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बोकारोः 732 करोड़ की लागत से दो कोल हैंडलिंग प्लांट का शिलान्यास

-कोयला एवं खान राज्य मंत्री ने रखी दो परियोजनाओं की आधारशिला -कोनार परियोजना में 322 करोड़ और कारो परियोजना में 410 करोड़ का निवेश -दोनों परियोजनाओं की क्षमता सात मिलियन टन एवं पांच मिलियन टन प्रतिवर्ष Ranchi/Bermo: कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने 732 करोड़ की लागत से सीसीएल के बोकारो एवं करगली क्षेत्र में कारो कोल हैंडलिंग प्लांट एवं कोनार कोल हैंडलिंग प्लांट का शिलान्यास किया. इन दोनों परियोजनाओं की क्षमता क्रमशः सात मिलियन टन एवं पांच मिलियन टन प्रतिवर्ष है. फर्स्ट माइल रेल कनेक्टिविटी की दिशा में ये दोनों कोल हैंडलिंग प्लांट एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होंगे. इसके तहत कोयला खदानों से उत्पादित कोयले को निकटतम रेलवे सर्किट तक ले जाने की व्यवस्था की जाएगी, जहां से इसे देश भर के ताप विद्युत संयंत्रों तथा अन्य उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाएगा. वर्तमान में, इन खानों से कोयला, टिपर द्वारा सड़क मार्ग से रेलवे साइडिंग तक लाया जाता है. कोयला एवं खान राज्य मंत्री ने कोनार परियोजना के शिलान्यास के क्रम में पौधरोपण भी किया. मौके पर गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी, बेरमो विधायक कुमार जयमंगल (अनूप सिंह), कोल इंडिया के अध्यक्ष पीएम प्रसाद, सीसीएल के सीएमडी निलेंदु कुमार सिंह, निदेशक (वित्त) पवन कुमार मिश्रा, निदेशक (कार्मिक) हर्ष नाथ मिश्र, निदेशक तकनीकी (संचालन) हरीश दुहान, निदेशक तकनीकी (योजना/ परियोजना) सतीश झा एवं श्रमिक संघों के प्रतिनिधि, महाप्रबंधक, विभागाध्यक्ष सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे.

मील का पत्थर साबित होंगी दोनों योजनाएं : दुबे

बेरमो में शिलान्यास स्थल पर कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सभी योजनाओं को समय पर पूरा किया जा रहा है. जो शिलान्यास होता है, उसका उद्घाटन भी समय पर होता है. ये योजनाएं झारखंड और पूरे क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगी. उन्होंने कहा कि कोनार परियोजना में 322 करोड़ और कारो परियोजना में 410 करोड़ रुपये निवेश किये जा रहे हैं. ये दोनों परियोजनाएं प्रदूषण नियंत्रण में मदद करेंगी और क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर प्रदान करेंगी. मंत्री ने यह भी कहा झारखंड में मौजूद खनिज संसाधन प्रदेश को तेजी से विकसित करेंगे.

कोयला के उत्पादन और प्रेषण में आएगी तेजी

कोल इंडिया के अध्यक्ष पीएम प्रसाद ने कहा कि दोनों परियोजनाएं एक क्लोज्ड-लूप, पूर्ण यंत्रीकृत प्रणाली हैं, जो सड़क द्वारा परिवहन को समाप्त करके कोयले के प्रेषण में तेजी और दक्षता लाएंगी. इस प्रकार से डीजल की खपत में भी कमी आएगी. इन परियोजनाओं के आरंभ होने पर धूल और वाहन जनित प्रदूषण कम होगा, जिससे क्षेत्र के पर्यावरण में गुणात्मक सुधार होगा. बता दें सीएमडी सीसीएल निलेंदु कुमार सिंह के नेतृत्व में सीसीसीएल की टीम कई नई परियोजनाओं की शुरूआत कर रही है, जिससे कोयला उत्पादन एवं प्रेषण में वृद्धि आएगी.

कोनार कोल हैंडलिंग प्लांट

इस संयत्र में रिसीविंग हॉपर, क्रशर, 10,000 टन क्षमता के कोयला भंडारण बंकर और 1.6 किमी लंबा कन्वेयर बेल्ट शामिल हैं, जिनकी सहायता से कोयले को 1,000 टन भंडारण क्षमता के साइलो बंकर द्वारा रेलवे वैगनों में स्थानांतरित किया जाएगा. पांच मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता की इस परियोजना की लागत 322 करोड़ रुपये है. इसके परियोजना के प्रारंभ होने से वर्तमान रेक लोडिंग का समय पांच घंटे से घट कर एक घंटा रह जाएगा.

कारो कोल हैंडलिंग प्लांट

इस संयत्र में रिसीविंग हॉपर, क्रशर, 15,000 टन क्षमता के कोयला भंडारण बंकर और एक किमी लंबा कन्वेयर बेल्ट शामिल हैं, जिनकी सहायता से कोयले को 4,000 टन भंडारण क्षमता के साइलो बंकर द्वारा रेलवे वैगनों में स्थानांतरित किया जाएगा. सात मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता की इस परियोजना की लागत 410 करोड़ रुपये है. इसके परियोजना के प्रारंभ होने से वर्तमान रेक लोडिंग का समय पांच घंटे से घटकर एक घंटा हो जाएगा. इसे भी पढ़ें - हिंदू">https://lagatar.in/hindu-society-will-remain-safe-only-when-it-unites-by-removing-caste-language-and-regional-disputes-mohan-bhagwat/">हिंदू

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