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गिरिडीह : पारसनाथ को लेकर जैन समाज में उबाल, मौन जुलूस निकालकर किया विरोध

 
Giridih : जैनियों के प्रमुख तीर्थ स्थल श्री सम्मेद शिखर जी (पारसनाथ) को लेकर सकल जैन समाज ने 5 जनवरी को गिरिडीह शहर में मौन जुलूस निकाला. शहर के बड़ा चौक स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर से शुरू मौन जुलूस रेलवे स्टेशन, कालीबाड़ी चौक, कचहरी रोड होते हुए बीटी फील्ड पहुंचा. जुलूस का नेतृत्व श्री दिगंबर जैन समाज गिरिडीह के मंत्री नोकेश जैन ने किया. हाथों में तख्तियां थामे करीब दो हजार की संख्या में बच्चे, महिलाएं व पुरुष इसमें शामिल हुए. तख्तियों में श्री सम्मेद शिखर जी को पर्यटन स्थल घोषित नहीं किए जाने का स्लोगन लिखा था. जुलूस में गिरिडीह, देवघर, धनबाद, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, रांची समेत झारखंड के अन्य जिलों से भी जैन समाज शामिल हुए. जुलूस को लेकर दिगंबर जैन मंदिर में शुरू से ही गहमागहमी थी. जुलूस समाप्त होने के बाद समाहरणालय पहुंचकर देश के पीएम व झारखंड के सीएम के नाम डीसी को ज्ञापन सौंपा गया. जुलूस में महेश जैन, उमेश जैन, दिलीप जैन, अविनाश जैन, अजय जैन, रश्मि जैन समेत समाज से जुड़े बड़ी संख्या में जैन धर्मांवलंबी शामिल हुए.

अन्य समाज ने भी दिया समर्थन

जैनियों के आंदोलन को अन्य समाज ने भी समर्थन दिया है. जुलूस में भी समर्थन देने वाले समाज के लोग शामिल हुए. समर्थन देने वालों में मारवाड़ी समाज, बर्णवाल समाज और पंजाबी समाज शामिल है. बर्णवाल समाज की अध्यक्ष ललिता बर्णवाल ने कहा कि पारसनाथ जैनियों का विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल है. इसकी गरिमा का ख्याल रखते हुए इस जगह को पर्यटन स्थल घोषित नहीं किया जाना चाहिए. पंजाबी समाज के अमरजीत सिंह सलूजा ने कहा कि सभी धर्म के अनुयायियों को अपने धर्म स्थल की रक्षा करने का अधिकार है. सरकार श्री सम्मेद शिखर जी को धार्मिक स्थल ही रहने दे. मारवाड़ी समाज के राकेश मोदी ने कहा कि सम्मेद शिखर जैनियों का पवित्र तीर्थ स्थल है. इसे पर्यटन स्थल घोषित नहीं किया जाना चाहिए. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=518122&action=edit">यह

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