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गालूडीह : परवल की खेती कर सफल किसान बने सुखदेव महाराज

Galudih (Prakash Das) : आज कृषि रोजगार का एक सशक्त माध्यम बनता जा रहा है. यही कारण है कि लोग इस पेशे में आ रहे हैं और अच्छी आमदनी भी प्राप्त कर रहे हैं. इसके अलावा वे खुद से नए खोज भी कर रहे हैं. झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत घाटशिला प्रखंड के बड़ाखुर्शी पंचायत अंतर्गत शालबनी गांव के एक ऐसे ही सफल किसान हैं सुखदेव महाराज, जो खेती के जरिए सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं. सुखदेव खुद तो अच्छी खेती करते ही हैं, लेकिन साथ में अपने गांव के आस-पास व दूर दराज के किसानों को उन्नत तकनीक से खेती करने की जानकारी भी देते हैं. सुखदेव महाराज किसान के साथ-साथ एक सक्रिय समाजसेवी भी है. इसे भी पढ़े : गढ़वा">https://lagatar.in/garhwa-5-people-of-same-family-injured-in-bike-accident-hospitalized/">गढ़वा

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वर्ष 2000 में हुई थी आश्रम की स्थापना

सुखदेव महाराज ने बताया कि वर्ष 2000 में महामिलन सेवाश्रम संघ की शालबनी गांव में स्थापना हुई. आश्रम की स्थापना ग्रामीण क्षेत्र में रह रहे कमजोर वर्ग के परिवारों को नि:स्वार्थ भाव से सेवा देने के लिए की गई थी. गरीब असहाय वंचित परिवारों को स्वास्थ्य शिक्षा व कृषि हुनर को सिखाकर स्वावलंबी बनाना आश्रम का उद्देश्य है. आश्रम लगातार असहाय व गरीबों को सेवा दे रहा है. इसे भी पढ़े : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-even-after-spending-crores-of-rupees-by-the-government-the-forest-dwellers-of-saranda-are-getting-zero-benefit/">किरीबुरु

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परवल की खेती में किसानों को कर रहे मदद

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alt="" width="600" height="282" /> सुखदेव महाराज कई वर्षों से परवल (पटल) की खेती कर अच्छी खासी आमदनी कर रहे हैं. साथ ही वे इन पैसों को कई गरीब व अनाथ बच्चों के शिक्षा और भरण पोषण के लिए खर्च भी करते हैं. वे बताते हैं कि उन्होंने परवल की खेती के लिए हजारों किसानों को प्रशिक्षण दिया है और अभी भी कई किसान भाई प्रशिक्षण के लिए आश्रम आते हैं. इससे किसानों को अच्छा मुनाफा भी हो रहा है. उन्होंने बताया कि आश्रम के स्थापना के बाद विद्यार्थियों और ग्रामीणों के सहयोग से करीब 5.50 बीघा जमीन में धान और सब्जियों की खेती आश्रम में शुरू की गई थी. अभी तीन एकड़ जमीन में खेती होती है. विशेष कर परवल की खेती की ज्यादा की जाती है. इसे भी पढ़े : किरीबुरु">https://lagatar.in/kiriburu-on-july-20-the-gram-sabha-will-conduct-malaria-awareness-campaign/">किरीबुरु

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डेढ़ लाख का होता है मुनाफा

उन्होंने बताया कि इन खेती में लागत लगभग 30 हजार रुपये आती है, जिसमें डेढ़ लाख का मुनाफा होता है. हर हफ्ते में करीब तीन क्विंटल परवल तोड़ा जाता है. यहां के परवल की मांग बहुत है. परवल की खेती के लिए बाहर के भी किसानों को प्रशिक्षण देकर उन्हें चारा भी उपलब्ध कराया जाता है. हर साल झारखंड के विभिन्न जिलों से 150 से अधिक किसान बंधु प्रशिक्षण लेने आश्रम आते हैं. इसे भी पढ़े : कोयला">https://lagatar.in/dhanbad-police-arrested-the-manager-rai-who-blackmailed-the-coal-trader/">कोयला

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