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गिरिडीह : सिंचाई सुविधाओं पर करोड़ों रुपये सरकारी राशि खर्च, बारिश पर निर्भर किसान

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Giridih : गिरिडीह (Giridih)- जिले में सिंचाई सुविधा के नाम पर करोड़ों रुपए सरकारी राशि खर्च किए जा चुके हैं. करीब सभी गांवों में वृहद तालाब और चेकडैम का निर्माण किया गया है. बावजूद इसके खेती के लिए किसान बारिश पर निर्भर हैं. सिंचाई के लिए बनाए गए तालाब और चेकडैम सूख जाने के कारण किसान सिंचाई नहीं कर पा रहे. तालाब और चेकडैम के निर्माण में किसानों के हित का ख्याल नहीं रख ठेकेदारों के हित का ख्याल रखा गया. अधिकांश चेकडैम का निर्माण पानी भरे नाले में करने के बजाए सुखे नाले में किया गया. चेकडैम में सिर्फ बरसात के समय पानी जमा होता है. बारिश नहीं होने पर चेकडैम में एक बूंद पानी नहीं रहता. यही हाल सिंचाई के लिए बने बड़े-बड़े तालाबों का भी है. अधिकांश तालाबों में बरसात के मौसम में पानी रहता है, लेकिन कुछ दिनों बाद वह सूख जाते हैं. इस समय वृहद कुआं ही सिंचाई के लिए सबसे ज्यादा कारगर सिद्ध हो रहा है. जिले में मनरेगा योजना के तहत भी कई छोटे-बड़े तालाब बनाए गए हैं, लेकिन इन तालाबों से भी खेतों को पानी नहीं मिल रहा है. बारिश के अभाव में खेतो में बोए गए धान के बिचड़े सूख रहे हैं. जिले में सुखाड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है. किसान चिंतित नजर आ रहे हैं. बिचड़े को बचाने के लिए जद्दोजहद करना पड़ रहा है. बेंगाबाद प्रखंड के आस्था गांव के किसान खुर्शीद अनवर हादी ने बताया कि हर साल श्रावण महीने में आधे से अधिक धनरोपनी हो जाती थी. इस बार बारिश नहीं होने के कारण खेत सूखे पड़े हैं. कुएं को छोड़कर बाकी वैकल्पिक सिंचाई के साधन कारगर नहीं है. कुछ दिन और बारिश नहीं होने पर धान की खेती नहीं होगी. बरसात के मौसम में की जाने वाली अन्य खरीफ फसलों पर भी बुरा असर पड़ेगा. जेएमएम विधायक डॉ. सरफराज अहमद ने बताया कि सिंचाई साधन के लिए जगह के चयन में किसानों से राय मशविरा किया जाना चाहिए. इसके लिए किसानों को भी तत्पर होना होगा. किसान अधिकारियों से मिलकर जगह का चयन करें, जिससे खेतों को सालों भर पानी मिलता रहे. सही जगहों पर सिंचाई साधन रहने से किसानों को बारिश पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इस संबंध में डीडीसी शशि भूषण मेहरा का कहना है कि इस वर्ष जिले में 75 तालाबों का निर्माण और जीर्णोद्धार किया जाएगा. नए तालाबों का निर्माण किसानों से राय-मशविरा कर किया जाएगा. जीर्णोद्धार भी उन्हीं तालाबों का होगा जिसमें साल भर पानी रह सके. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=364988&action=edit">यह

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