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गिरिडीहः बाहा बोंगा पर्व प्रकृति, फूलों व नई ऊर्जा का प्रतीक- सुदिव्य

मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि मरांग बुरु व जाहेर आयो की आराधना संथाल समाज की प्राचीन परंपरा है. बाहा बोंगा पर्व प्रकृति, फूलों व नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. झारखंड की पहचान उसकी समृद्ध आदिवासी संस्कृति व परंपराओं से है.
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मधुबन में बाहा पर्व का उल्लास,  नगर विकास मंत्री ने लिया भाग

 
Giridih : गिरिडीह जिले के मधुबन में आयोजित तीन दिवसीय मरांग बुरु जुग जाहेर बाहा बोंगा पर्व में समाज के लोगों की भीड़ जुट रही है. पर्व के दूसरे दिन शुक्रवार को झारखंड सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, घाटशिला विधायक सोमेश चंद्र सोरेन, राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त फागू बेसरा सहित कई अधिकारी व गणमान्य लोग शामिल हुए. गांव के जाहेर थान में विधि-विधान से पूजा हुई. मंत्री ने संथाली रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि व शांति की कामना की.


मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि मरांग बुरु व जाहेर आयो की आराधना संथाल समाज की प्राचीन परंपरा है. बाहा बोंगा पर्व प्रकृति, फूलों व नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. झारखंड की पहचान उसकी समृद्ध आदिवासी संस्कृति व परंपराओं से है. मरांग बुरु जुग जाहेर बाहा बोंगा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, प्रकृति संरक्षण और सामूहिक सद्भाव का संदेश देने वाला पर्व है. राज्य सरकार आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं संवर्धित करने के लिए प्रतिबद्ध है.


घाटशिला विधायक सोमेश चंद्र सोरेन, राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त फागू बेसरा, डीसी रामनिवास यादव ने भी विचार रखे. समारोह में एसपी डॉ विमल कुमार, बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्रामीण व आदिवासी समाज के गणमान्य लोग शामिल हुए. पारंपरिक नृत्य-गान का भी आयोजन हुआ, जिसमें महिलाओं व युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.

 


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