Ranchi: प्रधानमंत्री">https://lagatar.in/pmay-u-after-the-increased-cost-of-building-materials-one-and-a-half-to-2-lakhs-are-being-spent-from-the-pockets-of-the-beneficiaries-to-build-the-house/">प्रधानमंत्री
आवास योजना से झारखंड में बन रहे 2591 आवासों का जियो टैग नहीं हुआ है. जिसके कारण लाभुकों को किस्त की राशि नहीं मिल पा रही है. जियो टैग से फोटो लेने के बाद जीरो से दो दिन, दो से 4 दिन और 5 दिन से आगे तक जियो टैग का सत्यापन किया जाता है. जिसके बाद लाभुकों को किस्त की राशि खाते में ट्रांसफर की जाती है. झारखंड के 24 जिलों में जियो टैग सत्यापन की समस्या चल रही है. जिसका खामियाजा लाभुक भुगत रहे हैं. रांची डीडीसी कार्यालय से पता चला कि जियो टैग फोटो का सत्यापन प्रखंड कार्यालय द्वारा किया जाता है, जो प्रतिदिन करना है. बता दें कि स्वीकृति होने के बाद लाभुक के पुराने घर और जमीन की जियो टैग की जाती है. उसके बाद जैसे-जैसे घर बनता जाता है, उसकी जियो टैग की जाती है. जिससे आवास की सटीक जानकारी प्रखंड कार्यालय से लेकर विभाग तक को मिलती है. 7 जिले रेड जोन में पलामू, गिरिडीह, गढ़वा, देवघर, धनबाद, दुमका और बोकारो की स्थिति और खराब है. इन 7 जिलों को रेड जोन में शामिल किया गया है. सोमवार को विभाग द्वारा जारी डेटा के अनुसार पलामू में 690, गिरिडीह में 486, गढ़वा में 205, धनबाद में 136, देवघर में 128, दुमका में 115 और बोकारो में 105 जियो टैग नहीं हुआ है. जियो टैग नहीं होने के कारण आवास निर्माण की गति कम हो गई है. जिओ टैग के लिए प्रखंड स्तर पर टीम बनाई गई है और पंचायतों में स्वयंसेवक भी इस कार्य को करते हैं, उसके बावजूद भी 7 जिले रेड जोन में है. इसे भी पढ़ें : सीतामढ़ी">https://lagatar.in/sitamarhi-two-chinese-nationals-arrested-several-items-including-seven-mobiles-recovered/">सीतामढ़ी
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पीएम आवास योजना के 2591 निर्माणाधीन आवासों का नहीं हो रहा जियो टैग सत्यापन

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