Ghatshila (Rajesh Chowbey) : पंचायती राज व्यवस्था के तहत 29 विषयों से जुड़े विकास कार्य पिछले 3 टर्म से चुने पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा किया जा रहा है. परंतु एक भी ऐसा पंचायत नहीं जिस में कोई बदलाव देखने को मिला हो. घाटशिला प्रखंड के पावड़ा पंचायत कि भी तस्वीर कुछ ऐसी ही है. इस पंचायत में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से लाखों रुपया खर्च कर सोलर संचालित जल मीनार लगाया गया था. आज यह पूरी तरह से सफेद हाथी साबित हो रहा है. पंचायत क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट भी लगवाई गई थी परंतु ज्यादातर खराब पड़ी है. इसे भी पढ़ें : जमशेदपुर">https://lagatar.in/jamshedpur-3-lakh-stolen-by-cutting-grill-in-govindpur-woman-attacked-with-brick-for-protesting/">जमशेदपुर
: गोविंदपुर में ग्रिल काटकर 3 लाख की चोरी, विरोध करने पर महिला पर किया ईंट से हमला पंचायत कार्यालय पूरी तरह सक्रिय होने के बाद भी विकास योजनाएं धरातल पर नहीं दिखती है. पावड़ा पंचायत सचिवालय में पंचायत सचिव किरण शुक्ला अपने कार्यालय कक्ष में रोजाना ही अपने कार्यों का निष्पादन करते देखे जा सकते है. विकास योजनाओं का अनुमोदन पंचायत से कराने के पूर्व सर्वप्रथम ग्राम सभा आयोजित की जाती है. जिसमें ग्राम प्रधान महिला समिति की सदस्य तथा ग्राम प्रधान की उपस्थिति में योजनाओं का चयन किया जाता है. इसके पश्चात पंचायत कार्यकारिणी की बैठक में प्रमुखता के आधार पर योजनाओं का ऑनलाइन एंट्री कर साल भर के अंदर फंड के आधार पर योजनाएं ली जाती है. 15वें वित्त आयोग से मिले अनुदान को टायड तथा अनडॉयड मद में खर्च किया जाता है. [wpse_comments_template]
घाटशिला : सिर्फ कागजों तक ही सीमित है पंचायत क्षेत्र का विकास, नहीं बदली तस्वीर

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