alt="" width="1200" height="1599" /> इंटरनेशनल वॉलीबॉल कोच राजेश कुमार सिंह शुभम संदेश से खास बातचीत करते हुए[/caption] आपको बता दें कि पिछले 23 साल में पहली बार झारखंड की टीम राष्ट्रीय प्रतियोगिता के क्वार्टर फाइनल में खेली है. इस प्रतियोगिता का आयोजन गुवाहाटी में हुआ. टीम में सेंट्रल और रेलवे से प्लेयर ज्यादा हैं. खिलाड़ियों को निखारने के लिए ज्यादा आयोजन कराने की आवश्यकता है, और खिलाड़ियों को नौकरी मुहैया कराने की भी जरूरत है. इसे भी पढ़ें-सुप्रीम">https://lagatar.in/supreme-court-rejected-the-petition-to-ban-bbc-said-this-is-a-completely-false-idea/">सुप्रीम
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1964 में ओलंपिक में शामिल हुआ
आज से 128 साल पहले जब मोरगन साहब ने बास्केटबॉल से अलग वॉलीबॉल लाया था, तो इस गेम की ओर सबका ध्यान गया. क्योंकि बास्केटबॉल सब लोग नहीं खेल सकते थे. 1964 में इसे ओलंपिक में भी शामिल किया गया. इसके बाद इस खेल की लोकप्रियता बढ़ती गई. बाद में बीच वॉलीबॉल भी सामने आया. जिससे इस खेल की लोकप्रियता और ज्यादा बढ़ी. झारखंड की बात करें तो 2010 तक झारखंड महिला टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही थी, उस दौर में रांची में साई का एक सेंटर हुआ करता था. बाद में यह सेंटर बंद हो गया. फिर महिलाओं के लिए और कोई वैक्ल्पिक व्यवस्था नहीं बची. जिससे महिलाएं वॉलीबॉल से दूर होने लगी. पुरूष टीम की बात करें तो उनका भी मिला-जुला प्रदर्शन देखने को मिला है. इन दिनों वॉलीबॉल से बहुत कम खिलाड़ी जुड़ते नजर आते हैं. सवाल पर राजेश सिंह ने कहा कि किसी भी खेल को खेलने के लिए खिलाड़ियों में प्रेरण और सुरक्षा की आवश्यकता होती है. यहां खिलाड़ी सब जूनियर स्तर तक खेलते हैं. फिर ड्रॉप आउट हो जाते हैं. वजह यह है कि खिलाड़ियों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है. इसे भी पढ़ें-ध्वनि">https://lagatar.in/hc-strict-on-noise-pollution-ban-on-loudspeaker-after-10-pm-instructions-to-ranchi-dc-ssp-and-municipal-commissioner/">ध्वनिप्रदूषण पर HC सख्त, रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर पर लगाएं रोक, रांची डीसी,SSP और नगर आयुक्त को निर्देश

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