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जस्टिस यादव की नियुक्ति का विरोध किया था पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ ने, कहा, CJI गोगोई को पत्र लिखा था

NewDelhi : इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस शेखर यादव के विवादास्पद बयान के संदर्भ में पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने बड़ा खुलासा किया है. कहा कि उन्होंने जस्टिस शेखर यादव को इलाहाबाद हाईकोर्ट का जज नियुक्ति करने का विरोध किया था. पूर्व सीजेआई ने कहा कि किसी की भी नियुक्ति नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) और रिश्तेदारी के आधार पर नहीं होनी चाहिए.

कठमुल्ला देश के लिए घातक है

याद करें कि जस्टिस यादव ने विहिप के एक कार्यक्रम में कहा था कि कठमुल्ला देश के लिए घातक है. कहा था कि मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि यह हिंदुस्तान है और देश हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यकों के अनुसार चलेगा. धर्मांतरण को नहीं रोका गया तो भारत की बहुसंख्यक आबादी अल्पसंख्यक हो जायेगी. इस बयान पर काफी विवाद हुआ था. जस्टिस शेखर यादव के बयान पर विपक्षी राजनीतिक दलों ने जस्टिस यादव के खिलाफ महाभियोग की मांग है.

जस्टिस यादव 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के सामने पेश हुए 

इसी क्रम में जस्टिस यादव मंगलवार, 17 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम के सामने पेश हुए थे. जानकारी के अनुसार कॉलेजियम ने उन्हें सलाह दी कि वे अपने संवैधानिक पद की गरिमा बरकरार रखें. कहा कि सार्वजनिक भाषण देते समय सावधानी बरतनी चाहिए. डीवाई चंद्रचूड़ के अनुसार उन्होंने तत्कालीन सीजेआई जस्टिस रंजन गोगोई को पत्र लिख कर शेखर यादव सहित कई अन्य नामों का विरोध किया था. जस्टिस यादव के विरोध का कारण नेपोटिज्म, रिश्तेदारी होना था.

किसी जज का रिश्तेदार होना कोई योग्यता नहीं है

उन्होंने कहा कि किसी जज का रिश्तेदार होना कोई योग्यता नहीं है, नियुक्ति योग्यता के आधार पर की जानी चाहिए. हालांकि चंद्रचूड़ ने यह नहीं बताया कि किस रिश्तेदार के प्रभाव से उनकी नियुक्ति की गयी था. पूर्व सीजेआई ने अपना मंतव्य रखते हुए कहा, सिटिंग जज को हमेशा सोच समझ कर बोलना चाहिए कि वह न्यायालय के अंदर या बाहर क्या बोल रहा है. उसका क्या असर होगा. जज का बयान इस तरह का नहीं होना चाहिए जिससे लोग न्यायपालिका को पक्षपाती मानने लगें.

जस्टिस शेखर यादव  ने 1988 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से लॉ में ग्रेजुएशन किया

जस्टिस शेखर यादव के बारे में जानकारी यह है उन्होंने 1988 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से लॉ में ग्रेजुएशन किया. 8 सितंबर 1990 को अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया. जौनपुर में वीबीएस पूर्वांचल यूनिवर्सिटी के स्थायी अधिवक्ता के रूप में कार्यरत थे. दिसंबर 2019 में अतिरिक्त न्यायाधीश और फिर मार्च 2021 में स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली.

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