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पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह का निधन, पीएम मोदी सहित अन्य ने दी श्रद्धांजलि

आज दिल्ली में होगा अंतिम संस्कार NewDelhi :   पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह का शनिवार देर रात निधन हो गया. 93 वर्षीय नटवर सिंह ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में अंतिम सांस ली. उनका पार्थिव शरीर दिल्ली के छतरपुर स्थित डेरा मंडी रोड के महारानी फार्म हाउस नंबर 1 में रखा गया है. परिवार के अन्य सदस्य दिल्ली आ रहे हैं. जिसके बाद आज रविवार को ही नटवर सिंह का अंतिम संस्कार किया जायेगा. जानकारी के अनुसार, वह लंबे समय से बीमार थे और पिछले कुछ हफ्तों से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल  में भर्ती थे. https://twitter.com/PTI_News/status/1822472742794604673

पीएम ने नटवर सिंह के निधन पर  श्रद्धांजलि अर्पित की

नटवर सिंह के निधन पर पीएम मोदी सहित अन्य ने श्रद्धांजलि अर्पित की है. पीएम ने एक्स पर लिखा कि नटवर सिंह जी के निधन से बहुत दुःख हुआ. उन्होंने कूटनीति और विदेश नीति की दुनिया में बहुत बड़ा योगदान दिया. वे अपनी बुद्धिमता के साथ-साथ विपुल लेखन के लिए भी जाने जाते थे. इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं. ओम शांति. https://twitter.com/narendramodi/status/1822461438515929578

रणदीप सुरजेवाला ने भी दुख व्यक्त किया

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने `एक्स` पर एक पोस्ट में नटवर सिंह के निधन पर शोक जताया. सुरजेवाला ने नटवर सिंह ने लिखा कि पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह जी के निधन का समाचार दुखद है. ईश्वर उनके परिजनों को यह क्षति सहने की शक्ति दे और दिवंगत आत्मा को सदगति प्रदान करे. https://twitter.com/rssurjewala/status/1822335988305191074

नटवर सिंह ने कई चर्चित किताबें लिखी

कांग्रेस के पूर्व सांसद नटवर सिंह का जन्म 1931 में राजस्थान के भरतपुर जिले में हुआ था. वह 2004-05 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार में विदेश मंत्री पद पर काबिज थे. उन्होंने पाकिस्तान में भारत के राजदूत के रूप में भी सेवाएं दी थीं और 1966 से 1971 तक तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यालय से जुड़े हुए थे. नटवर सिंह को राष्ट्र के प्रति सेवा के लिए 1984 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था. उन्होंने विदेश मामलों सहित अन्य विषयों पर कई चर्चित किताबें भी लिखीं, जिनमें `द लिगेसी ऑफ नेहरू : अ मेमोरियल ट्रिब्यूट` और `माई चाइना डायरी 1956-88` शामिल हैं. उनकी आत्मकथा `वन लाइफ इज नॉट इनफ` भी काफी सुर्खियों में रही थी.   [wpse_comments_template]

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