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गिरिडीह : शिक्षित युवा को नहीं मिली नौकरी, मुर्गी पालन कर बने आत्मनिर्भर

 
Giridih : गिरिडीह (Giridih)- मेहनत और निष्ठा से कसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है. बेंगाबाद प्रखंड के आस्था गांव निवासी खुर्शीद अनवर ने इस बात को सही साबित किया है. शिक्षित बेरोज़गार खुर्शीद मुर्गी पालन कर आत्मनिर्भर बने हैं. स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी नहीं मिलने पर उन्होंने हताश होने के बजाए नई संभावनाएं तलाशी. अपने घर पर ही मुर्गी पालन शुरू किया. आज की तारीख में उन्हें हर महीने 25 से 30 हजार रुपये आमदनी हो रही है. खुर्शीद अनवर ने बताया कि बैंक से ऋण लेकर छोटे पैमाने पर मुर्गी पालन शुरू किया. धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ाता गया. दायरा बढ़ने के साथ ही आमदनी भी बढ़ती गई. मुर्गी पालन शुरू करने से पूर्व उन्होंने तकनीकी प्रशिक्षण भी लिया. खुर्शीद के अनुसार मुर्गी के चूजे को ओपेन फार्मिंग यानी खुले स्थान पर पाला जाता है. करीब एक सौ दिनों में एक चूजा एक किलोग्राम का आकार हासिल कर लेता है. गिरिडीह क्षेत्र में सोनाली और कड़कनाथ नस्ल की मुर्गी का ज्यादा पालन किया जाता हैं. थोक भाव में सोनाली मुर्गी की कीमत 300 से 350 रुपये और कड़कनाथ की कीमत 500 से 600 रुपये प्रतिकिलो है. मुर्गी पालकों को इस इलाके में क्षेत्रीय बाजार भी उपलब्ध है. मुर्गी का चूजा रांची, कोलकाता और बिहार के सासाराम से मंगवाया जाता है. बीडीओ ने की तारीफ  बेंगाबाद के बीडीओ मो. कयूम अंसारी ने खुर्शीद अनवर को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बताया. उन्होंने कहा कि युवाओं को खुर्शीद अनवर से सीख लेनी चाहिए. यहां के बेरोजगार युवक दूसरे राज्य नौकरी की तलाश में जाते हैं. इसके विपरीत खुर्शीद अनवर अपने घर में ही रहकर मुर्गी पालन से आत्मनिर्भर बने हैं. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=351500&action=edit">यह

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