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गिरिडीह : संत व संस्कृति की सुरक्षा के लिए तीर्थ स्थल का सुरक्षित रहना जरूरी- जैन मुनि

 
Giridih : पारसनाथ के श्री सम्मेद शिखर जी को झारखंड सरकार पर्यटन क्षेत्र घोषित करने पर विचार कर रही है. जैन समुदाय इसका विरोध कर रहे हैं. जैनियों का मानना है कि पर्यटन स्थल घोषित किए जाने पर बाहर से आकर सैलानी यहां की पवित्रता नष्ट करेंगे. जैन मुनियों में भी सरकार के निर्णय से नाराजगी है. जैन मुनि श्री पीयूष सागर जी महाराज ने शुभम संदेश व लगातार मीडिया से खास बातचीत करते हुए कहा कि तीर्थ स्थल सुरक्षित रहने पर संत व संस्कृति के साथ-साथ मानव समाज सुरक्षित रहेंगे. तीर्थ क्षेत्र की अपनी मर्यादा होती है. इसकी मर्यादा व गरिमा की रक्षा करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है. किसी भी धर्म के आस्था और श्रद्धा से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए. भारत की पहचान शुरू से ही संस्कृति संवर्धन करने वाले देश में रही है. तीर्थ स्थल और पर्यटक स्थल का अलग-अलग अर्थ है. पर्यटन स्थल का मतबल केवल मनोरंजन होता है. श्री सम्मेद शिखर मनोरंजन की जगह नहीं होकर पवित्र तीर्थ क्षेत्र है. यह जगह प्राचीन काल से दर्शन की तपोभूमि रहा है. जैन धर्मांवलंबियों का इस क्षेत्र से गहरा लगाव है. श्री सम्मेद शिखर जी की महिमा अपरंपार है. जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों ने यहां तपस्या की. जैन धर्मांवलंबी 9 किलोमीटर ऊंचे पर्वत पर चढ़ते हैं. फिर 9 किलोमीटर पर्वत की वंदना करते हैं. इसके बाद 9 किलोमीटर नीचे उतरते हैं. कुल मिलाकर 27 किलोमीटर चढ़ने और उतरने में जैन श्रद्धालुओं को थकान की अनुभूति नहीं होती. उन्होंने बताया कि आस्था के इस केंद्र को पर्यटक स्थल बनाया जाना उचित नहीं. झारखंड सरकार इस पर विचार करे. बातचीत के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की. कहा कि वे धर्म रक्षक हैं. उनके नेतृत्व में भारत की ख्याति विश्व में फैल रही है. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=514912&action=edit">यह

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