Gawan (Giridih) : खुदा से प्रेम और इबादत के लिए कोई उम्र नहीं होती. माह--रमजान में रोजा रखकर खुदा की इबादत करने में बच्चे भी पीछे नहीं हैं. गांवा में बड़ी संख्या में बच्चे भी बरकत के इस महीने में शिद्दत से इबादत कर रहे हैं. जीवन में पहली बार रोजा रख रहे बच्चों का उत्साह शबाब पर है. [caption id="attachment_596287" align="alignnone" width="300"]
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alt="" width="300" height="225" /> ज़ोहरा परवीन, रोजेदार[/caption] 10 वर्षीय मुस्कान, 11 वर्षीय ज़ोहरा परवीन, 10 साल की ज़ीनत परवीन और 7 साल के मुर्तज़ा आलम ने बताया कि घर में बड़ों को रोजा रखते देखकर उन्हें भी रोजा रखने की इच्छा होती थी. शुरू में उन्हें लगता था कि दिन भर वे कैसे बिना खाए-पीये रह सकते हैं. पर जब से उन्होंने रोजा रखना शुरू किया, उन्हें भूख का बिल्कुल अहसास नहीं होता. वे स्कूल जाते हैं. स्कूल में दूसरे बच्चों को लंच करते देखकर भी उन्हें भूख महसूस नहीं होती. यह अल्लाह का करम है. [caption id="attachment_596288" align="alignnone" width="300"]
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alt="" width="300" height="225" /> ज़ीनत परवीन, रोजेदार[/caption] 10 साल की ज़ीनत परवीन ने बताया कि पहली बार जब रोजा रखा था. तब से उसे काफी खुशी महसूस हो रही है. 11 वर्षीय ज़ोहरा परवीन ने बताया कि कि वह पिछले कई वर्षों से रोजा रख रही है. रोजा रखने से मन एकाग्र रहता है. साथ ही अल्लाह की इबादत का अलग से सुकून मिलता है. वह रमजान में पूरा रोजा रखने की बात कह रही है. बच्चों के घर वाले भी बच्चों के उत्साह को देखकर काफी खुश हैं. [caption id="attachment_596289" align="alignnone" width="300"]
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alt="" width="300" height="225" /> मुर्तज़ा आलम, रोजेदार[/caption]
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alt="" width="300" height="225" /> ज़ोहरा परवीन, रोजेदार[/caption] 10 वर्षीय मुस्कान, 11 वर्षीय ज़ोहरा परवीन, 10 साल की ज़ीनत परवीन और 7 साल के मुर्तज़ा आलम ने बताया कि घर में बड़ों को रोजा रखते देखकर उन्हें भी रोजा रखने की इच्छा होती थी. शुरू में उन्हें लगता था कि दिन भर वे कैसे बिना खाए-पीये रह सकते हैं. पर जब से उन्होंने रोजा रखना शुरू किया, उन्हें भूख का बिल्कुल अहसास नहीं होता. वे स्कूल जाते हैं. स्कूल में दूसरे बच्चों को लंच करते देखकर भी उन्हें भूख महसूस नहीं होती. यह अल्लाह का करम है. [caption id="attachment_596288" align="alignnone" width="300"]
alt="" width="300" height="225" /> ज़ीनत परवीन, रोजेदार[/caption] 10 साल की ज़ीनत परवीन ने बताया कि पहली बार जब रोजा रखा था. तब से उसे काफी खुशी महसूस हो रही है. 11 वर्षीय ज़ोहरा परवीन ने बताया कि कि वह पिछले कई वर्षों से रोजा रख रही है. रोजा रखने से मन एकाग्र रहता है. साथ ही अल्लाह की इबादत का अलग से सुकून मिलता है. वह रमजान में पूरा रोजा रखने की बात कह रही है. बच्चों के घर वाले भी बच्चों के उत्साह को देखकर काफी खुश हैं. [caption id="attachment_596289" align="alignnone" width="300"]
alt="" width="300" height="225" /> मुर्तज़ा आलम, रोजेदार[/caption]
ईद और ईदी का इंतजार
रोजा रखने वाले बच्चे भी बेसब्री से ईद का इंतजार कर रहे हैं. 7 साल के मुर्तज़ा आलम ने बताया कि हर साल ईद में उन्हें घर में बड़े लोग ईदी देते हैं. जिससे उन्हें बहुत खुशी मिलती है. ईद में नए कपड़े पहनना व सेवइयां खाना उन्हें खूब भाता है. जिसके लिए उन्हें हर साल इस त्योहार का इंतजार रहता है. यह">https://lagatar.in/giridih-giridihs-kavya-singh-won-bronze-in-national-taekwondo-competition/">यहभी पढ़ें : गिरिडीह : राष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में गिरिडीह की काव्या सिंह ने जीता कांस्य [wpse_comments_template]
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