जुटाए जाते जरूरी संसाधन
वरिष्ठ अधिवक्ता सह कांग्रेस नेता अजय कुमार सिन्हा का कहना है कि सदर अस्पताल की बाहरी चमक पर खर्च करने से बेहतर होता कि यहां जरूरी संसाधन जुटाए जाते. सड़क हादसे में घायल लोगों के लिए अत्याधुनिक वेंटीलेटर की जरूरत होती है. सदर अस्पताल में यह सुविधा आज भी नहीं है. पेयजल की सुविधा नहीं है. दो वर्ष पूर्व वाटर फिल्टर इंस्टॉल किया गया था. चंद महीने बाद ही इसके पार्ट-पूर्जे निकाल लिए गए. परिसर में सुलभ शौचालय का भी निर्माण किया गया, लेकिन उसमें भी ताले लटक रहे हैं.सोलर प्लांट पर 91 लाख खर्च
सदर अस्पताल में रोशनी के लिए सोलर प्लांट पर वर्ष 2018 में 91 लाख रुपए खर्च किए गए. चंद महीने बाद ही यह खराब हो गया. सदर अस्पताल समेत जिले के 15 स्वास्थ्य केंद्रों में सोलर लाइट लगाने की फिर तैयारी चल रही है.विभागीय हस्तक्षेप नहीं
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. उपेंद्र दास ने बताया कि भवन निर्माण व रखरखाव पर किए जाने वाले खर्च में विभाग हस्तक्षेप नहीं करता. रांची स्थित मुख्यालय ही कार्य एजेंसी को देता है. स्वास्थ्य विभाग कार्य पूरा होने पर केवल एनओसी देता है. एनओसी देते वक्त प्रबंधन को कार्य की गुणवत्ता का ख्याल रखना चाहिए. सोलर लाइट मामले में ही एजेंसी को एनओसी सिविल सर्जन के बजाए सदर अस्पताल प्रबंधक ने दिया. यह मामला अभी जांच के लिए विचाराधीन है. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=402740&action=edit">यहभी पढ़ें : गिरिडीह : राष्ट्रीय खेल दिवस की पूर्व संध्या पर निकाली साइकिल रैली [wpse_comments_template]

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