Ranchi: ट्रेजरी से वेतन मद में फर्जी निकासी की जांच के दौरान शिक्षा विभाग के जिला स्तरीय इकाइयों में Acquittance Roll और Cash Book के रख रखाव में भारी गड़बड़ी पायी गयी है. वेतन पुनरीक्षण के नाम पर अधिक निकासी के मामला पकड़ में आया है. कुछ जिलों में Acquittance Roll नहीं है. वेतन पर्ची का ही इस्तेमाल Acquittance Roll की तरह किया जा रहा है. इस स्थिति को देखते हुए उन विभागों में ज्यादा गड़बड़ी की आशंका जतायी जा रही है, जहां कर्मचारियों की संख्या अधिक है. जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस आदि.

वित्त विभाग के आदेश से जिलों में जारी जांच के दौरान वेतन मद से फर्जी निकासी के लिए तीन कारणों को जिम्मेवार माना जा रहा है. पहला कारण बड़ा स्थापना (ज्यादा कर्मचारी) के बहाने DDO द्वारा वेतन से संबंधित बिल की नियमानुसार जांच नहीं करना. दूसरा कारण बजट बनाने की प्रक्रिया के दौरान वित्त विभाग को भेजे जाने वाले फार्म (COBT) कार्यरत कर्मचारियों की संख्या से अधिक के लिए वेतन मद में पैसों की मांग करना. यह फार्म हर विभाग के DDO द्वारा वित्त विभाग को भेजा जाता है. तीसरा कारण ट्रेजरी की संलिप्तता या लापरवाही.

अब तक की जांच के दौरान बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़ जिले में वेतन मद में अधिक निकासी की पुष्टि हुई है. इसमें वेतनमान में बदलाव, बाहरी व्यक्तियों को भी सरकारी कर्मचारी बना कर वेतन की निकासी आदि के मामले पकड़ में आये हैं. इसकी वजह संबंधित विभागों की स्थानीय इकाईयों में Acquittance Roll का नहीं होना है. Acquittance Roll में सरकारी कर्मचारियों का नाम, पदनाम, वेतनमान सहित अन्य देय सुविधाओं का उल्लेख रहता है. इस ब्योरे के अभाव में बिल क्लर्क और अकाउंटेंट के स्तर से बाहरी लोगों को भी सरकारी कर्मचारी बना कर निकासी कर ली गयी. DDO के स्तर पर भी सत्यापन नहीं किया जा सका.
वेतन मद में पैसों का प्रावधान करने के लिए DDO स्तर पर निश्चित प्रारूप में (COBT) कर्मचारियों का ब्योरा भर कर वित्त विभाग को भेजना पड़ता है. इसमें कार्यरत कर्मचारियों की संख्या के आधार पर वेतन मद में पैसों की मांग करने का नियम है. अब तक की जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर कार्यरत कर्मचारियों से अधिक के लिए वेतन मद में पैसों की मांग किये जाने की आशंका जतायी जा रहा ही. इसकी वजह से बाहरी व्यक्तियों को सरकारी कर्मचारी बता कर वेतन मद से करोड़ों की निकासी के बावजूद इस मद में पैसों की कमी नहीं होना बताया जाता है.
वित्त विभाग से वेतन मद में बजट में पैसों की मांग के लिए DDO के हस्ताक्षर से भर कर भेजे जाने वाले फार्म में चालू वित्तीय वर्ष के पहले छह महीने, पिछले वित्तीय वर्ष का छह महीने के वास्तविक खर्च का उल्लेख करना पड़ता है. इसके बाद अगले वित्तीय वर्ष के लिए वेतन मद के अनुमानित खर्च का ब्योरा दर्ज किया जाता है. यानी अगर वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए वेतन मद में पैसों की मांग के लिए 2024-25 के लिए स्वीकृत खर्च, 2024-25 के पहले छह महीने और 2023-24 के पहले छह महीने का वास्तविक खर्च बताने की बाध्यता है. इसके अलावा एक दूसरे प्रपत्र में कर्मचारियों का स्वीकृत पद, कार्यरत कर्मचारियों की संख्या, मूल वेतन, वार्षित वेतन वृद्धि और अन्य देय सुविधाओं के साथ कुल वेतन का आंकड़ा देने पड़ता है.

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