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आपराधिक कांड के अनुसंधान से लेकर सजा दिलाने तक के लिए SIPU का गठन

Ranchi : आपराधिक कांड के अनुसंधान से लेकर सजा दिलाने तक के लिए स्पेशल क्राइम इंवेस्टिगेशन एंड प्रोसिक्यूशन यूनिट (सीआईपीयू) का गठन किया गया है. राज्य पुलिस की सीआईडी ने सीआईपीयू के गठन का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय को भेजा था. इस प्रस्ताव पर सहमति मिल चुकी है. डीजीपी नीरज सिन्हा के आदेश से सीआईपीयू के गठन संबंधी आदेश को गुरुवार को जारी कर दिया गया. सीआईपीयू के तहत जिला व राज्य के स्तर पर पदाधिकारियों की तैनाती होगी. प्रत्येक थाना में भी सीआईपीयू का कामकाज देखने के लिए अफसर प्रतिनियुक्त किए जाएंगे.

सीआईडी डीआईजी के जिम्मे कमान

राज्य स्तर पर सीआईपीयू की कमान सीआईडी डीआईजी के जिम्मे होगी. उनके अधीन सीआईडी एसपी, इंवेस्टिगेशन ट्रेनिंग स्कूल के डीएसपी व दो इंस्पेक्टरों की तैनाती होगी. राज्य स्तरीय सीआईपीयू सभी जिलों के सीआईपीयू के कामकाज की मॉनिटरिंग व उसे समय समय पर कांड से जुड़े सुझाव देगी. वहीं जिला स्तर पर सीआईपीयू की कमान जिले के एसपी के जिम्मे होगी. उनके अधीन डीएसपी मुख्यालय, विशेष अनुसंधान पदाधिकारी, कोर्ट पदाधिकारी, जेल नोडल पदाधिकारी, कोर्ट नोडल पदाधिकारी और कोर्ट माल खाना पदाधिकारी होंगे. इसे भी पढ़ें –नागर">https://lagatar.in/hemant-sarkar-develop-civil-aviation-department-as-a-revenue-model-directs-to-provide-night-halt-facility-at-ranchi-airport/">नागर

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सीआईपीयू की ये होगी विशेषताएं

  1. प्रत्येक थाना में एक पदाधिकारी कोर्ट नोडल पदाधिकारी के रूप में पदस्थापित किया जाएगा. जिनका काम उस थाना से संबंधित सभी कोर्ट के कार्यों का संपादन सुनिश्चित करना होगा.
  2.  सभी कोर्ट नोडल ऑफिसर संबंधित जिले के कोर्ट ऑफिसर के अधीन काम करेंगे. कोर्ट ऑफिसर का काम अभियोजन से संबंधित विभिन्न आंकड़ों को एकत्रित करते हुए जिला स्तरीय इस एसआईपीयू के माध्यम से पुलिस अधीक्षक को समय पर उपलब्ध कराना होगा. इसके अलावा कोर्ट ऑफिसर संपूर्ण कोर्ट परिसर की सुरक्षा के प्रभार में रहेंगे.
  3.  जिला के अनुसंधान और अपराध नियंत्रण संबंधित अन्य कार्यों की निगरानी के लिए जेल पदाधिकारी और कोर्ट मालखाना पदाधिकारी की भी प्रतिनियुक्ति की गई है.
  4.  राज्य स्तर पर अभियोजन में विफल कांडों की समीक्षा करते हुए विफलता के कारणों को चिन्हित कर पदाधिकारियों और अभियोजकों की जिम्मेवारी निर्धारित कर उचित कार्रवाई के लिए राज्य स्तरीय स्टैंडिंग कमिटी फॉर क्रिमिनल प्रॉसीक्यूशन को अनुशंसा भेजा जाएगा. उक्त समीक्षा कार्य गठित समिति के माध्यम से किया जाएगा. जिसमें निदेशक अभियोजन द्वारा नामित प्रतिनिधि भी सदस्य रहेंगे
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