मशीन खरीद के तरीके को लेकर उठ रहे सवाल
- 5 करोड़ 33 लाख में खरीदी गयी जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन बिना टेंडर क्यों खरीद ली गयी.
- मशीन खरीद का आधार विभागीय संकल्प को बनाया गया. जबकि इस पर रोक लगाने संबधी पत्र मुख्य सचिव के कार्यालय से नवंबर 2021 में जारी हुआ था.
- स्वास्थ्य विभाग में खरीदारी के लिये झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (JMHIDPCL) कार्य कर रहा है. आखिर मशीन की खरीदारी के लिए रिक्वेट JMHIDPCL क्यों नहीं भेजा गया.
- कोरोना की तीसरी लहर थम जाने के बाद मशीन खरीदारी में इतनी हड़बड़ी क्यों की गयी.
- इस जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन से राज्य में जांच शुरू नहीं की गयी है. तब किसको लाभ पहुंचाने के मकसद से इस मशीन की खरीदारी की गयी.
- आखिर क्या वजह है कि पिछले 6 माह में स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेवार पद के वरीय अधिकारियों जिसमें 9 के करीब IAS अधिकारियों का तबादला कर दिया गया. जिसमें मिशन निदेशक से लेकर JMHIDPCL के एमडी सहित निदेशक फाइनेंस भी शामिल हैं. लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने राज्य के मुख्य सचिव के निर्देश की अवहेलना करने के बाद भी अपने पद पर कैसे बने हुए हैं.
जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन पेमेंट का पेंच
जानकारी के आनुसार, जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन की खरीद के पेमेंट का मामला राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड के निदेशक के टेबल पर फंसा हुआ है. मिशन के कोई भी वरीय आधिकारी, यहां तक कि मिशन निदेशक भी भुगतान प्रक्रिया निष्पादन में रुचि नहीं ले रहे हैं. वजह यह बताई जा रही है कि नियमों को ताक में रखकर मशीन की खरीदारी की गयी है. वहीं दूसरी ओर विभाग के वरीय पद पर बैठे आला अधिकारी भुगतान का दबाव बना रहे हैं. राज्य के मुख्य सचिव के पत्र को दरकिनार करते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन की खरीदारी की है. इसे भी पढ़ें- बीजेपी">https://lagatar.in/bjp-announces-candidates-for-rajya-sabha-elections-see-who-will-contest/">बीजेपीने किया राज्यसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों का ऐलान, देखिए कौन-कौन लड़ेंगे चुनाव
ऐसा दबाव कि बदल दिये गये निदेशक फाइनेंस
प्राप्त सूचना के अनुसार, निदेशक फाइनेंस के द्वारा 31 मार्च 2022 तक मशीन का पेंमेंट नहीं करने पर एक अप्रैल को उनका तबादला कर दिया गया. पूरा मामला पेंचीदा होता जा रहा है. जिसमें यह भी कहा जा रहा है अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रखकर इस मशीन की खरीदारी की गयी. कहा तो यह भी जा रहा है कि जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर खरीदी गयी है.नियम विरूद्ध कार्य पर सवाल तो उठेंगे ही
कोरोना काल काल में स्वास्थ्य विभाग झारखंड सरकार ने कई बेहतर कार्य किए. जिसके लिए राज्य की जनता आभारी है. लेकिन जिन कामों को नियम विरुद्ध किया गया उस पर सवाल खड़े होने ही चाहिये.मुख्य सचिव ने लिखा था स्वास्थ्य सचिव को पत्र
मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य विभाग झारखंड सरकार को 12 नवंबर 2021 को पत्र भेजा गया था. जिसमें लिखा था कि स्वास्थ्य विभाग के संकल्प संख्या 107 (एचएचएम) 31 मार्च 2020 का पत्र आपके अवलोकनार्थ संलग्न है, कोरोना महामारी के दौरान आवश्यक दवाइयों, उपकरणों और अन्य सामग्री के क्रम में सामान्य प्रक्रिया के तहत होने वाले विलंब को कम करने के लिए एक संकल्प लाया गया था. जिसे मंत्री परिषद के अनुमोदन से वित्तीय नियमावली के नियम 235 के तहत 1 लाख 50 हजार से ऊपर की सामग्री की निविदा के माध्यम से क्रय करने का प्रावधान है, को शिथिल किया गया था. यह शिथिलीकरण कितनी अवधि के लिए होगा. इसका उल्लेख इस संकल्प में नहीं था. इसे भी पढ़ें- बिहार">https://lagatar.in/jharkhand-jdu-state-president-khiru-mahto-will-go-to-rajya-sabha-via-bihar-party-announced-the-name/">बिहारके रास्ते राज्यसभा जाएंगे झारखंड जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष खीरु महतो, पार्टी ने की नाम की घोषणा आगे लिखा गया कि वित्तीय नियमों का शिथिलीकरण अनिश्चित अवधि के लिए नहीं किया जा सकता है. वैसे भी कोरोना महामारी की स्थिति में काफी सुधार हुई है. वर्तमान में वित्तीय नियमों का पालन करते हुए दवाइयों, सामग्री और उपकरणों की खरीद करना संभव है. अत: अनुरोध है कि इस संकल्प को निरस्त करने का प्रस्ताव यथाशीघ्र मंत्री परिषद के समक्ष लाया जाए. साथ ही अगले आदेश तक इस संकल्प के कार्यान्वयन पर रोक लगायी जाये. [wpse_comments_template]

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