Ranchi: फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में चुनाव आयोग से नोटिस मिलने के बाद भाजपा विधायक समरी लाल ने झामुमो पर कड़ा हमला किया है. उन्होंने कहा कि जबतक वे झामुमो से चुनाव लड़ रहे थे तबतक झारखंडी थे, लेकिन भाजपा से विधायक बनते ही कैसे गैर झारखंडी हो गये. उन्होंने कहा कि एससी आरक्षित कांके विधानसभा सीट से 1985 से चुनाव लड़ रहे हैं. पहली बार स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े. इसके बाद 1990, 1995 और 2000 में जनता दल से चुनाव लड़ा. उनकी जाति पर सवाल उठाने वाले झामुमो ने भी उन्हें 2 बार 2005 और 2009 में चुनाव लड़वाया. तब तक वे झारखंडी थे, लेकिन जैसे ही 2019 में भाजपा से विधायक चुने गये अचानक गैर झारखंडी बन गये.
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समरी लाल ने कहा कि वे जन्म से झारखंडी हैं. उनके दादा आजादी के पहले राजस्थान से यहां आ गए थे. उनके पिता रिम्स में कार्यरत थे. उन्हें एससी का दर्जा पाने का पूरा अधिकार है. कोई उनकी जाति को लेकर चुनौती नहीं दे सकता. विधायक ने कहा कि नोटिस का जवाब देने के लिए 21 सितंबर तक का समय मिला है. वे तय समय सीमा के अंदर जवाब भेज देंगे.
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समरी लाल ने 2019 में कांके विधानसभा सीट में कांग्रेस के उम्मीदवार सुरेश बैठा को हराया था. सुरेश बैठा ने ही 6 अप्रैल को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष शिकायत दायर कर कहा कि समरी लाल झारखंड में अनुसूचित जाति के दर्जे के लायक नहीं हैं, क्योंकि वे राजस्थान के मूल निवासी हैं. इसलिए उनकी सद्स्यता रद्द की जा सकती है. स्पीकर ने शिकायत राज्यपाल को भेज दिया था. इसी साल जून में राज्यपाल ने मामले पर चुनाव आयोग की राय मांगी थी. 5 सितंबर को विधानसभा सत्र में सीएम हेमंत सोरेन ने भी यह मामला उठाते हुए कहा था कि आखिर चुनाव आयोग समरी लाल के मामले में क्यों देरी कर रहा है. [wpse_comments_template]
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