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गिरिडीह : धनवार में इंडिया गठबंधन तार-तार, झामुमो व माले के प्रत्याशी मैदान में

बाबूलाल मरांडी व माले के राजकुमार के बीच मुख्य मुकाबला 2019 के चुनाव में झामुमो रहा था छठे स्थान पर, वोट मिले थे मात्र 15416  Praveen Kumar Giridih/Ranchi : गिरिडीह जिले की राजधनवार विधानसभा सीट झारखंड की हाॅट सीट बन गई है. यहां प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी जो एनडीए के मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे हैं, प्रत्याशी हैं. जबकि भाकपा माले के टिकट पर राजकुमार यादव यहां से उम्मीदवार होंगे. वहीं, इंडिया गठबंधन का साझेदार झामुमो ने भी इस सीट से उम्मीदवार दिया है. लेकिन मुख्य मुकाबाला बाबूलाल मरांडी व राजकुमार यादव के बीच ही होने की उम्मीद है. इंडिया गठबंधन से दो दलों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में होने से भाजपा यहां से आसन जीत मानने लगी है. जानकार बताते हैं कि झामुमो के प्रत्याशी उतारने से गठबंधन के वोटों का विखराव होगा, जिसका फायदा भाजपा को मिलेगा. इंडिया गठबंधन के नेता भाजपा के खिलाफ मजबूती से चुनाव लड़ने की बात कहते रहे हैं. लेकिन गठबंधन के दो दलों के प्रत्याशी चुनाव मैदान में होने से दूसरे जिलों की विधानसभा सीटों पर भी इसका असर पड़ सकता है. भाकपा माले की गांडेय व जमुआ सीट पर काफी मजबूत पकड़ है. माले जामुआ विधानसभा से भी चुनाव लड़ना चाहता था. लेकिन झामुमो ने केदार हजरा को जमुआ से उतारा है. चुनाव से पहले वह भाजपा से पाला बदलकार झामुमो में शामिल हुए हैं. सीटिंग विधायक को लेकर क्षेत्र के लोगों में नाराजगी है. वहीं गठबंधन से माले को टिकट नहीं मिलने को लेकर भी क्षेत्र में खूब चर्चा है. लोग तो यह भी कह रहे हैं कि झामुमो ने धनवार से निजामुद्दीन अंसारी को उतार कर बाबूलाल मरांडी को मदद पहुचाने का काम किया है.

जातीय समीकरण से तय होती रही है जीत-हार

धनवार विधानसभा में जातीय समीकरण काफी मायने रखता है. माले के राजकुमार यादव यहां से बाबूलाल मरांडी को 2014 के चुनाव में हरा चुके हैं. इस सीट पर यादव, मुस्लिम व भूमिहार मतदाता निर्णायक रहते हैं. इसलिए भी मुख्य मुकाबला राजकुमार यादव और बाबूलाल मरांडी के बीच माना जा रहा है. वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार कितने वोट लाते हैं, इससे हार-जीत तय होगी.

राजकुमार यादव 1995 में पहली बार लड़े थे चुनाव

1995 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में धनवार विधानसभा सीट पर पहली दफा भाकपा माले के राजकुमार यादव उम्मीदवार लड़े थे. यहां जनता दल के गुरुसहाय महतो, कांग्रेस के दिग्गज तिलकधारी प्रसाद सिंह, भाजपा के रणनीतिकार कहे जाने वाले जगदीश प्रसाद कुशवाहा के अलावा क्षेत्र के दिग्गज नेता हरिहर नारायण प्रभाकर के सामने भाकपा माले ने राजकुमार को उम्मीदवार बनाया था. हालांकि राजकुमार पांचवें स्थान पर रहे थे. उस चुनाव में गुरुसहाय महतो को 38604 मत, तिलकधारी प्रसाद सिंह को 22982, जगदीश प्रसाद कुशवाहा को 15036, झामुमो के उमाचरण साव को 13248 व राजकुमार यादव को महज 6704 मत मिले थे.

2000 में बढ़ा राजकुमार का ग्राफ

2000 के चुनाव तक इस विधानसभा सीट से भाकपा माले के राजकुमार स्थापित नेता बन चुके थे. 2000 के बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा ने डॉ रवीन्द्र राय, झामुमो ने निजामुद्दीन अंसारी, राजद ने गुरुसहाय महतो को उम्मीदवार बनाया था. माले के साथ कड़ी टक्कर में भाजपा के रवीन्द्र राय विजयी हुए थे. रवीन्द्र राय को 34145 मत मिले थे, जबकि राजकुमार यादव को 31304 मत मिले थे. राजकुमार यह चुनाव महज 2841 वोट से हारे थे.

2005 में जीत से महज 3334 वोट रहे दूर

2005 के चुनाव में भाजपा ने रवीन्द्र कुमार राय को फिर से मैदान में उतारा. उनके सामने माले के टिकट पर राजकुमार यादव ने ताल ठोंक दी. वहीं, झामुमो ने भी निजामुद्दीन अंसारी को फिर से मैदान में उतारा था. इस बार भी जीत का सेहरा भाजपा के रवीन्द्र के सिर पर चढ़ा. राजकुमार यादव 3334 वोट से बाजी हार गए. हालांकि 2000 की तरह 2005 में भी वह दूसरे स्थान पर रहे. इस चुनाव में रवींद्र राय को 42357 व राजकुमार यादव को 39023 मत मिले थे.

2009 में भी रनर रहे राजकुमार

2009 के विधानसभा चुनाव में भाजपा, भाकपा माले, झामुमो के साथ झाविमो के उम्मीदवार मैदान में थे. भाजपा ने रवीन्द्र राय, माले ने राजकुमार यादव व झाविमो ने झामुमो छोड़ चुके निजामुद्दीन अंसारी को मैदान में उतारा था. उस चुनाव भाजपा के रवीन्द्र राय पिछड़ गए और टक्कर माले व जेवीएम में हो गई. जेवीएम के निजामुद्दीन को 50392 मत, जबकि राजकुमार यादव को 45419 मत मिले. इस तरह राजकुमार यादव महज 4973 मत से हार गए.

2014 में बाबूलाल को दी मात, बने विधायक

2014 के विधानसभा चुनाव में जेवीएम से खुद बाबूलाल मरांडी मैदान में थे. जबकि भाजपा ने पूर्व आईजी लक्ष्मण प्रसाद सिंह को मैदान में उतारा. वहीं भाकपा माले ने लगातार पांचवीं दफा राजकुमार यादव को प्रत्याशी बनाया. इस चुनाव में वोटरों ने राजकुमार का साथ दिया और वह विजयी होकर पहली दफा विधायक बने. इस चुनाव में राजकुमार को 50634 तो बाबूलाल को 39922 मत मिला. इस तरह 2014 में राजकुमार 10712 वोट से जीत गए.

2019 में बाबूलाल ने लिया हार का बदला

2019 के चुनाव में राजकुमार फिर से मैदान में थे. इनके सामने जेवीएम से बाबूलाल मरांडी, भाजपा से लक्ष्मण प्रसाद सिंह, झारखंड मुक्ति मोर्चा से निजामुद्दीन अंसारी व निर्दलीय अनूप सोंथालिया मैदान में थे. इस बार बाबूलाल ने बाजी मार ली. बाबूलाल को 52352 मत और दूसरे स्थान पर रहे भाजपा के लक्ष्मण प्रसाद सिंह को 34802 मत मिले. इस चुनाव में राजकुमार यादव 32245 वोट लाकर तीसरे स्थान पर रहे. निर्दलीय अनूप सोंथालिया को 22624 वोट लाकर चौथे व एमआईएमआईएम का प्रत्याशी पांचवें स्थान पर रहा. जबकि झामुमो के निजामुद्दीन अंसारी मात्र 15416 वोट लाकर छठे स्थान पर थे. यह भी पढ़ें : बरामद रुपए [wpse_comments_template]    

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