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1 अगस्त से रांची में जमीन हो जायेगी महंगी, इन इलाकों में महंगा पड़ेगा आशियाना खरीदना

 
  • निबंधन शुल्क में अधिकतम 10 फीसदी की बढ़ोतरी की संभावना
    Vinit Abha Upadhyay
    Ranchi : राजधानी के शहरी इलाकों में 1 अगस्त से जमीन और मकान की रजिस्ट्री महंगी हो जाएगी, इससे संबंधित प्रस्ताव पर काम शुरू होने वाला है. पुख्ता जानकारी के मुताबिक, जिले के शहरी इलाकों में निबंधन शुल्क में अधिकतम 10 फीसदी की बढ़ोतरी होगी. जिन इलाकों में निबंधक शुल्क में बढ़ोतरी होनी है इसका सीधा असर रांची नगर निगम के अलावा बुंडू नगर पंचायत और आरआरडीए क्षेत्राधिकार एवं सेंसस टाउन के इलाकों की भूमि के मूल्य एवं रजिस्ट्री फीस पर पड़ेगा. रांची में जमीन की सबसे ज्यादा कीमत हिनू, एयरपोर्ट रोड, अरगोड़ा, लालपुर और वर्धमान कंपाउंड इलाके में होने की संभावना है.

    फिलहाल ये इलाके हैं सबसे महंगे

    • फिलहाल हिनू, मेन रोड और एजी कॉलोनी में आवासीय भूमि की सरकारी कीमत 9 लाख 3 हजार 764 रुपए प्रति डिसमिल है, जबकि व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए उपयोग होने वाली भूमि का रेट 21 लाख 6 हजार 934 रुपए प्रति डिसमिल है.
    • अपर बाजार और चौधरी बागान इलाके में आवासीय भूमि की सरकारी कीमत 8 लाख 6 हजार 462 रुपए प्रति डिसमिल है, जबकि व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए उपयोग होने वाली भूमि का रेट 19 लाख 35 हजार 80 रुपए प्रति डिसमिल है.
    • फिरायालाल चौक के आसपास, रेडियम रोड, श्रद्धानंद रोड और कचहरी चौक के आसपास के इलाके में आवासीय भूमि की सरकारी कीमत 7 लाख 33 हजार 264 रुपए प्रति डिसमिल है, जबकि व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए उपयोग होने वाली भूमि का रेट 17 लाख 59 हजार 834 रुपए प्रति डिसमिल है.
    • थड़पखना, सर्कुलर रोड और वर्धमान कंपाउंड इलाके में आवासीय भूमि की सरकारी कीमत 6 लाख 93 हजार 86 रुपए प्रति डिसमिल है, जबकि व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए उपयोग होने वाली भूमि का रेट 16 लाख 63 हजार 406 रुपए प्रति डिसमिल है.

    हर वर्ष होता है निबंधन शुल्क में वृद्धि का पुनरीक्षण

    बता दें कि भू-राजस्व एवं निबंधन विभाग के निर्देश पर हर वर्ष निबंधन शुल्क में वृद्धि का पुनरीक्षण होता है. शहरी क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्रों में हर दो वर्ष में जमीन और मकान के रेट में वृद्धि की जाती है. वर्ष 2021 में अंतिम बार शहरी इलाकों की भूमि, मकान एवं फ्लैट की कीमतों में 10% की वृद्धि की गई थी. जो 31 जुलाई 2023 तक लागू रहेगी. सरकार के नियम के मुताबिक हर 2 वर्ष पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में जमीन की सरकारी दर बढ़ाई जाती है. जिसका सीधा असर रजिस्ट्री में लगने वाले कोर्ट और स्टांप फीस पर पड़ता है.
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