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पेड़ कटवाने से जमीन घोटाले तक छवि की ''छवि'' पर लगते रहे हैं दाग

  •  विवादों से गहरा नाता रहा है आईएएस छवि रंजन का
Vinit Upadhyay/ Saurav Singh Ranchi : आईएएस छवि रंजन का करियर की शुरुआत से ही विवादों से नाता रहा है. कभी नियम-कानून को ताक पर रख कर पेड़ कटवाने को लेकर चर्चा में आए, तो कभी जमीन को लेकर. एक साथ बड़े भूखंड की एकमुश्त 80 साल की रसीद कटवाने, पुलिस जवानों को तैनात कर बाउंड्रीवाल कराने को लेकर विवादों में घिरे रहे. आइए जानते हैं कि कब-कब और किन-किन मामलों को लेकर छवि रंजन की छवि पर दाग लगते रहे, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया. 1. कोडरमा में डीसी थे तो मरकच्चो में आईबी में लगे शीशम के पेड़ कटवा कर अपने घर मंगवा लिये. मामला एसीबी के पास है. एसीबी ने प्रारंभिक जांच में पेड़ कटवाने के मामले की पुष्टि करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराने की अनुमति मांगी थी, लेकिन मामला लंबित है. 2. रांची में डीसी रहते हुए 7 एकड़ जमीन का 83 साल का लगान रसीद एक ही दिन काटने का आदेश दे दिया. यह जमीन रांची शहर से करीब 5 किमी दूर हेहल अंचल की है. जमीन बजरा मौजा में स्थित है. जमीन का कुल रकबा 7 एकड़ है और खाता नंबर- 140 है. 3. बजरा मौजा की खाता नंबर- 140 की 7 एकड़ जमीन की बाउंड्री कराने के लिए पुलिस के जवानों को तैनात किया. जिसका भारी विरोध हुआ था. रजिस्ट्री होने के लगभग एक वर्ष बाद यह खुलासा हुआ है कि खाता 140 की जिस चर्चित भूमि का लगान निर्धारित किए बिना रसीद निर्गत हुई है, उसका मूल दस्तावेज ही रिकॉर्ड रूम में नहीं है. बाद में हाईकोर्ट ने रांची डीसी के आदेश को रद्द कर दिया था. 4. रांची डीसी रहते हुए छवि रंजन ने हेहल अंचल के बाजरा मौजा की खाता नंबर 119 की कुल लगभग 100 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री का आदेश दे दिया. मामले को लेकर विवाद हुआ, तो सरकार के स्तर पर एसआईटी तक का गठन किया गया था. एसआईटी ने जांच की, लेकिन रिपोर्ट ही गायब हो गयी. मामले को लेकर एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया गया, लेकिन तब तक रिपोर्ट मिल गयी. 5. आर्म्स लाइसेंस देने के लिए भी पैसों के लेनदेन का आरोप लगा था. लेकिन आरोप लगाने वाला व्यक्ति लिखित शिकायत देने के बाद पीछे हट गया. 6. सेना के कब्जे वाली बरियातू रोड की करीब 4 एकड़ 55 डिसमिल जमीन (एमएस प्लाट संख्या 557) की खरीद-बिक्री में डीसी रहते हुए उनकी भूमिका सवालों के घेरे में है. यह भूमि सेना के कब्जे में है. करीब 90 साल से सेना का कब्जा होने के बाद अचानक वर्ष 2021 में प्रदीप बागची ने जमीन पर मालिकाना हक बताते हुए जगतबंधु टी एस्टेट के निदेशक दिलीप कुमार घोष को जमीन बेच दी. तत्कालीन अवर निबंधक घासीराम पिंगुआ ने रजिस्टर्ड डीड में नोट लिखा कि उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी को संबोधित अंचल अधिकारी बड़गाईं के पत्र ज्ञापांक (25/9/2021) के अलोक में निबंधन किया गया. 7. डीसी रहते हुए छवि रंजन ने रांची के ओरमांझी में आदिवासी की 8 एकड़ जमीन पर वाटर पार्क विकसित करने की अनुमति ग्रीन वैली सीज रिसॉर्ट कंपनी को दी. ग्रीन वैली सीज रिसोर्ट कंपनी के मालिक संजय कुमार चौधरी और नवीन कुमार हैं. संजय पटना के निवासी हैं और नवीन मुंगेर के. जमीन आदिवासी की है. यानी सीएनटी एक्ट के प्रावधानों के तहत ही इसकी खरीद-बिक्री हो सकती है. वाटर पार्क के लिए रैयत को जमीन बेचने का आदेश डीसी रहते हुए छवि रंजन ने दिया. आदिवासी की जमीन की खरीद-बिक्री का आदेश देकर सीएनटी एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन किया है. इसे भी पढ़ें – जेबीवीएनएल">https://lagatar.in/public-hearing-on-electricity-tariff-of-jbvnl-completed-commission-will-take-final-decision/">जेबीवीएनएल

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