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पेट की खातिर लड़ा, शिकायत की, तो बच्चे को ही स्कूल से निकाल दिया : बबलू

अभी खत्म नहीं हुई है लड़ाई आत्मदाह भी करने को तैयार Ranchi :  दैनिक ‘शुभम संदेश’ में जिला परिषद भवन हजारीबाग गुपचुप तरीके से हस्तांतरण किए जाने की खबर प्रकाशित होने के बाद शिकायतकर्ता बबलू सिंह का दर्द सामने आ गया. हजारीबाग स्थित सुरेश कॉलोनी के सदानंद रोड निवासी बबलू सिंह ने जिला परिषद से भवनों के हस्तांतरण से संबंधित अपनी पूरी व्यथा बयां की. उन्होंने कहा कि परिवार के पेट की खातिर उन्होंने जिला परिषद से प्राइम लोकेशन पर खुद के लिए एक दुकान चाही थी. लेकिन क्या हुआ, व्यवस्था का ऐसा हश्र देखने को मिला कि उन्हें राज्यपाल तक गुहार लगानी पड़ी. बबलू कहते हैं कि पहले भी वह जिला परिषद से जुड़े रहे हैं. एक छोटी दुकान भी उनके पास है. वह भी चाहते थे कि शहर की प्राइम लोकेशन जिला परिषद चौराहे के निकट उनकी एक दुकान हो. वे इस उम्मीद में थे कि दुकान आवंटन के लिए टेंडर निकलेगा, तो वे भी टेंडर डालेंगे. लेकिन उन्हें क्या मालूम था कि ऊपर ही ऊपर पूरी की पूरी बिल्डिंग ही किसी को सौंप दी जाएगी. बबलू सिंह कहते हैं कि उन्होंने पहले साधारण तौर पर जानना चाहा कि आखिर आरोग्यम हॉस्पिटल को पूरा भवन कैसे दे दिया गया? कौन सी प्रक्रिया अपनायी गयी. क्या किराया तय किया गया, यह बात सार्वजनिक होती, तो वह भी दुकान लेने के लिए कुछ उपाय करते. लेकिन उन्हें जानकारी नहीं दी गई. सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) का सहारा लिया. आरटीआई का आवेदन लेने से इनकार कर दिया गया, तो राज्यपाल से शिकायत करनी पड़ी. राज्यपाल से शिकायत करने के बाद उन्हें उम्मीद है कि मामले की जांच होगी. सच सामने आएगा.

रसूखदारों से लड़ने का खामियाजा भुगत रहा मेरा बच्चा

बबलू सिंह ने कहा कि रसूखदारों से लड़ने का खामियाजा उनका बच्चा भुगत रहा है. आठवीं कक्षा में पढ़ रहे उनके बच्चे को स्कूल से निकाल दिया गया. इसके पीछे भी जिला परिषद की कहानी से ही जुड़ा मामला है. उनका बच्चा मेधावी छात्र रहा है. हर गतिविधि में उसने बेहतर प्रदर्शन किया. उस पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाकर निकाल दिया गया. यह बच्चे को हताश करने की कोशिश की गई है. लेकिन वह पीछे नहीं हटेंगे. उनका इरादा और मजबूत हो गया है. उनकी लड़ाई खत्म नहीं हुई है, आत्मदाह भी करना होगा तो वह तैयार हैं. नीचे से ऊपर तक अफसर चुप्पी साधे हुए हैं. आखिर कब तक चुप रहेंगे.

बच्चे की भावना से खिलवाड़, झूठा आरोप लगाकर स्कूल से निकाला

बबलू सिंह कहते हैं कि बच्चे निश्छल होते हैं. उनके बच्चे की कोमल भावना से खिलवाड़ किया गया है. बच्चे को स्कूल से निकालने के पहले मैनेजमेंट ने यह नहीं सोचा कि उसकी मनोदशा क्या होगी. नर्सरी से आठवीं कक्षा तक उसी स्कूल में पढ़ा और फिर झूठा आरोप लगाकर निकाल दिया गया. कल तक वह सबसे बेहतर छात्र था, तो अचानक अनुशासनहीन कैसे हो गया. क्या किसी को स्कूल से निकालना विकल्प है. उसे समझाया जा सकता था. उनका बेटा झूठे आरोपों के चलते घर से बाहर नहीं निकल रहा है. वार्षिक परीक्षा होने वाली है. वह नहीं बैठ पाएगा, तो साल बर्बाद हो जाएगा. इसकी भरपाई कौन करेगा. बबलू सिंह कहते हैं कि परोक्ष रूप से उनके बच्चे पर वार नहीं करना चाहिए था. [wpse_comments_template]

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