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मंत्री के भाई-भतीजे की हत्या के बाद चर्चा में आया था गौतम पासवान

Sanjit Yadav / Shiv Shankar Paswan Palamu :  लावालौंग थाना क्षेत्र के नौडीहा जंगल में पिछले दिनों पुलिस माओवादी मुठभेड़ में टॉप पांच नक्सलियों के ढेर होने के बाद से क्षेत्र से नक्सलियों की कमर पूरी तरह से टूट गई है. साथ ही पलामू से माओवादियों का जनाधार भी धीरे-धीरे खिसकने लगा है. पहले नक्सली कोयला खदानों और पत्थर माइंस से मोटी रकम लेवी के रूप में वसूलते थे. मगर हाल के दिनों में पुलिस द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियान से नक्सली बैकफुट पर आ गए हैं. लेवी की रकम मिलनी बहुत कम हो गई है. इससे नक्सली संगठन कमजोर हो रहा है. साथ ही पिछले 10 साल में कई टॉप नक्सली मारे गए हैं, कुछ ने पुलिस के डर से सरेंडर कर दिया. बता दें कि 1990 के दशक में पलामू में नक्सलियों का खौफ था. आए दिन नक्सली वारदात को अंजाम देते थे, जिससे इलाके के लोगों में दहशत का माहौल था. नक्सली हिंसा में पूर्व मंत्री के भाई-भतीजे ने भी जान गंवाई. उस वक्त नक्सलियों का खौफ और वर्चस्व चरम पर था. करीब 36 साल पहले कौलेशवरी जोन में अपना वर्चस्व कायम करने वाला हार्डकोर नक्सली गौतम पासवान पिछले दिनों पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गया. इस मुठभेड़ में गौतम के अलावे 4 और हार्डकोर मारे गए थे. गौतम के मारे जाने के बाद नक्सलियों का खूंटा पलामू में कमजोर हुआ है.

1987 में कौलेश्वरी जोन में नक्सलियों की बढ़ी थी सक्रियता

बता दें कि 1987 में हार्ड कोर नक्सली गौतम पासवान के नेतृत्व में नक्सलियों का दस्ता कौलेश्वरी जोन के चतरा, पलामू के जंगलों में पांव पसारना शुरू किया था. 1989 में पांकी के चर्चित हस्ती गुप्तेश्वर सिंह की हत्या नक्सलियों ने कर दी थी. उसके बाद नक्सलियों ने मनातू थाना पुलिस पिकेट पर हमला किया था. इन घटनाओं के बाद इलाके में नक्सलियों का वर्चस्व कायम हो गया था.लोग भयभीत थे. नक्सलवाद से प्रभावित कई गांवों के लोग 1990 में पलायन करने को विवश हो गए थे.

1996 में पांकी ब्लॉक को उड़ाया

नक्सलियों का मनोबल इतना बढ़ा हुआ था कि लगातार वारदात को अंजाम दे रहे थे. 1996 में नक्सलियों ने लैंडमाइंस विस्फोट कर पांकी ब्लॉक व आवास को उड़ा दिया था. इस घटना में कई महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज जलकर राख हो गये थे. नक्सलियों के भय से पांकी थाना के समीप पांकी ब्लॉक को शिफ्ट कर दिया गया था. ब्लॉक के कर्मी भी दहशत में थे. पांकी में विकास कार्य नक्सलियों के डर से ठप पड़ गया था. हालांकि पांकी-बालूमाथ मुख्य पथ स्थित ताल गांव में पुलिस पिकेट बनने के बाद नक्सलियों का विचरण अब धीरे-धीरे कम हो रहा है.

पूर्व मंत्री के भाई-भतीजा की बेरहमी से कर दी थी हत्या

नक्सली हिंसा 90 के दशक से लेकर 2000 के आसपास तक चरम पर था. मंत्री और विधायकों के परिवार भी सुरक्षित नहीं थे. पूर्व मंत्री दिवंगत मधु सिंह के भाई अमरनाथ सिंह को 20 जून 1999 को एमसीसी संगठन ने निर्मम हत्या कर दी थी. वहीं पूर्व मंत्री दिवंगत संकटेश्वर सिंह के दो भतीजे की निर्मम हत्या पीपुल्स वार ने कर दी थी. लोगों का कहना था कि राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई में दोनों मंत्रियों के परिजनों को जान गंवानी पड़ी. उस समय माओवादी और पीपुल्स वार के नाम से दो संगठन सक्रिय थे. दोनों में वर्चस्व को लेकर संघर्ष भी होता रहता था. दो मंत्रियों के भाई-भतीजे की हत्या से क्षेत्र केद लोगों में दहशत का माहौल कायम हो गया. इसी घटना के बाद गौतम की पहचान एक दुर्दांत नक्सली के रूप में हो गई. उसके नाम से लोग डरने लगे. नक्सलियों ने ग्रामीणों के दिलों में पहले पैठ बनाई. जमींदारों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की. गरीबों के हड़पे जमीन को मुक्त कराकर शोषितों के दिल में पैठ बनाई. लेकिन समय के साथ नक्सली अपने उद्देश्य से भटक गए. लेवी वसूली इनका मुख्य काम हो गया. लेवी की लड़ाई में संगठन टूटने लगा. अलग-अलग कई संगठन बन गए. आपसी वर्चस्व में संगठन कमजोर होता चला गया. लोग पुलिस की मुखबीरी करने लगे. अब पुलिस की बढ़ती सक्रियता ने नक्सलवाद की जड़ें कमजोर होती जा रही है. [wpse_comments_template]

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