासी भाषाओं की पहचान की गई है. इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि इनमें 40 फीसदी भाषा विलुप्त होने की कगार पर हैं. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इनका उपयोग पढ़ाई, संचार, सरकारी कामकाज और रोजगार के क्षेत्रों में हुआ ही नहीं और आदिवासी युवा मजबूरी में आर्थिक रूप से उन्नत होने के लिए अपनी भाषा को छोड़ कर प्रचलित भाषाओं को अपनाते गए. ऐसा ही चलता रहा तो आदिवासी भाषाओं को बचाना मुश्किल हो जाएगा. गोष्ठी में सीपीआई के नेता महेंद्र राम, सीपीएम के लक्ष्मी नारायण सिंह, रामचंद्र महतो, सुरेश कुमार दास, किरण देवी, अंजना देवी, अंजू देवी, रंजना देवी मैं अपने विचार व्यक्त किया. इस अवसर पर पार्टी के कई साथियों ने भाग लिया. इसे भी पढ़ें - बांग्लादेश">https://lagatar.in/attacks-on-hindu-community-in-bangladesh-united-nations-said-we-are-against-inciting-racial-violence/">बांग्लादेश

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