alt="" width="360" height="180" /> श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित विद्यार्थी[/caption] उन्होंने संघर्ष करते हुए अपना पढ़ाई जारी रखा तथा रेडियम की खोज की. उन्होंने 21 दिसंबर 1898 में रेडियम की खोज की. यह खोज चिकित्सा क्षेत्र में एवं कैंसर जैसे असाध्य रोग के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध हुआ. वे विख्यात भौतिकविद् एवं रसायनशास्त्री भी थीं. 1904 में भौतिकी में तथा 1911 में रसायनशास्त्र पर नोवेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाली ये पहली महिला वैज्ञानिक थी. इसे भी पढ़े : घाटशिला:">https://lagatar.in/ghatshila-mla-ramdas-soren-laid-the-foundation-stone-of-three-schemes-worth-65-lakhs-in-dampara-area/">घाटशिला:
दामपाड़ा क्षेत्र में विधायक रामदास सोरेन ने किया 65 लाख की तीन योजनाओं का शिलान्यास मैडम क्यूरी अपनी खोजों का इस्तेमाल लोगों के हित के लिए करना चाहतीं थीं. नोवेल पुरस्कार से प्राप्त धन को उन्होंने लोगों की हित के लिए दान कर दिया था. भौतिक विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. कन्हाई बारिक ने उनके जीवनी पर विस्तार से प्रकाश डाला. कार्यक्रम का संचालन बनौली बिषई व इशिका अग्रवाल ने किया. धन्यवाद ज्ञापन मुकेश कुमार ने किया. इस मौके पर डॉ. पी. के. गुप्ता, प्रो इंदल पासवान, प्रो. महेश्वर प्रमाणिक, डॉ. संदीप चंद्रा, डॉ. एस. पी. सिंह, प्रो. राम विनय कुमार श्याम, प्रो. एन.आर. महतो, प्रो अर्चना सुरीन, डेजी सेवा, मो शाहिद, मल्लिका शर्मा के अलावे काफी संख्या में भौतिक विज्ञान विभाग के छात्र उपस्थित थे. [wpse_comments_template]

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