प्रो. वर्मा के परिवार का भाजपा से पुराना रिश्ता, लोकसभा चुनाव लड़ने की चर्चा
प्रो. वर्मा के परिवार का भाजपा से पुराना संबंध रहा है. उनके चाचा स्वर्गीय रीतलाल प्रसाद वर्मा जनसंघ के दिग्गज नेता थे. वे कोडरमा लोकसभा क्षेत्र से पांच बार सांसद रहे. पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए प्रो. जयप्रकाश वर्मा को यूं ही भाजपा छोड़कर झामुमो में शामिल हो जाना कई सवाल खड़े कर गए. 2004 में रीतलाल वर्मा की मौत के बाद कोडरमा लोकसभा से उनकी पत्नी चंपा वर्मा चुनाव लड़ीं, जिसमें उन्हें 2.14 लाख मत ही मिले. जयप्रकाश के चचेरे भाई प्रणव वर्मा 2009 में राजद और 2014 में जेवीएम के टिकट पर चुनाव लड़े. दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा. स्वर्गीय वर्मा को छोड़ परिवार के किसी सदस्यों ने कोडरमा लोकसभा क्षेत्र से चुनाव नहीं जीता. चर्चा है कि आगामी वर्ष 2024 में प्रो. जयप्रकाश वर्मा कोडरमा लोकसभा क्षेत्र से झामुमो प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ेंगे. वे भी चुनाव जीता पाएंगे या नहीं यह भविष्य ही बताएगा.2005 में भी भाजपा में हुई थी टूट
वर्ष 2005 के विधानसभा चुनाव के समय भी गिरिडीह जिला भाजपा में बड़ी टूट हुई थी. भाजपा के काबीना मंत्री व पार्टी प्रत्याशी चंद्रमोहन प्रसाद की कार्यशैली से नाराज पार्टी के 16 दिग्गज नेताओं ने झामुमो का दामन थाम लिया था. झामुमो नेता मुन्ना लाल की अकड़ के चलते सभी फिर भाजपा में लौट आए.क्या इतिहास दोहराई जाएगी?
सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा छोड़कर झामुमो में शामिल हुए नेता पुन: भाजपा में लौटेंगे? पुराने इतिहास पर नजर दौड़ाई जाए तो 2005 में भाजपा से झामुमो में शामिल हुए 16 नेता भाजपा में लौट आए थे. हो सकता है इस बार भी इतिहास की पुनरावृत्ति हो. प्रो. जयप्रकाश वर्मा समेत अन्य भाजपा में लौट आए. यह">https://lagatar.in/wp-admin/post.php?post=514720&action=edit">यहभी पढ़ें : गिरिडीह : घर में चोरी करने घुसे चोर की पीटकर हत्या, जांच जारी [wpse_comments_template]

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