Ranchi: JPSC-JSSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब सिर्फ धरना-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गया है. पिछले कुछ दिनों में आंदोलन की रणनीति तेजी से बदली है. पहले सड़क पर प्रदर्शन हुआ, फिर विधानसभा घेराव का ऐलान किया गया और अब राष्ट्रीय नेताओं तक अपनी बात पहुंचाकर सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है.
आंदोलन की शुरुआत परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शी जांच की मांग के साथ हुई थी. छात्र लगातार सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करते रहे. समय बीतने के साथ आंदोलन और तेज हुआ और छात्रों ने विधानसभा घेराव का कार्यक्रम घोषित कर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया.
आंदोलनकारी छात्रों की ओर से विधानसभा घेराव का ऐलान किए जाने के बीच, विधानसभा सत्र को देखते हुए सरकार ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से 12 अगस्त तक विधानसभा परिसर के 700 मीटर के दायरे में BNSS की धारा 163 लागू कर दी है. इसके तहत इस छेत्र मे धरना-प्रदर्शन, रैली, जुलूस और अन्य सार्वजनिक गतिविधियों पर रोक रहेगी.
इसी बीच आंदोलन ने नया राजनीतिक मोड़ लिया. गुरुवार को आंदोलनकारी छात्रों और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने फोन पर बातचीत की. छात्रों ने उन्हें परीक्षा में कथित अनियमितताओं, परीक्षा माफिया और अपनी मांगों की जानकारी दी. साथ ही कहा कि कांग्रेस झारखंड की गठबंधन सरकार का हिस्सा है, इसलिए पार्टी को इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट रुख सामने लाना चाहिए.
छात्रों के मुताबिक राहुल गांधी ने उनकी बात गंभीरता से सुनी और सभी मांगों को व्हाट्सएप पर भेजने के लिए कहा. उन्होंने सरकार से इस मामले में बात करने और हरसंभव सहयोग का भरोसा भी दिया. इसके बाद आंदोलन को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है.
दूसरी ओर छात्रों ने सरकार से बातचीत के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन कर दिया है. छात्र नेताओं का कहना है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं और सरकार की ओर से औपचारिक पहल का इंतजार कर रहे हैं.
पूरे घटनाक्रम को देखें तो आंदोलन अब तीन स्तरों पर आगे बढ़ता नजर आ रहा है. पहला, सड़क पर प्रदर्शन के जरिए जनदबाव. दूसरा, सरकार के साथ बातचीत की तैयारी. और तीसरा, राष्ट्रीय नेताओं के जरिए राजनीतिक दबाव बनाना. वहीं सरकार भी एक ओर कानून-व्यवस्था को लेकर सख्ती दिखा रही है और दूसरी ओर छात्रों के साथ संवाद की संभावना बनी हुई है.
यानी JPSC-JSSC आंदोलन अब केवल भर्ती परीक्षा का विवाद नहीं रह गया है. यह राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. अब सभी की नजर सरकार और छात्रों के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी है. माना जा रहा है कि यह बातचीत आंदोलन की आगे की दिशा तय करने में अहम साबित हो सकती है. यदि वार्ता सकारात्मक रहती है तो समाधान का रास्ता निकल सकता है, वहीं सहमति नहीं बनी तोह छात्र अपनी अगली रणनीति के साथ आगे बढ़ सकते हैं.
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