देवरी प्रखंड की बैरिया पंचायत में तालाब निर्माण का मामला Abhay Verma Giridih : मनरेगा का मुख्य उदेश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को 100 दिन की मजदूरी की गारंटी देना है. लेकिन सरकारी बाबुओं और बिचौलियों ने इसमें ऐसा खेल रचा है कि मजदूरों के लिए बनी इस योजना का मलाई सरकारी बाबू और बिचौलिये खा रहे हैं. ताजा मामला गिरिडीह जिले के देवरी प्रखंड की बैरिया पंचायत का है. यहां बेलकुशी गांव में मनरेगा के तहत टांड़ खेत के बगल में तालाब का निर्माण (मस्टररोल संख्या 7080901340593) करवाया जा रहा है. कार्यस्थल पर एक पुराना डोभा रूपी गड्ढा है] जिसमें एक बूंद भी पानी नहीं है. 9 जनवरी को ऑनलाइन मजदूरों की हाजिरी बनाई गई है, जबकि कार्यस्थल पर एक भी मजदूर नहीं थे. इतना ही नहीं एनएमएमएस रिपोर्ट में भी घालमेल कर मजदूरों की हाजिरी बनाई जा रही है. वहीं, स्थल बोर्ड पर वित्तीय वर्ष 2023-24, जबकि ऑनलाइन 2021-22 दिखा रहा है. इस योजना में अब तक 299404 रुपए की निकासी हो चुकी है.
बीडीओ बोले- मामले की होगी जांच
संदेह यह भी जताया जा रहा है कि पुराना डोभा को ही तालाब का रूप दिया जा रहा हो. इस बाबत जब जानकारी के लिए देवरी ब्लॉक कार्यालय स्थित मनरेगा बीपीओ के कक्ष में पहुंचने पर, उन्होंने पहले तो टाल-मटोल का प्रयास किया. फिर, एक बिचौलिए को बुलाकर पत्रकारों से बहसबाजी शुरू करवा दी. साथ ही मामले को उजागर नहीं करने का दबाव बनाया जाने लगा. इसके बाद देवरी बीडीओ कुमार बंधु कच्छप को मामले से अवगत कराया गया. उन्होंने मामले को नोट करते हुए जांच करने की बात कही. वहीं, गिरिडीह की मनरेगा लोकपाल तमन्ना प्रवीण को भी मामले से अवगत कराया गया. उन्होंने भी जांच का आश्वासन दिया है. यह भी पढ़ें :
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