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घाटशिला : संताली लेखक रामदास टुडू रास्का की मनाई गई 169वीं जयंती

Ghatshila (Rajesh Chowbey) : धरमबहाल पंचायत भवन सभागार में रविवार को अखिल भारतीय संताली लेखक संघ झारखंड शाखा की ओर से महान संताली लेखक रामदास टुडू रास्का का 169वीं जयंती मनाई गई. सर्वप्रथम अतिथियों को पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया गया. इसके पश्चात अतिथियों एवं उपस्थित लोगों ने रामदास टुडू की मूर्ति पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित किये. मुख्य अतिथि शोभा नाथ बेसरा ने कहा रामदास टुडू रास्का का जन्म 2 अक्टूबर 1854 को काड़ूवाकाटा घाटशिला में हुआ था‌. वह बहुत ही तेजस्वी थे संताल समाज के लोगों की पहचान और अस्तित्व बचाने के उद्देश्य से पारंपरिक रीति-रिवाज और धार्मिक व्यवस्था को संकलित करते हुए खेरवाड़ धरम पुथी नामक एक पुस्तक की रचना की. इसे भी पढ़ें : आदित्यपुर">https://lagatar.in/adityapur-municipal-corporation-honored-sanitation-workers-on-gandhi-jayanti/">आदित्यपुर

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संताल समाज के एकता को मजबूती प्रदान की

इस पुस्तक के माध्यम से संपूर्ण संताल समाज में एक नव जागृति का मिसाल प्रस्तुत किया. संताल समाज के एकता को और मजबूती प्रदान की. अतिथि सालखू मुर्मू ने बताया रामदास टुडू रास्का गांव के माझी थे. भुजंग टुडू ने कहा रामदास टुडू रास्का संताल समाज के एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्होंने संताल संप्रदाय को धर्म परिवर्तन से बचाया. जब मिशनरीज इंडिया में आकर तमाम आदिवासियों के धर्म परिवर्तन में लगे थे. उसके साथ हमारे रंदा स्टूडियो रास्का ने 12 वर्ष तक जगह-जगह घूम कर संताल खेरवाल वंशा धर्म पुथी किताब लिखा और हमारे संप्रदाय को धर्म परिवर्तन से बचाया. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-police-arrested-two-for-illegal-recovery-on-nh/">जमशेदपुर

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रामदास टुडू रास्का लेखक और दार्शनिक भी थे

रामदास टुडू रास्का सिर्फ धर्म गुरु ही नहीं बल्कि वह एक लेखक और दार्शनिक भी थे. एक कलाकार और वह मंत्र या गुरु भी थे जिन्होंने बहुत सारे मंत्रों को अपने पास संजो कर रखा था और इससे प्रतीत होता है वह हमारे संतालों के लिए कितने महान व्यक्तित्व थे. मौके पर मुख्य रूप शोभानाथ बेसरा, शंकर सोरेन, सुभाष चंद्र मांडी, मोहन चंद्र बास्के, ज्ञानरंजन मुर्मू, भूजंग टुडु, दुर्गा प्रसाद बास्के, बुढ़ान चन्द्र मुर्मू, पृथ्वी नाथ हांसदा, मनिराम मांडी, पीतंबर हांसदा आदि उपस्थित थे. समारोह का संचालन मानिक हांसदा ने किया तथा सुधीर चंद्र मुर्मू ने धन्यवाद ज्ञापन किया. [wpse_comments_template]

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