ने बोधगया में दलाई लामा सेंटर फॉर तिब्बतन एंड इंडियन एंशियंट विजडम की नींव रखी
विभूति बाबू के कर्म स्थल के रूप में घाटशिला को जाना जाता है
[caption id="attachment_517340" align="aligncenter" width="600"]alt="" width="600" height="400" /> गौरीकुंज में पर्यटकों की भीड़[/caption] यह जगह पर्यटन क्षेत्र के रूप में जाना जाता है. उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी जमुना बंदोपाध्याय ने आग्रह किया था कि मेरे पति के द्वारा लगाये गये आम के पेड़ को धरोहर के रूप में सहेज के रखना. इस पेड़ के सामने बांग्ला भाषा में लिखा था (दादा विभूति भूषोनेर आम खाबार जोन्ने आम गाछ टा लागीए छी) अर्थात विभूति भूषण को आम खाने के लिए यह पेड़ लगाए थे. अपने साहित्यकार के इस धरोहर को देखने के लिए बंगाल से काफी संख्या में पर्यटक आते हैं. ज्ञात हो कि विभूति भूषण बंदोपाध्याय द्वारा लिखी गई पुस्तकों में से एक पाथेर पंचाली पर सत्यजीत रे के द्वारा हिंदी फिल्म भी बनाई गई थी. विभूति बाबू के कर्म स्थल के रूप में घाटशिला को जाना जाता है. इसे भी पढ़ें :किरीबुरू">https://lagatar.in/kiriburu-president-and-general-secretary-of-the-officers-association-demanded-the-mp-to-reinstate-dasa/">किरीबुरू
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