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गिरिडीह : संशोधित कोर्ट फीस विधेयक को अधिवक्ता संघ ने बताया काला कानून

Giridih : संशोधित कोर्ट फीस विधेयक को लेकर अधिवक्ताओं में आक्रोश है. 6 जनवरी को लंगटा बाबा समाधि स्थल पर चादर पोशी का अवकाश रहने के बावजूद बड़ी संख्या में अधिवक्ता व्यवहार न्यायालय परिसर में जुटे तथा सभा कर नारेबाजी की. सभा को संबोधित करते हुए अधिवक्ता संघ के महासचिव चुन्नूकांत ने कहा कि कोर्ट फीस विधेयक राज्य सरकार का काला कानून है. लोकतंत्र में सभी को सस्ता और सुलभ न्याय संवैधानिक अधिकार है. संशोधित कोर्ट फीस विधेयक राज्य सरकार का हिटलरी फऱमान है. सरकार सस्ता और सुलभ न्याय का दावा करती है, लेकिन इस विधेयक ने सरकारी दावे के पोल खोल दिए हैं. यह भू माफिया को बढ़ावा देने वाला विधेयक है. फीस वृद्धि के कारण अब गरीब अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा पाएंगे. भू माफिया गरीबों की जमीन आसानी से हड़प लेंगे. जमीन व अन्य संपत्ति मामलों में गरीबों के लिए अब सिविल सूट करना आसान नहीं होगा. विधेयक में सिविल सूट के लिए फीस बढाकर 30 हजार रुपए से 3 लाख रुपए कर दी गई है. झारखंड अधिवक्ता संघ के सदस्य परमेश्वर मंडल ने राज्य सरकार से एडवोकेट प्रोटेक्शन बिल लागू करने की मांग करते हुए कहा कि कानून के अभाव में कई अधिवक्ता झूठे मुकदमे में फंसा दिए जाते हैं. अधिवक्ताओं पर जानलेवा हमले किए जाते हैं. पूर्व मंत्री सह अधिवक्ता चंद्रमोहन प्रसाद ने राज्य सरकार से अधिवक्ताओं के लिए हेल्थ इंश्योरेंस व ग्रुप बीमा कराने की मांग की. मौके पर सच्चिदानंद सिन्हा, अजय कुमार सिन्हा, प्रमोद कुमार, संजीव कुमार, अंजनी कुमार सिन्हा, दीपक कुमार, गोपाल रजक समेत अन्य अधिवक्ता मौजूद थे. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=519552&action=edit">यह

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