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घाटशिला : गौरीकुंज में 75 वर्ष पुराने आम के पेड़ को सहेजने में लगे है कमेटी के लोग

Ghatshila (Rajesh Chowbey) : गौरीकुंज में बांग्ला के साहित्यकार विभूती भूषण बंदोपाध्याय के भाई नुट बिहारी बंदोपाध्याय अपने बड़े भाई द्वारा लगाए गए पेड़ को सहेजने में लगे है. यह पेड़ 75 वर्ष पूर्व लगाया गया था. इस संबंध में अध्यक्ष ने बताया कि उनके भाई नुट बिहारी बंधोपाध्याय ने एक आम का पेड़ लगाया था जो काफी पुराना होने के कारण सूखने के कगार पर है. उसे सहेजने के लिए पक्का घेरा डाल कर दवा का छिड़काव किया जा रहा है. यह पेड़ तथा बिभुतिभूषण बंदोपाध्याय के आवास गौरीकुंज को देखने के लिए पश्चिम बंगाल से प्रत्येक वर्ष 30 से 35 हजार पर्यटक यहां आते हैं. इसे भी पढ़ें :रीजीजू">https://lagatar.in/rijiju-lays-foundation-stone-of-dalai-lama-center-for-tibetan-and-indian-ancient-wisdom-at-bodh-gaya/">रीजीजू

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विभूति बाबू के कर्म स्थल के रूप में घाटशिला को जाना जाता है

[caption id="attachment_517340" align="aligncenter" width="600"]https://lagatar.in/wp-content/uploads/2023/01/MAONGO-TREE.jpg"

alt="" width="600" height="400" /> गौरीकुंज में पर्यटकों की भीड़[/caption] यह जगह पर्यटन क्षेत्र के रूप में जाना जाता है. उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी जमुना बंदोपाध्याय ने आग्रह किया था कि मेरे पति के द्वारा लगाये गये आम के पेड़ को धरोहर के रूप में सहेज के रखना. इस पेड़ के सामने बांग्ला भाषा में लिखा था (दादा विभूति भूषोनेर आम खाबार जोन्ने आम गाछ टा लागीए छी) अर्थात विभूति भूषण को आम खाने के लिए यह पेड़ लगाए थे. अपने साहित्यकार के इस धरोहर को देखने के लिए बंगाल से काफी संख्या में पर्यटक आते हैं. ज्ञात हो कि विभूति भूषण बंदोपाध्याय द्वारा लिखी गई पुस्तकों में से एक पाथेर पंचाली पर सत्यजीत रे के द्वारा हिंदी फिल्म भी बनाई गई थी. विभूति बाबू के कर्म स्थल के रूप में घाटशिला को जाना जाता है. इसे भी पढ़ें :किरीबुरू">https://lagatar.in/kiriburu-president-and-general-secretary-of-the-officers-association-demanded-the-mp-to-reinstate-dasa/">किरीबुरू

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