बुजुर्गों का सम्मान भारतीय परंपरा रही है
उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता से सबक लेकर विदेशों में संयुक्त परिवार की संस्कृति पनप रही है. वहीं पाश्चात्य संस्कृति में डूबे भारत में संयुक्त परिवार धीरे-धीरे खत्म हो रहा है. समारोह में बच्चों ने दादी अम्मा, दादी अम्मा मान जा, नानी तेरी मोरनी को मोर ले गए और प्यारे दादाजी है सबसे अनमोल जैसे गीतों पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर समां बांध दिया. अनमोल मिश्रा ने कविता पाठ किया. मुख्य अतिथि उमेश लाल वर्णवाल ने कहा कि विद्या भारती के विद्यालयों में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान और संस्कार भी दिया जाता है. संस्कारवान बच्चे देश के भविष्य हैं. ये बच्चे आगे चलकर अपनी संस्कृति बचाए रखने में मददगार साबित होंगे. दूसरे मुख्य अतिथि ओमप्रकाश सिन्हा ने कहा कि यह समारोह वर्तमान पीढ़ी को बड़े-बुजुर्गों के प्रति जागरूक करने के लिए आयोजित किया गया है. बच्चों में इसकी समझ विकसित हो इसके लिए अभिभावकों को भी आचरणशील होना पड़ेगा. मौके पर अरविंद त्रिवेदी, पृथा सिन्हा, रुपम, कामेश्वर राय, राजेंद्र लाल वर्णवाल, झुपर महतो, दिनेश सिंह, मनोज चौधरी, रामकिशोर प्रसाद, बेबी सरकार समेत अन्य मौजूद थे. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=289585&action=edit">यहभी पढ़ें : गिरिडीह : डॉ. अंबेडकर ने समाज को नई सीख दी- विधायक [wpse_comments_template]

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