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डरावना आंकड़ा : दुनिया में 60 हजार और भारत में 23 हजार...

इस खबर के आने के तुरंत बाद मेरे सामने आईटी पेशेवर का चेहरा घूमने लगा, जिससे पिछले ही हफ्ते मुलाकात हुई. उसने जो बताया था, माइक्रोसॉफ्ट की घोषणा ने उसकी पुष्टि कर दी. उसने बताया था कि डेस्क व रिपोर्टिंग के काम में लगे 50-60 प्रतिशत की छंटनी करने के बाद भी आपके समाचार पोर्टल पर कोई असर नहीं पड़ेगा. एक बोट की मदद से डेस्क के दो-तीन लोग ही 150-200 खबरें लगा देंगे. तो क्या छंटनी की अगली खबर मीडिया क्षेत्र से आने वाली है.
 
कर्मचारियों की छंटनी

60 हजार. जी हां, सही पढ़ा- 60,000. इनमें भारत में लगभग 23 हजार. यह आंकड़ा है बेरोजगार होने वालों का. माइक्रोसॉफ्ट से इतने ही कर्मचारियों की छंटनी होगी. यह डरावना आंकड़ा, माइक्रोसॉफ्ट के कुल कर्मचारी करीब 2,23,000 का 27 प्रतिशत है. यानी यह कंपनी 27 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी कर रहा है. 

 

कौन लोग हैं, जिनकी छंटनी हो रही है. वो जो डेटा सेंटर में, सेल्स में, मार्केटिंग में या साइबर सिक्योरिटी में काम कर रहे थे. दुनिया की सबसे मजबूत, बड़ी व दिग्गज कंपनी में. इस खबर के आने के बाद दुनिया सकते में है. पर, लोगों को यह नहीं पता कि यह तो महज शुरुआत है.

 

इस खबर के आने के तुरंत बाद मेरे सामने उस आईटी पेशेवर का चेहरा घूमने लगा, जिससे पिछले ही हफ्ते मुलाकात हुई. उसने जो बताया था, माइक्रोसॉफ्ट की घोषणा ने उसकी पुष्टि कर दी. उसने बताया था कि डेस्क व रिपोर्टिंग के काम में लगे 50-60 प्रतिशत की छंटनी करने के बाद भी आपके समाचार पोर्टल पर कोई असर नहीं पड़ेगा. एक बोट की मदद से डेस्क के दो-तीन लोग ही 150-200 खबरें लगा देंगे. तो क्या छंटनी की अगली खबर मीडिया क्षेत्र से आने वाली है? कब आयेगी, पता नहीं. पर आयेगी जरुर.

 

सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है, जो लोग माइक्रोसॉफ्ट से बाहर होंगे, वो जाएंगे कहां. भारत में काम करने वाले उन 23000 हजार युवाओं का भविष्य कौन तय करेगा. क्या हमारे देश या राज्य की सरकार के लिए यह कोई समस्या है भी या नहीं. शायद नहीं. क्योंकि न तो इस देश की सरकार के सामने कोई योजना है और न ही किसी राज्य की सरकार के पास. 

 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने दुनिया को बदल करके रख गया है. छोटी-बड़ी कंपनियों में जिन कामों को करने में एक व्यक्ति को लंबा वक्त लगता था, वही काम एआई की बोट मिनटों में कर दे रहा है. करोड़ों लोग बेरोजगार होने वाले हैं. उनके सामने विकल्प क्या होगा? शायद कुछ भी नहीं.

 

फिर बचेगा कौन? यह सवाल हर पेशे में काम करने वालों को समझने की जरुरत है. क्योंकि सरकार उनके लिए कुछ करने वाली है नहीं. इसलिए जरूरी है कि खुद के भीतर हुनर पैदा करिये. हुनर, पेशेगत विशेषज्ञता और काम के प्रति जुनून ही रक्षा कवच होगा. जिनके पास ये तीनों होंगे, वह टिकेगा, बाकी को बाहर होना होगा. माइक्रोसॉफ्ट में अलार्म बजा दी है, खतरे की घंटी बज चुकी है. अभी ही समय है, सतर्क हो जाने की.

 

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