- रांची में 450 स्ट्रीट फूड वेंडर्स को प्रशिक्षण दिलाया गया
- कुल 2.25 लाख रुपये का भुगतान करना था
- 1.5 साल बीतने के बाद भी प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं
हर फूड वेंडर के खाते में 500 रुपये जमा करना था
प्रशिक्षण के साथ ही हर फूड वेंडर के खाते में 500 रुपये समेकित प्रोत्साहन राशि (प्रति सफल प्रशिक्षण की दर से) हस्तांतरित करनी थी. रांची में कुल 450 स्ट्रीट फूड वेंडर्स को प्रशिक्षण दिलाया गया. प्रशिक्षित वेंडर को 500 रुपये के हिसाब से कुल 2.25 लाख रुपये का भुगतान करना था. लेकिन नवंबर 2021 में प्रशिक्षण पूरा करने के 1.5 साल से अधिक बीतने के बावजूद अबतक वेंडर्स को प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं किया जा सका है. यानी फूड वेंडर्स को प्रशिक्षण देने के बाद प्रोत्साहन राशि देना ही भूल गया निदेशालय.नियम के विरुद्ध ट्रेनिंग
अगर आप मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स के वेबसाइट पर जाएंगे, तो उसके कंपोनेंट और गाइडलाइन के डे एनयूएलएम सेक्सन के 4.18 पॉइंट में आपको दिखेगा कि एक दिन के ट्रेनिंग कोर्स में 750 रुपये खर्च करने हैं. दो दिन के प्रशिक्षण पर 1500 रुपये खर्च होगा. अगर 1500 रुपये एजेंसी को ही दो दिया गया, तो विक्रेताओं को पैसा कहां से दिया जाएगा, इस पर ध्यान ही नही दिया गया. इसके साथ इस ट्रेनिंग का खर्च दो दिन का 2000 हजार रुपये रखा गया था. फिर भी वेंडर्स को पैसा अबतक नहीं मिला.क्या कहना है फूड वेंडर्स का
प्रशिक्षण प्राप्त किए हुए वेंडर्स का कहना है कि ट्रेनिंग के दौरान उन्हें हैट, एप्रान सहित कुछ अन्य चीजें दी गयी थीं. साथ ही उनसे बैंक डिटेल्स, एकाउंट नंबर, आधार, पासबुक की फोटोकॉपी भी मांगी गयी थी. बताया गया था कि सभी के खाते में 500 रुपये की प्रोत्साहन राशि भेज दी जाएगी. लेकिन डेढ़ साल बाद भी उनके खाते में एक रुपया भी नहीं डाला गया. विभाग ट्रेनिंग देकर प्रोत्साहन राशि देना भूल गया या लगता है उनके हिस्से की रकम एजेंसी व विभाग के अफसरों ने मिल कर पचा ली. मुन्नी देवी- दो दिन अपनी दुकान बंद कर प्रशिक्षण लेने गयी थीं. प्रशिक्षण करने पर सर्टिफिकेट और एक किट भी दिया गया. लेकिन अबतक पैसा-वैसा कुछ नहीं मिला रूबी देवी- ट्रेनिंग तो कर ली, लेकिन पैसे नहीं मिले. ट्रेनिंग के वक्त कहा गया था कि बैंक खाते में पैसे डाल दिए जाएंगे,लेकिन कुछ नहीं मिला. अब अपना नुकसान कर हम नहीं जाएंगे प्रशिक्षण लेने. सब गरीबों को ही लूटता है. सतन देवी- सतन देवी का कहना है कि दुकान छोड कर निगम के कहने पर हम प्रशिक्षण लेने गए थे. लेकिन पैसे नहीं मिले. हमने तो उम्मीद ही छोड़ दी है, सब लोग मिलकर गरीबों का ही हक छीनते हैं. रेखा देवी- प्रशिक्षण के वक्त तो लोग बड़ी-बड़ी बाते करते हैं. लेकिन वास्तव में कोई हमारी मदद नहीं करता है. 2 साल पहले पैसे देने की बात बोले थे, लेकिन भूल गए. गरीबों की कौन मदद करेगा. दिलीप कुमार- दो दिन ट्रेनिंग करने गए थे. खाना, किट सब मिला. बस 500 रुपये खाते में आया ही नहीं. लगता है सब मिल कर पचा गया.किसी के पास कोई जवाब नहीं
रांची नगर निगम के अधिकारियों से पूछताछ करने पर बताया गया कि ट्रेनिंग देने का काम निदेशालय के द्वारा किया गया, हमें बस प्रशिक्षण के लिए वेंडर्स काे इकट्ठा करने टारगेट दिया गया था. प्रशिक्षण के संबंध में हमारे पास कोई जानकारी नहीं है. निदेशालय से पूछे जाने पर बताया गया कि डायरेक्टर अभी नहीं हैं. अन्य कर्मचारी से पूछे जाने पर किसी भी प्रकार की कोई जानकारी नहीं दी गयी. यह पता नहीं चल रहा कि फूड वेंडर्स के हक का पैसा गया कहां? इसे भी पढ़ें – कर्नाटक">https://lagatar.in/karnataka-dgp-praveen-sood-will-be-the-new-cbi-director/">कर्नाटकके DGP प्रवीण सूद होंगे CBI के नये डायरेक्टर [wpse_comments_template]

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