Ranchi: गेतलसूद डैम के बढ़े हुए मुआवजे के भुगतान के मामले में रांची जिला प्रशासन, जल संसाधन और पेयजल विभाग के बीच नौ साल से पत्राचार चल रहा है. इस बीच सूद (19.19) की रकम बढ़े हुए मुआवजे की रकम (12.24) से ज्यादा हो गयी है. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा अपनी हिस्सेदारी से ज्यादा के भुगतान का दावा करने के बाद जल संसाधन विभाग ने चुप्पी साध ली है. अब रैयतों द्वारा दायर किये गये Execution Case से सरकार पर दंड लगने का खतरा पैदा हो गया है.
गेतलसूद डैम के लिए भू-अर्जन वाद संख्या 17/75-76 और 28/75-76 के सहारे जमीन का अधिग्रहण किया गया. अवॉर्ड घोषित करने के बाद मुआवजे का भुगतान किया गया. लेकिन 19 रैयतों ने सरकार द्वारा दिये गये मुआवजा पर असंतोष व्यक्त करते हुए न्यायालय का रुख किया.
न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद रैयतों के बढ़े हुए दर पर मुआवजा देने का आदेश दिया. इसके आलोक में बढ़े हुए मुआवजे की गणना की गयी. लेकिन बढ़े हुए मुआवजा की राशि का भुगतान नहीं होने की वजह से रैयतों ने इसकी वसूली के लिए Execution Case दायर किया. इसके बाद वर्ष 2017 से रांची जिला प्रशासन, जल संसाधन विभाग और पेयजल के बीच इस बढ़े हुए मुआवजे के भुगतान के लिए पत्राचार शुरू हुई.
रांची के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी ने वर्ष 2017 से 2024 तक की अवधि में बढ़े हुए मुआवजे की मांग के लिए जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता को कुल 14 पत्र लिखे. लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. इसके बाद रांची के उपायुक्त ने 14 मार्च 2024 को जलसंसाधन सचिव को पत्र लिखा. इसमें उन्होंने कुल 3.87 लाख रुपये के भुगतान का अनुरोध किया. इसमें बढ़े हुए मुआवजे की कुल राशि 1.74 लाख और सूद की राशि 2.13 लाख रुपये शामिल है.
इसके बाद उपायुक्त ने जलसांधन विभाग को दूसरा पत्र लिखा. 12 जुलाई को लिखे पत्र में उपायुक्त ने 10 रैयतों के लिए सूद और मूल सहित कुल 27.56 लाख रुपये के भुगतान की मांग की, ताकि न्यायालय के दंडात्मक कार्रवाई से बचा जा सके.
उपायुक्त का पत्र मिलने के करीब एक साल बाद जल संसाधन विभाग ने 2-7-2025 पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को एक पत्र लिखा. इसमें उपायुक्त द्वारा लिखे गये पत्र का हवाले देते हुए कुल 31.43 लाख रुपये की मांग की. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने 21-7-2025 को जवाब में जल संसाधन विभाग को पत्र भेजा.
इसमें यह कहा गया कि दस्तावेज की जांच से यह पता चलता है कि योजना की प्राक्कलित राशि 8.17 करोड़ रुपये थी. इसमें से पेयजल विभाग को 58.4% और 41.6% विद्युत पर्षद को देना था. हिस्सेदारी के इस फॉर्मूले के तहत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को 4.77 करोड़ और विद्युत पर्षद को 3.40 करोड़ रुपये देना था. पेयजल ने 4.77 करोड़ के बदले 6.98 करोड़ रुपये का भुगतान किया है. इसलिए स्पष्ट रूप से यह बताएं कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को कितनी राशि देनी है. पेयजल एंव स्वच्छता विभाग के इस पत्र के बाद जल संसाधन विभाग ने चुप्पी साध ली. इससे बढ़े हुए मुआवजे के भुगतान का मामला अभी तक उलझा हुआ है.
भुगतान नहीं होने से बढ़ता सूद(लाख में)
| रैयत का नाम | मूल | सूद |
| कुसुम सिंह | 1.01 | 6.67 |
| लुकनी राम महतो | 3.30 | 1.84 |
| उमेश्वर महतो | 4.58 | 2.82 |
| सोबरा खातून | 0.70 | 0.35 |
| मोहम्मद रऊफ | 0.09 | 0.11 |
| लट्टू सरदार | 0.32 | 0.39 |
| बैजू महतो | 0.19 | 0.23 |
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